Share markets : 11 नवंबर को भारी उठापटक के बीच भारतीय बाजार सपाट बंद हुआ है। सेंसेक्स सपाट बमद हुआ है। वहीं, निफ्टी 24,150 के नीचे फिसल गया है। एशियन पेंट्स और ब्रिटानिया आज के टॉप लूजर रहे हैं। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 9.83 अंक या 0.01 फीसदी बढ़कर 79,496.15 पर और निफ्टी 6.90 अंक या 0.03 फीसदी गिरकर 24,141.30 पर बंद हुआ है। लगभग 1446 शेयरों में तेजी आई, 2478 शेयरों में गिरावट आई और 116 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। पावर ग्रिड कॉर्प, ट्रेंट, इंफोसिस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा निफ्टी के टॉप गेनर रहे। जबकि एशियन पेंट्स, ब्रिटानिया, अपोलो हॉस्पिटल्स, सिप्ला और ओएनजीसी निफ्टी के टॉप लूजर रहे।
बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 0.8 फीसदी तथा स्मॉलकैप इंडेक्स में 1 फीसदी की गिरावट आई। अगल-अलग सेक्टरों की बात करें तो बैंक इंडेक्स में 0.6-0.6 फीसदी की बढ़त रही। वहीं, आईटी इंडेक्स में 1 फीसदी की बढ़त रही। जबकि ऑटो, एफएमसीजी, हेल्थकेयर, मेटल, ऑयल एंड गैस, मीडिया में 0.5-1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली।
प्रोग्रेसिव शेयर्स के निदेशक आदित्य गग्गर का कहना है कि भारतीय शेयर बाजारों ने सप्ताह की शुरुआत धीमी गति से की और मिड/स्मॉलकैप सेगमेंट में कमजोरी ने इंडेक्स पर दबाव डाला। हालांकि, आईटी और बैंकिंग काउंटरों ने बचाव किया और इंडेक्स को संभलने में मदद की। लेकिन निफ्टी ऊपरी स्तरों पर लंबे समय तक नहीं टिक सका और अपनी सारी बढ़त गंवा दी और सत्र के अंत में 6.90 अंकों के नुकसान के साथ 24,141.30 पर बंद हुआ। आईटी और बैंकिंग इंडेक्स को छोड़कर दूसरे सभी सेक्टर लाल निशान पर बंद हुए। मीडिया और मेटल की सबसे ज्यादा पिटाई हुई। छोटे-मझोले शेयरों का कमजोर प्रदर्शन जारी रहा। इसके चलते मिडकैप और स्मॉलकैप में 0.88 फीसदी और 1.20 फीसदी की गिरावट आई।
रजिस्टेंस(24,250) और सपोर्ट (24,000) दोनों स्तरों को टेस्ट करने के बाद निफ्टी ने एक स्पिनिंग टॉप कैंडलस्टिक पैटर्न बनाया है जो बुल्स और बियर्स के बीच अनिर्णायक स्थिति को दर्शाता है। बाजार की दिशा के साफ होने के लिए दोनों में किसी भी तरफ़ ब्रेकआउट आना जरूरी है।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा का कहना है कि बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और यह मिश्रित संकेतों के बीच लगभग सपाट बंद हुआ। बैंकिंग और आईटी शेयरों की तेजी ने रिकवरी की उम्मीद जताई है। लेकिन सार्थक तेजी के लिए इन सेक्टरों में निरंतर गति बने रहना जरूरी है। ऐसा न होने पर बाजार सीमित दायरे में रह सकता है। जैसे-जैसे हम नतीजों के मौसम के अंतिम चरण के करीब पहुंच रहे हैं,वोलैटिलिटी बढ़ने की संभावना है। इस बात को ध्यान में रखते हुए ट्रेडरों को चुनिंदा स्टॉक पर फोकस करते हुए हेज्ड रणनीति अपनाने की सलाह होगी।
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