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अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद HDFC Bank मैक्वेरी की 'बाय लिस्ट' से बाहर

अपने इस्तीफे में चक्रवर्ती ने कहा है कि पिछले दो वर्षों में HDFC Bank के अंदर हुए कुछ घटनाक्रम और कार्यप्रणालियां उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। हालांकि RBI ने कहा है कि बैंक के आचरण या गवर्नेंस के संबंध में कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Mar 19, 2026 पर 1:13 PM
अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद HDFC Bank मैक्वेरी की 'बाय लिस्ट' से बाहर
मैक्वेरी ने कहा है कि HDFC Bank के मूलभूत सिद्धांत मजबूत हैं और एसेट्स पर अच्छा रिटर्न है।

HDFC Bank के पार्ट टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर अतानु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद विदेशी ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी ग्रुप ने बैंक को अपनी 'मर्की बाय लिस्ट' से हटा दिया है। हालांकि, ब्रोकरेज ने HDFC Bank के शेयर पर अपनी 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस ₹1200 प्रति शेयर निर्धारित किया है। अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद केकी मिस्त्री को HDFC Bank का अंतरिम पार्ट टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने उन्हें 19 मार्च 2026 से लेकर अगले 3 महीने की अवधि के लिए अंतरिम पार्ट टाइम चेयरमैन नियुक्त किए जाने को मंजूरी दे दी।

मैक्वेरी ने कहा है कि HDFC Bank के मूलभूत सिद्धांत मजबूत हैं और एसेट्स पर अच्छा रिटर्न (ROA) है। लेकिन गवर्नेंस संबंधी चिंताओं के कारण निकट भविष्य में प्रदर्शन में गिरावट जारी रह सकती है। मैक्वेरी ने आगे कहा कि निवेशक, बोर्ड से अधिक आश्वासन की उम्मीद कर सकते हैं। ब्रोकरेज ने बैंक के CEO शशिधर जगदीशन के रीअपॉइंटमेंट को लेकर अनिश्चितता का भी जिक्र किया है। जगदीशन का वर्तमान कार्यकाल अक्टूबर 2026 में खत्म होने वाला है। इसके अलावा ब्रोकरेज ने ग्रोथ में संभावित मंदी और आगे गवर्नेंस संबंधी समस्याओं की संभावना जैसे प्रमुख जोखिम भी गिनाए।

जेपी मॉर्गन चेस ने दी 'न्यूट्रल' रेटिंग

इस बीच, जेपी मॉर्गन चेस ने HDFC Bank के शेयर को 'न्यूट्रल' रेटिंग देते हुए ₹1,090 का टारगेट प्राइस तय किया है। जेपी मॉर्गन ने कहा कि चक्रवर्ती के इस्तीफे से मौजूदा मैक्रो आर्थिक संकट और बढ़ गया है और इससे बाजार की भावना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके चलते निकट भविष्य में अस्थिरता बढ़ सकती है। जेपी मॉर्गन ने कहा कि इस्तीफे के लिए बताए गए कारणों से बोर्ड और मैनेजमेंट के बीच संभावित मतभेदों को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं। इससे तालमेल और भविष्य में फैसले लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

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