LIC के शेयरों की पिटाई रुकने का नाम नहीं ले रही है। गुरुवार को इस शेयर का प्राइस (LIC Share Price) 0.91 फीसदी गिरकर 812.85 रुपये पर आ गया। बुधवार को यह शेयर करीब एक फीसदी गिरा था। लिस्टिंग के बाद से यह शेयर लागातर गिरा है। यह शेयर 17 मई को शेयर बाजार में लिस्ट हुआ था। यह इश्यू प्राइस (Issue Price) से करीब 8.11 फीसदी डिस्काउंट के साथ 872 रुपये पर लिस्ट हुआ था। बीएसई पर यह 867 रुपये पर लिस्ट हुआ था।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि एलआईसी के आईपीओ में पैसे लगाने वाले इनवेस्टर्स की चिंता बढ़ रही है। उन्हें इस शेयर की हालत भी पेटीएम के स्टॉक जैसे हो जाने की आशंका सता रही है। लिस्टिंग के बाद से लगातार गिरने की वजह से इनवेस्टर्स को अपने पैसे निकालने का मौका नहीं मिला है। जो इनवेस्टर्स इस शेयर से पैसे निकालना चाहते हैं, उनके लिए लॉस उठाने के अलावा दूसरा ऑप्शन नहीं है।
कंपनी ने 949 रुपये प्रति शेयर के भाव पर इनवेस्टर्स को शेयर अलॉट किए थे। पॉलिसीहोल्डर्स, रिटेल इनवेस्टर्स और एंप्लॉयीज को डिस्काउंट मिला था। पॉलिसीहोल्डर्स को प्रति शेयर 60 रुपये का डिस्काउंट मिला था। रिटेल इनवेस्टर्स और एंप्लॉयीज के प्रति शेयर 45-45 रुपये का डिस्काउंट मिला था। डिस्काउंट के बाद पॉलिसीहोल्डर्स को एक शेयर की कीमत 889 रुपये पड़ी थी। रिटेल इनवेस्टर्स और एंप्लॉयीज को डिस्काउंट के बाद यह शेयर 904 रुपये पड़ा था।
इस तरह अभी पॉलिसीहोल्डर्स को प्रति शेयर 77 रुपये का लॉस हो रहा है। मान लीजिए अगर किसी पॉलिसीहोल्डर को एक लॉट यानी 15 शेयर अलॉट हुआ है। इस तरह उसे कुल 1155 रुपये का लॉस हो रहा है। रिटेल इनवेस्टर्स और एंप्लॉयीज को प्रति शेयर 89 रुपये का लॉस हो रहा है। एक लॉट पर उन्हें 1,380 रुपये का नुकसान हो रहा है।
एलआईसी का आईपीओ 4 मई को खुला था। यह 9 मई को बंद हुआ था। सरकार ने इस आईपीओ को शनिवार और रविवार को भी ओपन रखा था। शनिवार और रविवार को बैंकों की शाखाएं खोलने का निर्देश दिया था। पहले इस तरह से किसी आईपीओ को इस तरह की रियायत शायद ही मिला हो।
सरकार ने एलआईसी के आईपीओ के जरिए करीब 21,000 करोड़ रुपये जुटाए। सरकार ने इस इश्यू के जरिए एलआईसी में अपनी 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेची है। एलआईसी में इश्यू से पहले सरकार की 100 फीसदी हिस्सेदारी थी।