बाजार में जारी उठापटक के बीच निवेशकों के मन में एक ही सवाल है कि पैसा बड़ी कंपनियों में लगाएं या मिड कैप कंपनियों में। इस सवाल पर ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपनी स्ट्रैटेजी रिपोर्ट पेश की है।
बाजार में जारी उठापटक के बीच निवेशकों के मन में एक ही सवाल है कि पैसा बड़ी कंपनियों में लगाएं या मिड कैप कंपनियों में। इस सवाल पर ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपनी स्ट्रैटेजी रिपोर्ट पेश की है।
ब्रोकरेज के मुताबिक कमाई की रफ्तार में मिडकैप इंडेक्स लार्ज कैप इंडेक्स से आगे रहेगा। पर इसी रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि दोनों इंडेक्स की कमाई कुछ गिने-चुने सेक्टरों और शेयरों पर टिकी है। इसलिए कोटक की सलाह साफ है, इंडेक्स भूलिए और शेयरों पर ध्यान दीजिए।
कमाई की रेस में मिडकैप आगे
कोटक ने निफ्टी 50 और निफ्टी मिडकैप 150 की कंपनियों की कमाई को एक-एक शेयर के हिसाब से जोड़कर देखा। इस बॉटम-अप एनालिसिस से साफ हुआ कि FY2028 और FY2029 में मिडकैप इंडेक्स की कुल कमाई निफ्टी 50 के मुकाबले तेज बढ़ेगी।
पिछले दो साल का रिकॉर्ड भी मिडकैप के पक्ष में है। FY2025 में निफ्टी मिडकैप 150 की कंपनियों का मुनाफा 11.6 फीसदी बढ़ा, जबकि निफ्टी 50 का सिर्फ 5.9 फीसदी। FY2026 में यह अंतर और बढ़ गया, जब मिडकैप इंडेक्स का मुनाफा 22.2 फीसदी और निफ्टी 50 का 8.3 फीसदी बढ़ा।
आगे के अनुमान में तस्वीर थोड़ी बदलती है। FY2027 में निफ्टी 50 का मुनाफा 18 फीसदी बढ़ने का अनुमान है, जबकि मिडकैप 150 का 12 फीसदी। यानी इस साल लार्ज कैप आगे रहेंगे। इसके बाद FY2028 में मिडकैप इंडेक्स की कमाई 22 फीसदी बढ़ सकती है, जबकि निफ्टी 50 की 13 फीसदी। FY2029 में मिडकैप के लिए 16 फीसदी और निफ्टी के लिए 14.5 फीसदी ग्रोथ का अनुमान है।
निफ्टी की कमाई का पूरा हिसाब
कोटक के अनुमान के मुताबिक, निफ्टी का EPS FY2027 में 1,232 रुपये, FY2028 में 1,399 रुपये और FY2029 में 1,605 रुपये रहेगा। इस हिसाब से निफ्टी का P/E FY2027 के लिए 18.3 गुना, FY2028 के लिए 16.2 गुना और FY2029 के लिए 14.1 गुना बैठता है। निफ्टी 50 की कंपनियों का कुल मुनाफा FY2026 के 8,395 अरब रुपये से बढ़कर FY2027 में 9,904 अरब रुपये होने का अनुमान है। FY2028 में यह 11,193 अरब और FY2029 में 12,813 अरब रुपये तक जा सकता है।
मिडकैप 150 की कंपनियों का मुनाफा FY2026 में 3,589 अरब रुपये था। यह FY2027 में 4,018 अरब, FY2028 में 4,902 अरब और FY2029 में 5,692 अरब रुपये तक पहुंच सकता है। FY2027 के आधार पर मिडकैप इंडेक्स 22.1 गुना P/E पर है, जो FY2029 तक 15.6 गुना पर आ जाता है। कोटक ने अर्थव्यवस्था के लिए FY2027 में 7.2 फीसदी और उसके बाद के दो साल में 6.5 फीसदी की रियल GDP ग्रोथ का अनुमान रखा है। महंगाई दर इसी दौरान 5.2 फीसदी से घटकर 4.5 फीसदी पर आ सकती है।
ये भी पढ़ें: Tata Capital Q2 Results: टाटा की कंपनी मुनाफा 51% बढ़कर ₹1660 करोड़, लोन बुक ₹3 लाख करोड़ के पार
मिडकैप क्यों बढ़ते हैं तेज?
