शेयर बाजारों में 24 सितंबर को आई बड़ी गिरावट ने मार्केट का सेंटिमेंट खराब कर दिया है। 8 जुलाई के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिली। इस गिरावट में विदेश से आने वाली खबरों के साथ ही घरेलू खबरों का हाथ रहा। रुपये में भी गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड एक बार फिर 105 डॉलर के पार हो गया। इधर, आईआरडीईए के इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कमीशन घटाने के प्रस्ताव से फाइनेंशियल कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई।
निफ्टी के 23000 से नीचे जाने पर बड़ी गिरावट
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के नागराज शेट्टी ने कहा कि शॉर्ट टर्म ट्रेंड काफी ज्यादा निगेटिव हो गया है। अगर निफ्टी 23,000 से नीचे जाता है तो यह गिरकर 22,600 तक फिसल सकता है। तेजी की स्थिति में इसे 23,300 पर रेसिस्टेंस का सामना करना पड़ेगा। इसी ब्रोकरेज फर्म के नंदीश शाह का कहना है कि ब्रेकडाउन ने निफ्टी को 23,100-23,600 की कंसॉलिडेशन रेंज के निचले स्तर तक धकेल दिया है।
22700 पर मिल सकता है सपोर्ट
शाह ने कहा कि पोजीशनल सपोर्ट 22,700 पर है, जबकि 23,300 अगला रेसिस्टेंस लेवल है। अब 23,500-23,600 का जोन बड़ा रेसिस्टेंस साबित हो सकता है। एलकेपी सिक्योरिटीज के रूपक डे ने कहा कि आज बाजार में बिकवाली के दबाव की बड़ी वजह 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड है। क्रूड की कीमतों में उछाल ने आग में घी का काम किया।
करीब सभी सूचकांकों पर बिकवाली का दबाव
मार्केट के बेयरिश ट्रेंड का अंदाजा इस बात से लग जाता है कि बाजार के करीब सभी सूचकांकों में गुरुवार को बड़ी गिरावट दिखी। निफ्टी मिडकैप 100 2.25 फीसदी, निफ्टी स्मॉलकैप 100 1.53 फीसदी और निफ्टी माइक्रोकैप सूचकांक 1.48 फीसदी गिर गया। इसका मतलब है कि छोटे-बड़े सभी शेयरों पर बिकवाली का दबाव है। नजरें अब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और क्रूड की कीमतों पर टिकी हैं।
भारत के लिए क्रूड ऑयल की कीमतें काफी अहम
एक्सिस डायरेक्ट में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट हेमंग गोर ने कहा, "भारत के लिए क्रूड की कीमतें काफी अहम हैं। कुछ समय तक 100 डॉलर से नीचे जाने के बाद फिर से क्रूड में उछाल दिख रहा है। इससे क्रूड की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसका असर बाजार की रिकवरी पर पड़ा है।" उन्होंने कहा कि निफ्टी जब तक 23,500 से नीचे बना रहता है, मार्केट का ट्रेंड बेयरिश बना रहेगा।
डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।