Market outlook : बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 23 मार्च को कैसी रह सकती है इसकी चाल
Market outlook : मीडिया,प्राइवेट बैंक और रियल्टी को छोड़कर बाकी सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। टेलीकॉम,IT,मेटल,फार्मा और PSU बैंक में 1-2% की बढ़त देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.6% की बढ़त हुई,जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स सपाट बंद हुआ
Market cues : कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड,श्रीकांत चौहान का मानना है कि बाजार की संरचना अभी भी कमजोर है
Market outlook : पश्चिम एशिया संकट गहराने से बाजार में हाहाकार मच गया है। आज सेंसेक्स-निफ्टी भारी गिरावट के साथ बंद हुए है। मिडकैप, स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली है। BSE के सभी सेक्टर इंडेक्स में बिकवाली हुई है। ऑटो और रियल्टी इंडेक्स सबसे ज्यादा गिरे हैं। ऑटो इंडेक्स 4% से ज्यादा फिसला है। मेटल,IT और बैंकिंग शेयरों में भी दबाव देखने को मिला है।
20 मार्च को भारतीय इक्विटी इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। निफ्टी 23,100 के ऊपर रहा। बाजार बंद होने पर सेंसेक्स 325.72 अंक या 0.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,532.96 पर सेटल हुआ। वहीं, निफ्टी 112.35 अंक या 0.49 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,114.50 पर बंद हुआ। आज लगभग 2330 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई,1764 शेयरों में गिरावट आई और 152 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
मीडिया,प्राइवेट बैंक और रियल्टी को छोड़कर बाकी सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। टेलीकॉम,IT,मेटल,फार्मा और PSU बैंक में 1-2% की बढ़त देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.6% की बढ़त हुई,जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स सपाट बंद हुआ।
निफ्टी पर सबसे ज़्यादा बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों में JSW Steel, Tech Mahindra, Coal India, Tata Steel और Infosys शामिल रहे। वहीं,गिरावट दर्ज करने वाले शेयरों में Hindalco Industries, HDFC Bank, HDFC Life, Shriram Finance और ONGC शामिल रहे।
HDFC सिक्योरिटीज में वरिष्ठ तकनीकी अनुसंधान विश्लेषक नागराज शेट्टी का कहना है कि गुरुवार की भारी गिरावट के बाद,शुक्रवार को Nifty में उतार-चढ़ाव के बीच वापसी देखने को मिली। यह दिन के अंत में 112 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ। बढ़त के साथ शुरुआत के बाद Nifty कारोबारी सत्र के शुरुआती हिस्से में और ऊपर चढ़ा। लेकिन यह 23350 के स्तर रेजिस्टेंस के ऊपर टिक नहीं पाया और सत्र के मध्य से बाद के हिस्से में अपने ऊपरी स्तरों से फिसल गया।
आज डेली चार्ट पर एक छोटी और पतली कैंडल बनी है, जिसकी ऊपरी शैडो लंबी थी। तकनीकी रूप से यह 'डोजी'(doji) कैंडल पैटर्न बनने का संकेत है। बाज़ार की यह चाल तेजी की वापसी में मज़बूती की कमी दिखाती है। डेली चार्ट पर 'लोअर टॉप्स' और 'बॉटम्स' जैसा मंदी का पैटर्न अभी भी बना हुआ है। इसके साथ ही Nifty इस पैटर्न का एक नया 'लोअर बॉटम' बनाने की दिशा में नीचे की ओर बढ़ रहा है।
Nifty का शॉर्ट टर्म रुझान कमज़ोर बना हुआ है। मौजूदा रिवर्सल उछाल में बिकवाली का एक अवसर हो सकता है। 22900 के स्तर से नीचे की कमज़ोरी शॉर्ट टर्म में 22500 के अगले निचले टारगेट का रास्ता खोल सकती है। हालाकि,तत्काल प्रतिरोध रेजिस्टेंस 23380 पर स्थित है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ़ मार्केट स्ट्रेटेजिस्ट,आनंद जेम्स ने कहा कि हाल की तेज़ गिरावट के बाद'मीन रिवर्जन'की मदद से निफ्टी 23,435 के स्तर तक रिकवरी करने की कोशिश कर सकता है। हालांकि,उन्होंने यह भी कहा कि अगर निफ्टी 23,190 के ऊपर नहीं जा पाता या 22,930 के नीचे गिर जाता है तो इससे और गिरावट आ सकती है,जो 22,560 और शायद 22,000 के स्तर तक पहुंच सकती है।
कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड,श्रीकांत चौहान का मानना है कि बाजार की संरचना अभी भी कमजोर है। डेली चार्ट पर एक 'बेयरिश कैंडल' और इंट्राडे चार्ट पर 'लोअर टॉप'बनने से यह संकेत मिलता है कि मौजूदा स्तरों से बाजार में और गिरावट आ सकती है।
वेल्थ मिल्स सिक्योरिटीज की रिसर्च डायरेक्टर,क्रांति बाथिनी का कहना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक ज़्यादातर नेट सेलर बने रहे हैं, जिससे बाज़ारों पर लगातार दबाव बना हुआ है। हालांकि,घरेलू संस्थागत निवेशक नेट बायर रहे हैं और उन्होंने कम से कम मध्यम अवधि में इस बिकवाली के कुछ हिस्से की भरपाई करने में मदद की है।
भू-राजनीतिक तनाव,कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमज़ोर होता रुपया विदेशी निवेशकों की बेरुखी की मुख्य वजह हैं। इसका रिटर्न पर डबल असर पड़ता है,यही वजह है कि हम न केवल भारत से,बल्कि सभी उभरते बाज़ारों से पूंजी की लगातार निकासी होते देख रहे हैं।
इस स्थिति में निवेशकों को क्या करना चाहिए,इस बारे में बाथिनी ने कहा कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहेंगी,तब तक बाज़ार में उतार-चढ़ाव बना रहने की संभावना है। उन्होंने शॉर्ट टर्म में 'गिरावट पर खरीदारी और उछाल में बिकवाली' का तरीका अपनाने की सलाह दी है। जबकि लंबे समय के निवेशकों को सलाह है कि वे कम से कम दो से तीन साल के नज़रिए के साथ निवेशित रहें और अपने फाइनेंशियल गोल्स के साथ बने रहें।
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