Market cues : 24350 के ऊपर जाने पर ही निफ्टी में आएगी तेजी, तब तक जारी रहेगा कंसोलीडेशन

Market cues : विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 30 अप्रैल को लगातार नौवें सत्र में अपनी बिकवाली जारी रखी और ₹8,000 करोड़ से ज़्यादा के शेयर बेच दिए। इसके विपरीत,घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार छठे सत्र में अपनी खरीदारी बनाए रखी और इक्विटी बाज़ार में ₹3,487 करोड़ का निवेश किया

अपडेटेड May 04, 2026 पर 9:14 AM
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Market cues : मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव को मापने वाला India VIX 5.86 प्रतिशत बढ़कर 18.46 पर पहुंच गया,जो बुल्स के लिए कुछ परेशानी का संकेत है

Market cues : Nifty 50 गैप-डाउन ओपनिंग के बाद दिन के निचले स्तर से ऊपर उठकर 0.7% की गिरावट के साथ बंद हुआ,लेकिन 30 अप्रैल को निचले स्तरों पर अच्छी खरीदारी देखने को मिलने के कारण,यह क्लोजिंग बेसिस पर 20-दिन के EMA और बोलिंगर बैंड की मिडलाइन,दोनों को बचाने में कामयाब रहा। तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं,हालांकि अमेरिका को ईरान के नए प्रस्ताव के बाद शांति समझौते की उम्मीद जगी है। वहीं,बाजार आज सोमवार को आने वाले पांच राज्यों के चुनावों के नतीजों पर भी करीब से नज़र रखेगा। बाजार जानकारों का कहना है कि Nifty 50 को 24,600 की ओर आगे बढ़ने के लिए 24,350 के स्तर को तोड़कर उसके ऊपर टिके रहना होगा,तब तक इसमें कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है,जिसमें 23,800 पर तत्काल और अहम सपोर्ट मौजूद है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल


पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,072, 24,140 और 24,251

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 23,850, 23,781 और 23,670

स्पेशल फॉर्मेशन:Nifty 50 ने ऊपरी स्तरों पर दबाव के बावजूद,निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी दिखाई,जिसका मुख्य कारण खरीदारी में अच्छी दिलचस्पी थी और यह 24,000 के ज़ोन के करीब बंद हुआ। इंडेक्स,क्लोजिंग बेसिस पर 20-दिन के EMA और बोलिंगर बैंडकी मिडलाइन को बचाने में भी कामयाब रहा,हालांकि यह 50-दिन के EMA के नीचे ही बना रहा। पिछले चार सत्रों से RSI 50 के ऊपर स्थिर बना हुआ है,जबकि MACD और सिग्नल लाइन के बीच का अंतर और कम हो गया है। यह बात हिस्टोग्राम की हरी पट्टियों में दिखाई देती है,जो लगातार छोटी होती जा रही हैं। यह स्थिति एक ऐसे बाज़ार की ओर इशारा करती है जो एक सीमित दायरे में है और जिसमें तेज़ी का हल्का रुझान तो है,लेकिन उसकी गति कमज़ोर पड़ रही है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स पर आधारित रेजिस्टेंस: 55,062, 55,220 और 55,476

पिवट पॉइंट्स पर आधारित सपोर्ट: 54,549, 54,390 और 54,134

फिबोनाची रिट्रेसमेंट पर आधारित रेजिस्टेंस: 55,809, 57,195

फिबोनाची रिट्रेसमेंट पर आधारित सपोर्ट: 54,576, 53,687

स्पेशल फॉर्मेशन: गैप-डाउन ओपनिंग के बाद बैंक निफ्टी ने भी दिन के निचले स्तर से रिकवरी दिखाई और एक पतली बॉडी वाली कैंडल बनाई,जिसमें एक लंबी निचली शैडो और एक छोटी ऊपरी शैडो थी। यह निचले स्तरों पर खरीदारी (accumulation) होने का संकेत है। इंडेक्स 1 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। रिकवरी के बावजूद,इंडेक्स बोलिंगर बैंड्स की मध्य रेखा के साथ-साथ सभी प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे ही रहा और शॉर्ट-टर्म व मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज नीचे की ओर ट्रेंड कर रहे थे। RSI गिरकर 45.54 पर आ गया है,जबकि MACD एक बेयरिश क्रॉसओवर के कगार पर है। हिस्टोग्राम की हरी पट्टियां पिछले लगातार सात सत्रों से लगातार सिकुड़ रही हैं। यह एक कमज़ोर से न्यूट्रल बाज़ार की ओर इशारा करता है,जिसमें बेयरिश दबाव के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं,भले ही निचले स्तरों पर कुछ खरीदारी हुई हो।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 30 अप्रैल को लगातार नौवें सत्र में अपनी बिकवाली जारी रखी और ₹8,000 करोड़ से ज़्यादा के शेयर बेच दिए। इसके विपरीत,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार छठे सत्र में अपनी खरीदारी बनाए रखी और इक्विटी बाज़ार में ₹3,487 करोड़ का निवेश किया।

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इंडिया VIX

मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव को मापने वाला India VIX 5.86 प्रतिशत बढ़कर 18.46 पर पहुंच गया,जो बुल्स के लिए कुछ परेशानी का संकेत है। यह शॉर्ट-टर्म और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे रहा,लेकिन फिर भी लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना रहा। बाज़ार में स्थिरता और बुल्स के लिए जोखिम कम करने के लिए इसे लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे गिरना ज़रूरी है।

पुट कॉल रेशियो

30 अप्रैल को घटकर 0.98 पर आ गया,जबकि पिछले सत्र में यह 1.04 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं,जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं

 

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