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Market outlook : पश्चिम एशिया संकट गहराने से बाजार में हाहाकार, जानिए 20 मार्च को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market outlook : वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की भावना और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते बेंचमार्क इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज़्यादा गिर गए। मार्केट ब्रेथ बेहद कमज़ोर रही। 999 शेयरों में बढ़त दिखी, वहीं 3,072 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई

Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Mar 19, 2026 पर 4:41 PM
Market outlook : पश्चिम एशिया संकट गहराने से बाजार में हाहाकार, जानिए 20 मार्च को कैसी रह सकती है इसकी चाल
Market cues : Nifty 500 इंडेक्स अपने सितंबर 2024 के शिखर से 10 प्रतिशत से थोड़ा ज़्यादा नीचे गिर गया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब 100-हफ़्ते का मूविंग एवरेज इतना ज़्यादा टूटा और उसके बाद भी कोई रिकवरी नहीं हुई है

Market outlook : पश्चिम एशिया संकट गहराने से बाजार में हाहाकार मच गया है। आज सेंसेक्स-निफ्टी भारी गिरावट के साथ बंद हुए है। मिडकैप, स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली है। BSE के सभी सेक्टर इंडेक्स में बिकवाली हुई है। ऑटो और रियल्टी इंडेक्स सबसे ज्यादा गिरे हैं। ऑटो इंडेक्स 4% से ज्यादा फिसला है। मेटल, IT और बैंकिंग शेयरों में भी दबाव देखने को मिला है।

निफ्टी 776 प्वाइंट गिरकर 23,002 पर बंद हुआ है। वहीं, सेंसेक्स 2497 प्वाइंट गिरकर 74,207 पर बंद हुआ है। बैंक निफ्टी 1875 प्वाइंट गिरकर 53,451 पर बंद हुआ है। मिडकैप 1798 प्वाइंट गिरकर 54,492 पर बंद हुआ है। निफ्टी के 50 में से 49 शेयरों में गिरावट रही। सेंसेक्स के सभी 30 शेयरों में गिरावट देखने को मिली। बैंक निफ्टी के सभी 14 शेयरों में बिकवाली रही।

वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की भावना और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते बेंचमार्क इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज़्यादा गिर गए। मार्केट ब्रेथ बेहद कमज़ोर रही। 999 शेयरों में बढ़त दिखी, वहीं 3,072 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बाज़ार में उतार-चढ़ाव काफ़ी ज़्यादा रहा और India VIX 21 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ गया। ऑटो शेयरों की सबसे ज़्यादा गिरावट रही, जो 4 प्रतिशत से ज़्यादा गिरे। वहीं बैंकिंग, IT, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल इंडेक्स में भी 3-4 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट, VK विजयकुमार ने कहा कि इज़राइल ने ईरान में दुनिया की सबसे बड़ी LNG रिफाइनरी पर हमला किया है। इससे युद्ध को लेकर बनी अनिश्चितता और भी बढ़ गई है। अगर ब्रेंट लंबे समय तक $110 से ऊपर बना रहता है, तो इसका भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक्स पर बुरा असर पड़ेगा। FY27 में भारत की GDP ग्रोथ और कॉर्पोरेट अर्निंग पर भी इसका असर पड़ेगा।

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