ब्रोकरेज ने मिडकैप की तेज कमाई के पीछे तीन वजहें बताई हैं। पहली, मिडकैप इंडेक्स लगातार बदलता रहता है, जबकि लार्ज कैप इंडेक्स लगभग स्थिर रहता है। दूसरी, मिडकैप इंडेक्स में नई इंडस्ट्रीज का वजन ज्यादा है, वहीं लार्ज कैप इंडेक्स में पुरानी और परिपक्व इंडस्ट्रीज हावी हैं। तीसरी, एक ही सेक्टर में मिडकैप कंपनियां लार्ज कैप से छोटी होती हैं, इसलिए उनके पास बढ़ने की गुंजाइश ज्यादा होती है।
कुछ ही सेक्टरों के भरोसे इंडेक्स की कमाई
रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा यह है कि दोनों इंडेक्स में बनावट की कुछ खामियां हैं। इंडेक्स में बहुत सारे सेक्टर और शेयर हैं, जिनकी ग्रोथ की रफ्तार अलग-अलग है। कई इंडस्ट्रीज शामिल होने के बावजूद कुल कमाई में कुछ ही सेक्टरों और शेयरों की बड़ी हिस्सेदारी है। कुछ सालों में कमोडिटी से जुड़े चुनिंदा सेक्टर बढ़े हुए मुनाफे का बड़ा हिस्सा खींच लेते हैं, जिससे पूरे इंडेक्स की कमाई की तस्वीर बिगड़ जाती है।
निफ्टी 50 में बैंकों का हिस्सा कुल मुनाफे का 27 फीसदी है। FY2027 में निफ्टी के मुनाफे में होने वाली 1,510 अरब रुपये की बढ़त में अकेले ऑयल, गैस और कंज्यूमेबल फ्यूल्स सेक्टर का योगदान 489 अरब रुपये यानी 32 फीसदी रहने का अनुमान है। रिलायंस इंडस्ट्रीज 189 अरब रुपये और मेटल्स एंड माइनिंग सेक्टर 183 अरब रुपये जोड़ सकता है। वहीं FY2027 में कंज्यूमर स्टेपल्स की कमाई 4.2 फीसदी, फार्मा की 1 फीसदी और इलेक्ट्रिक यूटिलिटीज की 2.2 फीसदी घटने का अनुमान है।
कच्चे तेल का पूरा खेल
FY2027 में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें दोनों इंडेक्स पर बिल्कुल उलटा असर डालेंगी। निफ्टी 50 में ONGC का मुनाफा 419 अरब से बढ़कर 691 अरब रुपये होने का अनुमान है। यानी निफ्टी के बढ़े हुए मुनाफे में अकेले ONGC 273 अरब रुपये यानी 18 फीसदी का योगदान देगी। दूसरी ओर मिडकैप इंडेक्स में HPCL, जिसने FY2026 में 147 अरब रुपये का मुनाफा कमाया था, FY2027 में 35 अरब रुपये के घाटे में जा सकती है। इससे मिडकैप इंडेक्स के मुनाफे से 182 अरब रुपये कम हो जाएंगे। इसी वजह से FY2027 में मिडकैप के ऑयल एंड गैस सेक्टर की कमाई 72 फीसदी गिरने का अनुमान है। अगर इस सेक्टर को हटा दें तो मिडकैप इंडेक्स की FY2027 की कमाई 16.9 फीसदी बढ़ती दिखती है।
बैंकों का खेल भी अलग
मिडकैप इंडेक्स के बढ़े हुए मुनाफे में बैंकों का हिस्सा ज्यादा है। इसकी वजह FY2026 में IDFC फर्स्ट बैंक और इंडसइंड बैंक का कम आधार है। इंडसइंड बैंक का मुनाफा 9 अरब से बढ़कर 45 अरब रुपये और IDFC फर्स्ट बैंक का 16 अरब से बढ़कर 42 अरब रुपये होने का अनुमान है। इसके उलट यस बैंक FY2027 में 24 अरब रुपये के घाटे में जा सकता है, जबकि FY2026 में उसने 35 अरब रुपये कमाए थे। निफ्टी 50 में बैंकों की कमाई 9.7 फीसदी बढ़ने का अनुमान है और बढ़े हुए मुनाफे में उनका हिस्सा 16 फीसदी है।
वैल्यूएशन में आई नरमी
