मोदी सरकार का एक फैसला और रॉकेट बन गए ये 3 शेयर! एक में तो लग गया अपर सर्किट, बाकी दो भी उछले

कैबिनेट ने FY40 तक ₹10,000 करोड़ वाली कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम को मंजूरी दी। इसके बाद Jupiter Wagons, Kalyani Cast-Tech और DCM Shriram Industries के शेयरों में तेजी दिखी

अपडेटेड Oct 29, 2026 पर 12:36 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
मोदी सरकार के एक फैसले से तीन शेयरों में शानदार तेजी दिख रही है.

मोदी सरकार ने बुधवार, 28 अक्टूबर को कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (CMPS) को मंजूरी दे दी है। इस स्कीम का बजट ₹10,000 करोड़ है, जो FY40 तक खर्च होगा। फैसले का असर शेयर बाजार में भी दिखा। कंटेनर बनाने वाली कंपनी Jupiter Wagons का शेयर 9:38 बजे तक ₹198.10 के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया। इसके अलावा, Kalyani Cast-Tech और DCM Shriram Industries के शेयरों में भी जबरदस्त रैली देखने को मिली.

क्या है कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम?

बंदरगाह पर खड़े उन बड़े-बड़े लोहे के डिब्बों को याद कीजिए, जो जहाजों पर एक के ऊपर एक लदे रहते हैं और दुनिया भर में सामान ढोते हैं। यही शिपिंग कंटेनर हैं। सरकार चाहती है कि ये डिब्बे बड़ी तादाद में भारत में ही बनें, और वो भी ऐसी क्वालिटी के, जो दुनिया के बाजार में टिक सकें।


सरकारी बयान में कहा गया, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने वित्त वर्ष 2039-40 तक ₹10,000 करोड़ के बजटीय खर्च के साथ कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (CMPS) को मंजूरी दी है, जिसका मकसद भारत में दुनिया से मुकाबला कर सकने वाला कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करना, आयात पर निर्भरता घटाना और सप्लाई चेन की मजबूती बढ़ाना है।"

सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "केंद्रीय कैबिनेट ने ₹10,000 करोड़ के खर्च वाली कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम को मंजूरी दी है।" ये स्कीम दो तरह की फैक्ट्रियों का साथ देगी। एक, जो बिल्कुल नई लगेंगी। दूसरी, कंटेनर बनाने वाली वो मौजूदा यूनिट्स, जो अपना कारोबार बढ़ाना चाहती हैं। इस स्कीम का ऐलान यूनियन बजट 2026-27 में किया गया था और अब कैबिनेट ने इस पर मुहर लगा दी है।

किस हिस्से को कितना पैसा मिलेगा?

सरकारी बयान के मुताबिक, स्कीम के कई बड़े हिस्से हैं। इनमें इंटरेस्ट सबवेंशन असिस्टेंस (ISA), ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर असिस्टेंस (OEA), टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन असिस्टेंस, और लैंड लीजिंग सपोर्ट व ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर असिस्टेंस शामिल हैं।

पहले बात इंटरेस्ट सबवेंशन असिस्टेंस की। इसके लिए ₹859 करोड़ रखे गए हैं। कोई कंपनी अगर नई कंटेनर फैक्ट्री लगाने या अपनी मौजूदा क्षमता बढ़ाने के लिए टर्म लोन यानी कैपिटल लोन लेती है, तो उस पर उसे हर साल 3% की ब्याज छूट मिलेगी। मान लीजिए किसी कंपनी ने फैक्ट्री के लिए बैंक से बड़ा कर्ज लिया है, तो ब्याज का बोझ हल्का होगा और प्रोजेक्ट का हिसाब बेहतर बैठेगा। नई फैक्ट्री को ग्रीनफील्ड और मौजूदा क्षमता के विस्तार को ब्राउनफील्ड कहा जाता है, और दोनों इस मदद के दायरे में हैं।

स्कीम का सबसे बड़ा हिस्सा ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर असिस्टेंस है, जिसके लिए ₹8,891 करोड़ रखे गए हैं। इसके तहत उन सभी कंटेनरों पर आर्थिक मदद मिलेगी, जो ग्लोबल शिपिंग स्टैंडर्ड के हिसाब से बने हों और योग्य कंटेनर मैन्युफैक्चरर्स ने बेचे हों। इसका मकसद लागत के फासले को भरना है, ताकि भारत में बने कंटेनर कीमत के मामले में भी मुकाबला कर सकें।

7.5 लाख TEU का लक्ष्य और हजारों नौकरियां

स्कीम का लक्ष्य देश में सालाना कंटेनर बनाने की क्षमता को करीब 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख TEU तक ले जाना है। TEU का मतलब है ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट, यानी 20 फुट लंबे एक कंटेनर को एक इकाई मानकर गिनती।

