भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पांच सबसे बड़े निवेश में अब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) भी शामिल हो गया है। मनीकंट्रोल की एक एनालिसिस के मुताबिक, LIC के पास वित्त वर्ष 2025 की मार्च तिमाही तक, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की 10.7% हिस्सेदारी या करीब 26.53 करोड़ शेयर हैं। फिलहाल अनलिस्टेड मार्केट में NSE के एक शेयर करीब 2,500 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहे हैं। इस हिसाब से NSE में LIC की हिस्सेदारी की कुल वैल्यू करीब 66,319 करोड़ रुपये बैठती है। यह किसी भी लिस्टेड कंपनी में LIC की पांचवी सबसे बड़ी होल्डिंग है।
LIC की चार सबसे बड़ी होल्डिंग्स रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL), आईटीसी (ITC), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में है। LIC के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के 89.39 करोड़ शेयर हैं, जो कंपनी की 6.74 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है। मौजूदा बाजार भाव पर इसकी वैल्यू करीब 1.34 लाख करोड़ रुपये है।
वहीं ITC में LIC की हिस्सेदारी 194.18 करोड़ शेयर या 15.52 प्रतिशत है, जिसकी बाजार वैल्यू करीब 80,874 करोड़ रुपये है। इसी तरह HDFC बैंक में LIC के निवेश की वैल्यू 72,180 करोड़ रुपये और भारतीय स्टेट बैंक में इसके निवेश की वैल्यू करीब 68,031 करोड़ रुपये है। LIC के बाकी बड़े निवेश की बात करें तो, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) में इसकी हिस्सेदारी की वैल्यू 66,272 करोड़ रुपये और इंफोसिस लिमिटेड में 62,432 करोड़ रुपये शामिल हैं।
LIC ने कुल 351 शेयरों में किया है निवेश
मार्च तिमाही तक के आंकड़ों के मुताबिक, LIC ने कुल 351 कंपनियों के शेयरों में निवेश किया हुआ था, जिसकी कुल वैल्यू करीब 15.18 लाख करोड़ रुपये थी। हालांकि इसकी पिछली तिमाही में LIC का 352 कंपनियों में निवेश और उसकी कुल वैल्यू करीब 15.88 लाख करोड़ रुपये थी।
IPO की उम्मीदें और बाजार में जोश
NSE की कुल वैल्यूएशन इस समय करीब 5.7 लाख करोड़ रुपये मानी जा रही है, जो इसे देश की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल करती है। अनलिस्टेड मार्केट में NSE के शेयरों की कीमत पिछले एक महीने में 50% से ज्यादा बढ़ी है। यह तेजी उस उम्मीद से जुड़ी है कि NSE का इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) जल्द ही लॉन्च हो सकता है। दलाल स्ट्रीट काफी समय से इस आईपीओ का इंतजार कर रहा है।
SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने हाल ही में मुंबई में आयोजित CFO अवॉर्ड्स इवेंट में कहा कि NSE के IPO को लेकर अब कोई रेगुलेटरी अड़चन नहीं है। उन्होंने यह भी साफ किया कि क्लियरिंग कॉर्पोरेशन के डिमर्जर से जुड़ा मुद्दा अब बाधा नहीं है। पांडे के अनुसार, इस पर जारी कंसल्टेशन पेपर केवल SEBI की सोच को दिखाता है, न कि अंतिम नीति को।
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