Market outlook : बाजार में वर्तमान स्तरों से और कमजोरी आने के संकेत, भारत-अमेरिका ट्रेड वार्ता पर रहेगी नजर

Share market : बाजार पर बात करते हुए जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत सुस्ती के साथ हुई है,जिसकी मुख्य वजह अमेरिका द्वारा अनुमान से अधिक टैरिफ लगाना रही है। आईटी और मेटल जैसे सेक्टरों सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है

अपडेटेड Apr 05, 2025 पर 2:07 PM
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Experts views : अमोल अठावले का मानना ​​है कि तेज करेक्शन के बाद,बाजार वर्तमान में 20-डे और 50-डे सिंपल मूविंग एवरेज के करीब कारोबार कर रहा है। शॉर्ट टर्म में अगर बाजार 23,000/75800 के लेवल को फिर से हासिल कर लेता है तो हमें 23,250-23,325/76500-76800 तक पुलबैक रैली देखने को मिल सकती है

Market Views: कल भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ घोषणाओं के कारण ग्लोबल बाजार में उथल-पुथल मची रही,जिसके कारण सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 1.22 फीसदी और 1.49 फीसदी से अधिक की गिरावट आई। सेंसेक्स करीब 930 अंकों की गिरावट के साथ 75,364 पर बंद हुआ,जबकि निफ्टी करीब 22,904 पर बंद हुआ। यह गिरावट मुख्य रूप से ग्लोबल ट्रेड वॉर और मंदी की आशंकाओं के कारण हुई है। मेटल और फार्मा जैसे अहम सेक्टरों पर काफी असर पड़ा। फार्मा शेयरों ने बाजार में बने दबाव के आगे घुटने टेक दिए। बैंकिंग सेक्टर को एचडीएफसी बैंक जैसे शेयरों से सपोर्ट मिला।

बाजार पर बात करते हुए जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत सुस्ती के साथ हुई है,जिसकी मुख्य वजह अमेरिका द्वारा अनुमान से अधिक टैरिफ लगाना रही है। आईटी और मेटल जैसे सेक्टरों सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है। अर्थव्यवस्था में मंदी की संभावना और अन्य देशों द्वारा अमेरिका के खिलाफ संभावित जवाबी कार्रवाइयों की वजह से चिंता बढ़ गई है। निवेशकों की नजर अमेरिका के खिलाफ होने वाली जवाबी कार्रवाइयों पर रहेगी। इन वजहों से आगे भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ सकती है। ऐसे में आगे निवेशक सतर्क रवैया अपनाते नजर आएंगे। सतर्कता की इस भावना के चलते सोने और बॉन्ड की कीमतों में तेजी कायम रह सकती है। लोग इन सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ रुख कर सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भारत पर लगाए गए टैरिफ अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम हैं। इससे कुछ हद तक राहत मिलती। भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार वार्ता से अगर कोई भी अच्छी बात निकल कर आती है तो ये बाजार के लिए एक अच्छे ट्रिगर का काम करेगी। निवेशकों की नजरें आगामी एमपीसी बैठक पर भी टिकी हुई हैं,जिसमें अगले सप्ताह बेंचमार्क ब्याज दर के बारे में निर्णय होने की उम्मीद है। अगर आरबीआई दरों में कटौती करता है तो ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सेक्टरों को फायदा हो सकता है। इसके अलावा बजार की नजर भारत के महंगाई आंकड़ों ओर अमेरिका में बेरोजगारी दावों पर भी लगी रहेगी।


उन्होंने आगे कहा कि अब बाजार का फोकस धीरे-धीरे आगामी कॉर्पोरेट अर्निंग सीजन की ओर बढ़ रहा है। जिसके बारे में शुरुआती अनुमान कमजोर हैं। अर्निंग ग्रोथ में और गिरावट का जोखिम है,जिसका मुख्य कारण कमजोर मांग और मार्जिन पर बना दबाव है। आईटी सेक्टर के नतीजे कमजोर रहने की उम्मीद है। निवेशकों की नजर मैनेजमेंट की कमेंटरी और आगे के गाइडेंस पर रहेगी। ग्लोबल इकोनॉमी में मंदी से जुड़ी चिंताएं और अमेरिका में महंगाई बढ़ने की संभावना कंपनियों को डिस्क्रीशनरी आईटी खर्च को टालने के लिए मजबूर कर सकती हैं। जिससे इस सेक्टर की शॉर्ट टर्म संभावनाओं पर निगेटिव असर पड़ सकता है।

प्रोग्रेसिव शेयर्स के निदेशक आदित्य गग्गर का कहना है कि ट्रंप की टैरिफ नीतियों से बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है,जिसके कारण निफ्टी वीकली चार्ट पर मंदी की स्थिति में है। यही ट्रेंड जारी रहने की स्थिति में,निफ्टी के 22,600 तक गिरने की संभावना है। दूसरी ओर,डेली चार्ट से पता चलता है कि निफ्टी इनवर्टेड हेड एंड शोल्डर्स पैटर्न के राइट शोल्डर को आगे बढ़ा सकता है। ऐसे में 23,800 से ऊपर की मजबूत क्लोजिंग से बाजार में तेजी लौट सकती है। निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 23,150 पर और सपोर्ट 22,780 पर दिख रहा है।

कोटक सिक्योरिटीज के वीपी-टेक्निकल रिसर्च अमोल अठावले का कहना है कि पिछले छोटे सप्ताह में बेंचमार्क इंडेक्सों में ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। इस सप्ताह के दौरान,बाजार ने 23,500/77400 के अहम सपोर्ट को तोड़ दिया और इस ब्रेकडाउन के बाद बिकवाली का दबाव तेज हो गया। तकनीकी रूप से देखें तो वीकली चार्ट पर,इसने एक लॉन्ग बियरिश कैंडल बनाई है और इंट्राडे चार्ट पर यह लोअर टॉप फॉर्मेशन बनाए हुए है। इससे वर्तमान स्तरों से आगे और कमजोरी आने का संकेत मिल रहा है।

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अमोल अठावले का मानना ​​है कि तेज करेक्शन के बाद,बाजार वर्तमान में 20-डे और 50-डे सिंपल मूविंग एवरेज (एसएमए) के करीब कारोबार कर रहा है। शॉर्ट टर्म में अगर बाजार 23,000/75800 के लेवल को फिर से हासिल कर लेता है तो हमें 23,250-23,325/76500-76800 तक पुलबैक रैली देखने को मिल सकती। दूसरी ओर,22,800/75200 से नीचे के ब्रेक के बाद नई बिकवाली देखने को मिल सकती। अगर ऐसा होता है तो बाजार 22,700/74900 तक गिर सकता है। आगे भी गिरावट जारी रह सकती है। ऐसे में इंडेक्स 22,500/74400 तक गिर सकता है।

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