Market Insight : कच्चे तेल में अच्छी रैली रही है। इसके अलावा एल्युमीनियम भी अच्छा कर रहा है। कोल में अच्छे मूव्स देखने को मिले हैं। इसके चलते कोल इंडिया के शेयर में अच्छी तेजी आई है। ऐसे में वर्तमान ग्लोबल माहौल में कमोडिटी कॉम्प्लेक्स कोकैसे प्ले करें और आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल? इस पर बात करने के लिए सीएनबीसी-आवाज़ के साथ जुड़े GoIndiaStocks.com के फाउंडर राकेश अरोड़ा। ये मेटल सेक्टर पर पैनी नजर रखते हैं। राकेश जी के पास बिजनेस और कैपिटल मार्केट में 25 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है।
इस बातचीत में उन्होंने कहा कि इस समय दो थीम्स चल रही हैं। इसमें से पहली है एआई थीम,जो कि पिछले दो तीन साल में एकदम से उठ कर सामने आई है। पहले इसकी उम्मीद नहीं थी। लेकिन इसमें अचानक तेजी आई है। ताजे आंकड़ों से पता चलता है कि यूएस में डाटा सेंटर का कैपेक्स बाकी इंफ्रास्ट्रक्चर कैपेक्स से काफी ऊपर चला गया है। पहली बार ऐसा हुआ है। ये ध्यान में रखने की बात है कि डाटा सेंटर्स बेस मेटल इंटेंसिव प्रोजेक्ट्स होते है, यानी इनमें बेस मेटल्स का भारी इस्तेमाल होता है। इनमें काफी मात्रा में कॉपर और एल्युमीनियम जैसे मेटल इस्तेमाल होते हैं। इसकी वजह से इन मेटल्स की डिमांड काफी मजबूत चल रही है। लेकिन अब एल्यूमीनियम अपने पीक के करीब पहुंच चुका है। अब यहां से इसमें और ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है। ऐसे में एल्यूमीनियम के लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।
दूसरी थीम है एनर्जी। ईरान वॉर की वजह से जो एनर्जी शॉक लगा है उसके चलते ऑयल और कोल वगैरह में तेजी आई है। मध्यपूर्व का युद्ध अब लगभग खत्म होने के कगार पर है। ऐसे में अगर स्टेट ऑफ हॉर्मुज खुल जाता है एनर्जी कॉम्प्लेक्स भी धीरे-धीरे नीचे आने लगेगा। ब्रेंट क्रूड तो पहले से ही बता रहा है कि वॉर खत्म हो चुका है। लेकिन कमोडिटीज में तेजी थमने में थोड़ा टाइम लगेगा। यहां से अगर वॉर आगे नहीं चलता है तो यहां पर भी गिरावट देखने को मिलेगी।
बाजार पर बात करते हुए राकेश अरोड़ा ने आगे कहा कि एफआईआई की सेलिंग अपने पीक स्तर तक जा चुकी। यहां से आगे यह सेलिंग ज्यादा से ज्यादा 2-4 बिलियन डॉलर तक और हो सकती है। अब एफआई सेलिंग और ज्यादा बढ़ने की उम्मीद नहीं है। काफी कुछ रुपए की स्थिति पर डिपेंड करेगा। अगर रुपया 95-96 रुपए प्रति डॉलर के आसपास स्टेबलाइज हो जाता है तो एफआई सेलिंग का दौर भी थमेगा। अगर एफआईआई की बिकवाली की रफ्तार कम होती और एआई बबल से लोगों का ध्यान हटता है तो विदेशी निवेशकों का रुख भारत जैसे देशों के प्रति पॉजिटिव हो जाएगा। इंडिया में 10 साल में पहली बार नॉमिनल ग्रोथ हाईएस्ट रहने वाली है। अगर हम कोविड रिकवरी वाले एक दो साल छोड़ दें तो 12 से 13% के नॉमिनल ग्रोथ की विजिबिलिटी दिख रही है। ऐसे में वित्त वर्ष 2027 में हमारी अर्निंग्स ग्रोथ 15% प्लस रह सकती है। यह मार्केट के ऊपर जाने के लिए और एफआईआई के वापस लाने के लिए एक अच्छा ड्राइवर हो सकता है।
राकेश अरोड़ा ने अपनी पसंदीदा पिक्स पर बात करते हुए कहा कि उनको आईटी शेयर अच्छे लग रहे हैं। रुपए में गिरावट से आईटी कंपनियों के मार्जिन में सुधार आएगा। इनकी डील विंस ठीक-ठाक ही रही हैं। इनकी अर्निंग्स ग्रोथ में अपग्रेड भी देखने को मिला है। इन शेयरों में पिछले कुछ दिनों में अच्छी तेजी आई है। लेकिन अभी भी इनमें 10-20 फीसदी की तेजी और आ सकती है।
इसके अलावा फार्मा सेक्टर भी पिछले दो महीने से अच्छा कर रहा है। अभी इनमें और तेजी की गुंजाइश बाकी है। इसके अलावा प्राइवेट सेक्टर बैंक्स भी अच्छे लग रहे हैं। अगर इंटरेस्ट रेट बढ़ते हैं तो सरकारी बैंकों की तुलना में प्राइवेट सेक्टर बैंक थोड़ा बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
एनबीएफसी के वैल्यूएशन भी काफी कम हुए हैं। इनमें काफी करेक्शन भी हो चुका है तो प्राइवेट सेक्टर बैंक्स और एनबीएफसी पर नजर रहनी चाहिए। इसके अलावा डोमेस्टिक सक्लिकल्स में भी तेजी की थोड़ी बहुत गुंजाइश है। डोमेस्टिक सक्लिकल्स के ऊपर भी फोकस किया जा सकता है।
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