रिपोर्ट के चार्ट बताते हैं कि हाल के महीनों में निफ्टी 50 का वैल्यूएशन लगातार घटा है। मिडकैप में यह गिरावट और तेज रही है। पिछले कुछ हफ्तों में निफ्टी मिडकैप 100 का एक साल आगे का P/E तेजी से नीचे आया है। सितंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने से फरवरी के आखिर और मार्च 2026 की शुरुआत में ज्यादातर सेक्टरों में तेज बिकवाली हुई। इस दौर में मिडकैप 150 इंडेक्स 1,608 अंक टूटा। सबसे ज्यादा दबाव डिक्सन, सुजलॉन, कोफोर्ज और स्विगी जैसे शेयरों से आया, जबकि BSE ने सबसे ज्यादा सहारा दिया। उस मुश्किल दौर में भी मेटल्स एंड माइनिंग, बैंक और फार्मा जैसे सेक्टरों ने इंडेक्स को सहारा दिया।
हर 6 महीने में बदल जाते हैं मिडकैप इंडेक्स के शेयर
कोटक लंबे समय से मानता आया है कि इंडेक्स की कमाई और वैल्यूएशन निवेश के लिए ज्यादा काम के नहीं हैं, और मिडकैप इंडेक्स के मामले में तो और भी कम। ब्रोकरेज ने 21 सितंबर की अपनी रिपोर्ट में भी यही बात उठाई थी। मार्च 2021 से सितंबर 2026 के बीच हर बार के रीबैलेंसिंग में निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स से 13 से 18 शेयर बाहर हुए और इतने ही नए आए। मार्च 2026 से सितंबर 2026 के बीच भी 13 शेयर बदले गए। यानी जिस इंडेक्स को आप आज देख रहे हैं, कुछ साल बाद उसकी शक्ल काफी बदल चुकी होती है।
हर दौर में अलग कहानी ने चलाया बाजार
रिपोर्ट दिखाती है कि अलग-अलग समय पर अलग-अलग कहानियों ने मिडकैप इंडेक्स को आगे बढ़ाया। कोविड के बाद IT सर्विसेज और स्पेशियलिटी केमिकल्स ने रफ्तार दी। फिर PSU बैंकों और PSU NBFCs की री-रेटिंग का दौर आया। 2024 के आम चुनाव से पहले PSU शेयरों और कैपिटल गुड्स में तेजी रही और सितंबर 2024 में बाजार अपने शिखर पर पहुंचा। इसके बाद सितंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच कई कहानियों के फेल होने से बड़ी गिरावट आई और इंडेक्स 3,192 अंक टूटा। मार्च से सितंबर 2025 के बीच डिफेंस, इलेक्ट्रिफिकेशन, बैंक और डायवर्सिफाइड फाइनेंशियल्स ने रिकवरी दिलाई।
ये भी पढ़ें: मुनाफा 73% बढ़ते ही रॉकेट बना केमिकल कंपनी का मल्टीबैगर शेयर! 2 साल में 400% का दे चुका है रिटर्न
इंडेक्स नहीं शेयर देखकर करें फैसला
कोटक की रिपोर्ट का निष्कर्ष यही है कि कमाई की कुल रफ्तार में भले मिडकैप आगे दिखें, लेकिन इंडेक्स के आंकड़े पूरी तस्वीर नहीं बताते। किसी एक साल में एक-दो कंपनियों का बड़ा मुनाफा या घाटा पूरे इंडेक्स की कमाई को ऊपर-नीचे कर देता है।
मिडकैप इंडेक्स में शेयर लगातार बदलते रहते हैं और हर दौर में कुछ गिनी-चुनी कहानियां ही बाजार को चलाती हैं। इसलिए ब्रोकरेज के मुताबिक लार्ज कैप या मिडकैप का फैसला इंडेक्स देखकर करने के बजाय हर शेयर की अलग से पड़ताल करना ज्यादा फायदेमंद है।
डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।
हिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।