Market insight : भारत की ग्रोथ से FIIs नाखुश, रिटेल निवेशकों में भी अब दिख रहे थकान के संकेत

Market insight : दिनशॉ ईरानी का कहना है कि इस समय सारे वैल्यूएशन और सेक्टर अच्छे लग रहे हैं। ट्रंप के बयानों से बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। सोच-समझ कर ही फैसला लें। हमें पता नहीं है कि अगले दिन ट्रंप क्या बोल देंगे। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए अपने पास थोड़ा कैश बचा कर रखें और जहां पर भी अपीलिंग वैल्यूएशन दिखे वहां निवेश करें

अपडेटेड Apr 06, 2026 पर 1:34 PM
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Market insight : दिनशॉ ईरानी का कहना है कि जब तक एफआईआई फिर से भारत की तरफ रुख नहीं करते तब तक बाजार के लिए रैली करना बहुत मुश्किल रहेगा, क्योंकि रिटेल निवेशक भी अब थोड़ा से थका हुआ दिख रहा है

Market insight : पश्चिम एशिया का तनाव जस का तस बना हुआ है। रुपया कुछ हद तक संभला जरुर है,लेकिन क्रूड की टेंशन कायम है। ऐसे में अब बाजार की दिशा क्या होगी,गिरावट में निवेश करें या फिर कैश पर बने रहना ही बेहतर होगा,मार्केट आउटलुक कैसा है? इन सभी बातों पर अपनी राय रखते हुए हेलिओस इंडिया (Helios India) के CEO दिनशॉ ईरानी ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मौजूदा गिरावट में सेलेक्टिव निवेश की रणनीति ही काम करेगी। आकर्षक वैल्युएशन देखकर सेलेक्टिव शेयरों में ही निवेश करें।

भारतीय ग्रोथ से FIIs नाखुश

दिनशॉ ईरानी ने आगे कहा कि भारतीय ग्रोथ से FIIs नाखुश नजर आ रहे हैं। फिलहाल बाजार में FIIs की वापसी मुश्किल दिख रही है। वीमार्ट,नायिका जैसे रिटेल के चौथी तिमाही के बिजनेस अपडेट अच्छे हैं। भारत के नजरिए से देखें तो मिडिल ईस्ट की लड़ाई बहुत खराब समय पर शुरू हुई है। हम एक कमजोर दौर से उबर रहे थे, उसी समय यह लड़ाई शुरू हो गई। अगर यह संकट जल्द टल जाता है तो ज्यादा नुकसान नहीं होगा। लेकिन अगर लड़ाई ज्यादा लंबे समय तक खिंचती है तो फिर रिटेल कंपनियों के प्रदर्शन पर इसका खराब असर होगा।


सरकारी बैंकों के तिमाही अपडेट भी अच्छे रहे हैं। उम्मीद थी कि इनके मार्केट शेयर में बढ़त होगी और ऐसा हुआ भी है। लेकिन इस लड़ाई के चलते पैदा हुई दिक्कतों को देखते हुए आरबीआई से रेट कट की उम्मीद नहीं है। अगर ये लड़ाई लंबी चली तो बैंकों सहित सभी सेक्टरों को परेशानी हो सकती है।

IT शेयरों के वैल्युएशन ऑल टाइम लो के करीब हैं। इनकी ग्रोथ रेट बहुत कमजोर है। कोई भी जो इन शेयरों को खरीद रहा है वह यह मानकर खरीदारी कर रहा है कि यह एक डिफेंसिव सेक्टर है। आईटी शेयरों में जब तक ग्रोथ नहीं दिखेगी तब तक बहुत तेजी की उम्मीद नहीं है। एआई इस सेक्टर के लिए बहुत बड़ा गेमचेंजर बना हुआ है। गेम में बने रहने के लिए आईटी कंपनियों को अपने में बड़े बदलाव करने होंगे। ये बदलाव शुरुआती दौर में बहुत पेनफुल होंगे। ऐसे में हमें इस सेक्टर में वेट एंड वॉच का रणनीति अपनानी होगी। आईटी में सिर्फ इसलिए खरीदारी न करें कि ये शेयर अभी सस्ते में मिल रहे है।

कहां करें निवेश?

दिनशॉ ईरानी ने बताया कि उन्होंने बैंकिंग और IT में कुछ पैसा लगाना शुरू किया है। भारत रोजाना 50 लाख बैरल क्रूड एक्सपोर्ट करता है। क्रूड के महंगे होने का असर डिमांड और सप्लाई पर पड़ेगा। उन्होंने ये भी बताया कि वे लगभग पूरी तरह से बाजार में निवेशित है। सिर्फ 1-1.5 फीसदी कैश पर ही बैठे हैं। इस बाजार में जहां भी अच्छी वैल्यू दिख रही है, वहीं निवेश कर रहे हैं।

दूसरे ग्लोबल मार्केट्स को देखें तो 28 फरवरी के बाद हमारे बाजार का प्रदर्शन सबसे ज्यादा खराब रहा है। बाजार काफी ज्यादा ओवर शोल्ड है। हम क्रूड के दुनिया के दूसरे सबसे बड़े आयातक हैं। इसी लिए क्रूड की कीमतों में बढ़त के चलते हमें सबसे ज्यादा मार पड़ रही है।

एचडीएफसी के गवर्नेंस को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं

दिनशॉ ईरानी ने कहा कि एचडीएफसी के गवर्नेंस को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं हैं। केकी मिस्त्री जैसे दिग्गज के हाथ में बैंक की कमान आने से इस बात की पुष्टि होती है। देश की इकोनॉमिक ग्रोथ पर पश्चिम एशिया संकट का असर जरूर पड़ेगा। इसका असर एचडीएफसी बैंक पर भी देखने को मिल सकता। इसके अलावा इस स्टॉक के लिए कोई और निगेटिव नहीं है।

न्यू एज कंपनियों की वैल्यूएशन अच्छी

दिनशॉ ईरानी का कहना है कि इस समय सारे वैल्यूएशन और सेक्टर अच्छे लग रहे हैं। ट्रंप के बयानों से बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। सोच-समझ कर ही फैसला लें। हमें पता नहीं है कि अगले दिन ट्रंप क्या बोल देंगे। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए अपने पास थोड़ा कैश बचा कर रखें और जहां पर भी अपीलिंग वैल्यूएशन दिखे वहां निवेश करें। न्यू एज कंपनियों में अपीलिंग वैल्यूएशन नजर आ रही है। यहां पर चुनिंदा क्वालिटी शेयरों में थोड़ा-थोड़ा निवेश किया जा सकता है। बैंकों में भी थोड़ा पैसा डाला जा सकता है।

इस बात को ध्यान में रखें की जब तक एफआईआई फिर से भारत की तरफ रुख नहीं करते तब तक बाजार के लिए रैली करना बहुत मुश्किल रहेगा, क्योंकि रिटेल निवेशक भी अब थोड़ा से थका हुआ दिख रहा है। म्यूचुअल फंडों में भी नया पैसा नहीं आ रहा है।

 

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