Market this week : 4 अप्रैल को सभी सेक्टरों में आई बिकवाली के बीच भारतीय इक्विटी इंडेक्स कमजोर रुख के साथ बंद हुए और निफ्टी 23,000 से नीचे आ गया। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 930.67 अंक या 1.22 फीसदी की गिरावट के साथ 75,364.69 पर और निफ्टी 345.65 अंक या 1.49 फीसदी की गिरावट के साथ 22,904.45 पर बंद हुआ। वीकली बेसिस पर देखें तो बाजार ने पिछले 2 हफ्ते में देखने को मिली बढ़त का आधा हिस्सा खो दिया। सेंसेक्स और निफ्टी में 3-3 फीसदी की गिरावट आई। मिडकैप इंडेक्स में 2 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।
वीकली बेसिस पर निफ्टी बैंक ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है। इसने 0.5 फीसदी से भी कम की गिरावट दर्ज किया है। ग्लोबल ग्रोथ से जुड़ी चिंताओं के कारण आईटी सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला इंडेक्स रहा। इसमें 9 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। आईटी इंडेक्स ने कोविड 2020 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की है। FMCG को छोड़कर सभी सेक्टोरल इंडेक्सों में गिरावट दर्ज की गई है।
अगले हफ्ते कैसी रह सकती है बाजार की चाल
रेलिगेयर ब्रोकिंग के एसवीपी रिसर्च,अजीत मिश्रा का कहना है कि बाजार दबाव में आ गए और लगभग डेढ़ फीसदी की गिरावट आई। जिसका मुख्य कारण कमजोर वैश्विक संकेत रहे। दो दिनों की सुस्त चाल के बाद, निफ्टी शुरुआती कारोबार में अपने अहम सपोर्ट स्तर 23,100 से नीचे फिसल गया और लगातार नीचे की ओर बढ़ता रहा,अंततः यह 22,904.45 पर बंद हुआ। अधिकांश सेक्टरों में काफी दबाव देखा गया। इनमें भी फार्मा और एनर्जी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले रहे। पिछले कारोबारी सत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले व्यापक इंडेक्सों में तेज करेक्शन देखने को मिला। मिड और स्मॉल कैप इंडेक्स में 3 से 4 फीसदी की गिरावट देखने को मिली।
ग्लोबल मार्केट और खास तौर पर अमेरिका में तेज गिरावट और फार्मा पर संभावित टैरिफ को लेकर बनी ताजा चिंताओं ने सेंटीमेंट को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया। हालांकि, बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में लगातार बनी मजबूती ने कुछ हद तक गिरावट को सीमित करने में मदद की। आगे हमें निफ्टी इंडेक्स में समय-समय पर करेक्शन उम्मीद दिख रही है। ट्रेडरों को सलाह है कि वे स्टॉक सेलेक्शन पर फोकस करें और बाजार की दिशा साफ होने तक हेजिंग की रणनीति अपनाएं।
मेहता इक्विटीज के प्रशांत तापसे का कहना है कि ग्लोबल इक्विटी में गिरावट के साथ ही भारतीय बाजारों में भी गिरावट आई। व्यापक आधार पर आई बिकवाली के कारण अलग -अलग सेक्टरों में 2-6 फीसदी से अधिक की कमजोरी देखने को मिली। निवेशकों को डर है कि ट्रंप की रिसीप्रोकल टैरिफ नीति मंदी को बढ़ावा देगी और अमेरिका में महंगाई बढ़ाएगी। यह महंगाई और मंदी दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को भी अपनी चपेट में ले लेगी। मेटल और तेल शेयरों में तेज गिरावट यह संकेत दे रही है कि मंदी की आशंकाओं के बीच मांग प्रभावित हो सकती है।
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