बयान के मुताबिक, इससे एक ऐसा मैन्युफैक्चरिंग बेस तैयार होगा, जो दुनिया के बाजार में मुकाबला कर सके। इसमें भारत को अच्छी क्वालिटी के शिपिंग कंटेनरों का ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बनाने की क्षमता है।

रोजगार के मोर्चे पर भी स्कीम से उम्मीदें हैं। इससे अनुमानित 3,000 सीधी नौकरियां और 50,000 से ज्यादा इनडायरेक्ट नौकरियां बनने की उम्मीद है। साथ ही कंटेनर से जुड़े सहायक उद्योगों को भी सहारा मिलेगा, जैसे कॉर्नर कास्टिंग्स, स्पेशलाइज्ड स्टील, लकड़ी के फ्रेम और पेंट बनाने वाले उद्योग। एक कंटेनर के पीछे कई छोटे-बड़े कारखानों का काम छिपा होता है, और मांग बढ़ने पर ये पूरी चेन हरकत में आती है।

सीधे फायदे वाली 3 कंपनियां और उनके शेयर

केंद्रीय कैबिनेट के फैसले से जिन तीन कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा होता दिख रहा है, उनमें शामिल हैं Jupiter Wagons, Kalyani Cast-Tech और DCM Shriram Industries.

Kalyani Cast-Tech ISO शिपिंग कंटेनर, खास तरह के कार्गो कंटेनर और स्टील कास्टिंग्स बनाती है। इसका कारोबार सीधे तौर पर स्कीम के उस मकसद से मेल खाता है, जो देश में कंटेनर बनाने की क्षमता बढ़ाने का है। ये पॉलिसी कंपनी की क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकती है और योग्य प्रोडक्शन को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना सकती है। शुरुआती कारोबार में कंपनी का शेयर BSE पर 5% के अपर सर्किट में ₹1,210.50 पर लॉक हो गया।

Jupiter Wagons ISO मरीन कंटेनर और खास कंटेनर बनाती है, जिनमें एनर्जी स्टोरेज के सॉल्यूशंस भी शामिल हैं। अगर स्कीम कंपनी की फैक्ट्रियों में योग्य कंटेनर प्रोडक्शन और विस्तार को सपोर्ट करती है, तो इसे फायदा हो सकता है। असली फायदा इस पर टिका होगा कि कौन से प्रोडक्ट योग्य माने जाते हैं, कंपनी की क्षमता बढ़ाने की योजना क्या है और वो स्कीम की शर्तों पर कितनी खरी उतरती है।

DCM Shriram Industries के ग्रुप का कंटेनर बनाने का कारोबार DCM Containers के नाम से चलता है, जो एक्सपोर्ट मरीन फ्रेट कंटेनर और दूसरे खास कंटेनर बनाता है। इससे स्कीम के साथ एक संभावित कारोबारी कनेक्शन बनता है। लेकिन लिस्टेड कंपनी को फायदा मिलने की बात मानने से पहले निवेशकों को मौजूदा ओनरशिप स्ट्रक्चर जांच लेना चाहिए और ये भी देख लेना चाहिए कि संबंधित मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन मदद के लिए योग्य है या नहीं। शुरुआती कारोबार में शेयर NSE पर 4.75% चढ़कर ₹57.32 पर पहुंच गया।

स्टील और लॉजिस्टिक्स शेयरों का इनडायरेक्ट कनेक्शन

स्टडी बताती है कि Tata Steel, JSW Steel और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) भी फोकस में रह सकते हैं, क्योंकि स्कीम में स्पेशलाइज्ड स्टील को सपोर्टिंग इंडस्ट्री के तौर पर पहचाना गया है। इन कंपनियों के लिए इनडायरेक्ट तौर पर मांग का मौका बन सकता है। लेकिन असली फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि उनके प्रोडक्ट कंटेनर बनाने वालों की जरूरतों पर खरे उतरते हैं या नहीं, और नए ऑर्डर उनके कारोबार के लिहाज से कितने बड़े साबित होते हैं।

कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CONCOR) का कनेक्शन थोड़ा अलग है। देश में ज्यादा कंटेनर बनने से वक्त के साथ कंटेनर के जरिए होने वाली माल ढुलाई का पूरा इकोसिस्टम मजबूत हो सकता है। मगर ये स्कीम मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए है, कंटेनर लॉजिस्टिक्स चलाने वाली कंपनियों के लिए कोई सीधी सब्सिडी नहीं है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।