कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में निवेशकों को कुछ बेहद ऊंचे भाव पर कारोबार कर रहे शेयरों को लेकर आगाह किया है। ब्रोकरेज ने कहा इन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिख रहा है। इसके बावजूद इनका मार्केट कैप काफी बढ़ा हुआ दिख रहा है। ब्रोकरेज ने कहा कि आंकड़ों और शेयर के सेंटीमेंट में साफ तौर से बेमेल नजर आता है। यहां तक कि कुछ शेयरों का मार्केट कैप उनके सबसे अधिक प्रॉफिट अनुमान से भी मेल नहीं खाता है। कोटक ने इलेक्ट्रिफिकेशन और डिफेंस थीम पर फोकस बढ़ने की बात स्वीकारी, लेकिन उसने 'लाभार्थी' कंपनियों के ऊंचे मार्केट कैप पर सवाल उठाया।
कोटक ने बढ़े हुए मार्केट कैप के उदाहरण के रूप में भेल (BHEL) का हवाला दिया। BHEL के शेयरों में तेजी के चलते इसका मार्केट कैप पिछले साल 77,800 करोड़ रुपये बढ़ा। यह थर्मल बीटीजी इंडस्ट्री के 32,000-64,000 करोड़ रुपये के कुल अनुमानित प्रॉफिट से भी अधिक है। यह प्रॉफिट भी तब होगा जब वित्त वर्ष 2032 तक 80 गीगावाट की नई थर्मल क्षमता लगाने के अपने लक्ष्य को पूरा कर ले। NPV के आधार पर यह प्रॉफिट और भी कम हो जाता है। BHEL के मौजूमार्केट कैप का मतलब है कि इसे अनिश्चित काल तक सालाना 25 गीगावाट थर्मल ऑर्डर एग्जिक्यूट करना होगा, जो अवास्तविक है।
कोटक ने कहा कि BHEL का मौजूदा मार्केट कैप 1.10 लाख करोड़ रुपये है, जो बताता है कि कंपनी को अनिश्चित काल तक सालाना 20-30 गीगावॉट BTG की बिक्री करनी होगी। इसके लिए 5% नेट प्रॉफिट मार्जिन के साथ 10-15 गीगावॉट की सालाना थर्मल क्षमता चाहिए।
कोटक ने कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard) का भी उदाहरण दिया। ब्रोकरेज ने कहा कि कोचिन शिपयार्ड का मार्केट पिछले एक साल में 67,300 करोड़ रुपये और पिछले तीन महीनों में 51700 करोड़ रुपये बढ़ा है। जिसमें यह माना गया है कि एक नए एयरक्राफ्ट कैरियर की लागत 40,000-50,000 करोड़ रुपये है और नेट प्रॉफिट मार्जिन 12-18 प्रतिशत है। ब्रोकरेज ने कहा कि लंबे कंस्ट्रक्शन और डिलीवरी समय के कारण कोचिन शिपयार्ड की वैल्यू बढ़ने की रफ्तार कम है।
कोटक ने आयशर मोटर्स लिमिटेड, हीरो मोटोकॉर्प और TVS मोटर्स के मार्केट कैप को भी बढ़ा हुआ बताया, जिन्होंने मार्च 2023 से सामूहिक रूप से अपने मार्केट कैप में 1.8 लाख करोड़ रुपये जोड़े हैं। कोटक ने कहा कि इन शेयरों के संयुक्त मार्केट कैप को सही ठहराने के लिए भारत के दोपहिया बाजार को मौजूदा स्तरों से काफी आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि, भारतीय दोपहिया बाजार को अभी भी वित्त वर्ष 2019 के स्तर तक पहुंचना बाकी है।
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