मार्केट गिरने का इंतजार करने वाले घाटे में! WhiteOak की स्टडी में बड़ा खुलासा, इस ट्रिक से डबल हो जाएगा आपका पैसा
Long Term Investing vs Market Timing: स्टडी के मुताबिक, बाजार के गिरने का इंतजार करने वाले निवेशकों के मुकाबले जल्दी शुरुआत करने वाले निवेशक हमेशा फायदे में रहते हैं। बाजार में टाइमिंग बैठाने के चक्कर में पड़ने के बजाय लंबे समय तक अनुशासित रहकर निवेश करने से 100% पॉजिटिव रिटर्न मिलता है
₹10000 प्रति माह की साधारण SIP 25 साल में करीब ₹2.27 करोड़ बनते है
Mutual Fund SIP Secret: म्यूचुअल फंड में SIP करने वालों के लिए एक बेहद चौंका देने वाली रिपोर्ट सामने आई है। अक्सर लोग सोचते हैं कि जब शेयर बाजार गिरेगा, तब वे अपनी एसआईपी शुरू करेंगे ताकि उन्हें ज्यादा मुनाफा हो। लेकिन 'व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड' की एक नई स्टडी ने इस धारणा को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है।
अगस्त 1996 से मई 2026 तक के करीब 28 साल के मार्केट डेटा पर हुई इस स्टडी के मुताबिक, बाजार में टाइमिंग बैठाने के चक्कर में पड़ने के बजाय लंबे समय तक अनुशासित रहकर निवेश करने से 100% पॉजिटिव रिटर्न मिलता है। आइए समझते हैं इस स्टडी के मुख्य बिंदु और वो तरीके जिससे आपका फंड दोगुना हो सकता है।
मार्केट पीक बनाम मार्केट बॉटम: कौन रहा फायदे में?
स्टडी में यह साफ किया गया है कि बाजार के गिरने का इंतजार करने वाले निवेशकों के मुकाबले जल्दी शुरुआत करने वाले निवेशक हमेशा फायदे में रहते हैं। इसे एक उदाहरण से समझिए:
मार्केट पीक पर शुरुआत (जनवरी 2008): जब बाजार अपने चरम पर था, तब एक निवेशक ने ₹10000 की मंथली एसआईपी शुरू की। मई 2026 तक उसका कुल निवेश ₹22.10 लाख हुआ, जो बढ़कर ₹71.63 लाख का बड़ा फंड बन गया।
मार्केट बॉटम का इंतजार (मार्च 2009): दूसरे निवेशक ने बाजार गिरने का इंतजार किया और मंदी के निचले स्तर पर निवेश शुरू किया। मई 2026 तक उसका कुल निवेश ₹20.70 लाख हुआ, लेकिन उसका फंड सिर्फ ₹61.48 लाख ही बन पाया।
यानी भले ही रिटर्न का प्रतिशत लगभग समान दिखे, लेकिन जल्दी शुरुआत करने वाले ने समय का फायदा उठाया और लगभग ₹10 लाख ज्यादा वेल्थ क्रिएट की।
8 साल या उससे ज्यादा की SIP में 100% कमाई की गारंटी!
WhiteOak AMC की स्टडी के अनुसार, अगर कोई निवेशक 8 साल या उससे अधिक समय के लिए BSE Sensex TRI में अपनी एसआईपी चालू रखता है, तो उसे 100% मामलों में पॉजिटिव रिटर्न ही मिला है। अगर हम 10 साल की एसआईपी की बात करें, तो इस दौरान न्यूनतम रिटर्न 4.57% और अधिकतम 29.8% रहा है, जबकि औसत रिटर्न 15.55% दर्ज किया गया है।
SIP की तारीख और फ्रीक्वेंसी का कोई खास असर नहीं
कई निवेशक इस उलझन में रहते हैं कि महीने की किस तारीख को एसआईपी कटवाएं या फिर डेली, वीकली या मंथली में से कौन सा विकल्प चुनें। स्टडी ने इस कन्फ्यूजन को भी दूर कर दिया है:
तारीख का असर: दो दशकों के डेटा से पता चलता है कि महीने की अलग-अलग तारीखों पर 10 साल का एसआईपी रिटर्न मामूली रूप से केवल 13.36% से 13.42% के बीच ही बदला। यानी तारीख बदलने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
फ्रीक्वेंसी का असर: डेली, वीकली या मंथली एसआईपी का लॉन्ग-टर्म रिटर्न लगभग एक समान यानी 13.4% ही रहा।
मिड-कैप निकला रिटर्न का असली राजा
अलग-अलग मार्केट कैप सेगमेंट की तुलना करने पर लंबे समय की एसआईपी के लिए मिड-कैप फंड्स सबसे मजबूत परफॉर्मर बनकर उभरे हैं। 10 साल के रोलिंग एसआईपी रिटर्न का औसत इस प्रकार रहा:
Nifty Midcap 150 TRI: 17.57% औसत रिटर्न
Nifty Smallcap 250 TRI: 14.93% औसत रिटर्न
Nifty 100 TRI (लार्ज कैप): 13.03% औसत रिटर्न
स्टडी में यह भी चेतावनी दी गई है कि पिछले साल के बेस्ट परफॉर्मिंग फंड को देखकर बार-बार अपनी स्कीम न बदलें। मिड-कैप में लगातार बने रहने वालों को 17.55% रिटर्न मिला, जबकि हर साल फंड बदलने वाली रणनीति का रिटर्न घटकर 15.75% रह गया।
इस धांसू ट्रिक से सीधा दोगुना हो जाएगा फंड
जैसे-जैसे आपकी सैलरी या इनकम बढ़ती है, वैसे-वैसे अपनी एसआईपी की रकम को बढ़ाना (Top-Up) सबसे समझदारी भरा कदम है। 25 साल के पीरियड में इसका असर देखें:
नॉर्मल SIP: ₹10000 प्रति माह की साधारण एसआईपी 25 साल में करीब ₹2.27 करोड़ बनती है।
Top-Up SIP: अगर आप हर साल अपनी एसआईपी में केवल 10% का टॉप-अप करते हैं, तो यही फंड बढ़कर ₹4.45 करोड़ हो जाता है, यानी सीधे दोगुने के करीब।
कुल मिलाकर व्हाइटओक की स्टडी का सीधा संदेश है कि मार्केट टाइमिंग के चक्कर में सही एंट्री पॉइंट ढूंढने में समय बर्बाद न करें। अमीर बनने की कुंजी केवल जल्दी शुरुआत करने, अनुशासन के साथ रेगुलर इन्वेस्ट करने और अपने फाइनेंशियल गोल्स पर टिके रहने में है।
Disclaimer: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन हैं। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकारों से जांच कर लें।