₹22000 करोड़ के घाटे में टाटा की ये कंपनी, 7 मई को कॉस्ट कटिंग और नए CEO पर लेगी फैसला

टाटा ग्रुप की एयरलाइन एयर इंडिया ₹22,000 करोड़ से ज्यादा के घाटे में है। 7 मई की बोर्ड मीटिंग में यह कॉस्ट कटिंग और नए CEO पर फैसला ले सकती है। बढ़ती ईंधन कीमतें और पश्चिम एशिया तनाव एयरलाइन पर दबाव बढ़ा रहे हैं। जानिए डिटेल।

अपडेटेड May 03, 2026 पर 10:47 PM
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एयर इंडिया मार्च 2026 तक के वित्त वर्ष में ₹22,000 करोड़ से ज्यादा का घाटा झेल चुकी है।

टाटा ग्रुप की एयरलाइन एयर इंडिया (Air India) वित्तीय तौर पर कई मुश्किलों से जूझ रही है। यह कंपनी 7 मई को होने वाली बोर्ड मीटिंग में लागत घटाने के उपाय, लीडरशिप बदलाव और वित्तीय प्रदर्शन पर चर्चा करेगी।

समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया मार्च 2026 तक के वित्त वर्ष में ₹22,000 करोड़ से ज्यादा का घाटा झेल चुकी है। पश्चिम एशिया के तनाव ने हालात को और मुश्किल बना दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, एन चंद्रशेखरन की अध्यक्षता में मुंबई में होने वाली इस बैठक में लागत कम करने की रणनीति, नए CEO की नियुक्ति और FY26 के वित्तीय नतीजों पर विस्तार से चर्चा होगी।


किन विकल्पों पर विचार

एयर इंडिया खर्च कम करने के लिए कुछ नए विकल्पों पर सोच रही है। जैसे, अभी टिकट के साथ जो खाना शामिल होता है, उसे अलग किया जा सकता है ताकि जो यात्री चाहें वही उसका अलग से भुगतान करें।

इसी तरह बिजनेस क्लास में मिलने वाला लाउंज एक्सेस भी जरूरी की बजाय ऑप्शनल किया जा सकता है, यानी जो इस्तेमाल करना चाहे वही इसके लिए पैसे दे। हालांकि, ये सब अभी सिर्फ विचार के स्तर पर है।

पश्चिम एशिया तनाव का असर

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण एयरस्पेस पर पाबंदियां लगी हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रूट लंबे हो गए हैं। इससे ईंधन की खपत बढ़ी है और ऑपरेशनल लागत भी तेजी से ऊपर गई है।

नए CEO की तलाश जारी

बोर्ड मीटिंग में नए CEO के चयन पर भी चर्चा हो सकती है, क्योंकि मौजूदा CEO कैम्पबेल विल्सन इस साल के अंत तक पद छोड़ सकते हैं। एयर इंडिया में Singapore Airlines की भी 25.1% हिस्सेदारी है। यह नए CEO के लिए आंतरिक और विदेशी उम्मीदवारों पर विचार कर रही है। कुछ सूत्रों का कहना है कि कंपनी जॉइंट MD या CEO नियुक्त करने का विकल्प भी देख रही है।

CEO ने क्या कहा

1 मई को कर्मचारियों को दिए संदेश में कैम्पबेल विल्सन ने कहा कि जेट फ्यूल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी, एयरस्पेस बंद होने और लंबी उड़ानों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स फायदे का सौदा नहीं रह गई हैं।

उन्होंने बताया कि जून और जुलाई में फ्लाइट शेड्यूल में और कटौती करनी पड़ सकती है। साथ ही यात्रियों और क्रू को होने वाली असुविधा पर खेद जताते हुए उम्मीद जताई कि पश्चिम एशिया की स्थिति जल्द सामान्य होगी और होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा।

घरेलू ऑपरेशन और किराए पर असर

विल्सन के मुताबिक घरेलू उड़ानों पर असर थोड़ा कम है, लेकिन वहां भी लागत का दबाव बना हुआ है। खर्च बढ़ने की भरपाई के लिए किराए बढ़ाए गए हैं और फ्यूल सरचार्ज लगाया गया है, लेकिन ज्यादा किराए से मांग प्रभावित हो रही है।

एविएशन सेक्टर पर बढ़ता दबाव

26 अप्रैल को Air India, IndiGo और SpiceJet ने सरकार को बताया था कि एविएशन सेक्टर गंभीर दबाव में है और ऑपरेशन बंद होने की स्थिति तक पहुंच सकता है। उन्होंने जेट फ्यूल की कीमतों में राहत और वित्तीय मदद की मांग की थी।

1 मई को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जेट फ्यूल की कीमतों में 5% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई, जिससे लागत और बढ़ गई है।

वैश्विक स्तर पर भी वही हाल

यह दबाव सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया भर में एयरलाइंस इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रही हैं और कई कंपनियां लागत घटाने के उपाय अपना रही हैं। अमेरिका की Spirit Airlines पहले ही अपना ऑपरेशन बंद कर चुकी है।

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के प्रमुख विल्ली वॉल्श ने कहा है कि आने वाले महीनों में एशिया और यूरोप में जेट फ्यूल की कमी हो सकती है। इसका असर टिकट कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में देखने को मिल सकता है।

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