भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को आयकर विभाग से वित्त वर्ष 2021-22 के लिए एक डिमांड ऑर्डर मिला है। इसमें टैक्स और ब्याज शामिल है। बीमा कंपनी से 6146.71 करोड़ रुपये या 61,46,71,18,015 रुपये के आयकर और 953.25 करोड़ रुपये या 9,53,25,87,935 रुपये के ब्याज की मांग की गई है। LIC का कहना है कि आयकर विभाग की असेसमेंट यूनिट (जांच इकाई) ने आकलन के दौरान कुछ मदों को आय में जोड़ दिया, जबकि कुछ कटौतियों को मान्यता नहीं दी।
जैसे कि अंतरिम बोनस को आय में जोड़ा जाना, 'जीवन सुरक्षा फंड' से हुए नुकसान को आय में जोड़ा जाना, निगेटिव रिजर्व को आय में जोड़ा जाना, धारा 80M के तहत क्लेम किए गए डिडक्शन को अस्वीकार करना, 'स्रोत पर काटे गए टैक्स' (TDS) को देर से जमा करने से संबंधित ब्याज को नामंजूर करना।
आदेश को चुनौती दे सकती है LIC
कंपनी ने कहा है कि इस ऑर्डर के खिलाफ आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील की जा सकती है। इससे संकेत मिलता है कि LIC इस डिमांड ऑर्डर को चुनौती देने की सोच रही है। बीमा कंपनी ने कहा कि इस ऑर्डर का वित्तीय प्रभाव केवल उस आयकर और ब्याज की राशि तक ही सीमित है, जिसका जिक्र डिमांड ऑर्डर में किया गया है। LIC के कामकाज या अन्य गतिविधियों पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा। अब देखना यह है कि 27 मार्च को कंपनी के शेयर की चाल पर क्या असर दिखता है। 25 मार्च को शेयर BSE पर 780.60 रुपये पर बंद हुआ। 26 मार्च को रामनवमी के अवसर पर शेयर मार्केट बंद है।
इससे पहले SBI को मिला था ₹6338 करोड़ का डिमांड नोटिस
हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2023–24 के लिए जांच-पड़ताल के बाद ₹6,338 करोड़ या ₹63,37,52,52,550 का डिमांड नोटिस भेजा था। इसमें ब्याज भी शामिल है। बैंक ने कहा था कि आयकर विभाग की असेसमेंट यूनिट ने अलग-अलग कारणों के आधार पर कुछ दावों को अस्वीकार किया है। इसलिए यह डिमांड बनी है। 19 मार्च, 2026 की तारीख वाला यह आदेश इनकम टैक्स एक्ट की धारा 143(3), 144C(3) और 144B के तहत जारी किया गया। SBI ने साफ किया कि इस आदेश का उसके कामकाज या दूसरी कारोबारी गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बैंक ने यह भी कहा कि वह उचित कानूनी कदम उठाएगा, जिसमें तय समय-सीमा के अंदर संबंधित अपीलीय अधिकारियों के पास अपील दायर करना भी शामिल है।
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