Market outlook : भारी गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 1 अप्रैल को कैसी रह सकती है इसकी चाल
Market outlook : हालांकि हालिया करेक्शन के बाद अब शेयरों के भाव ज़्यादा बेहतर लग रहे हैं,फिर भी अर्निंग के अनुमानों में होने वाले बदलाव ही बाज़ार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और रुपये की कमज़ोरी से इनपुट लागत पर दबाव पड़ सकता है
Market cues : बोनान्ज़ा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि अगले कुछ सत्रों तक बाज़ार का रुख सतर्क बना रह सकता है। बाजार की नजर RBI के करेंसी पर उठाए गए कदम के असर पर रहेगी
Stock Market : 30 मार्च को भारतीय इक्विटी इंडेक्स में भारी गिरावट देखने को मिली। सभी सेक्टरों में आई बड़े पैमाने पर बिकवाली के चलते Nifty 22,330 के करीब बंद हुआ। कारोबारी सत्र के अंत में Sensex 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत गिरकर 71,947.55 पर और Nifty 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत गिरकर 22,331.40 पर बंद हुआ। आज लगभग 837 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई,3419 शेयरों में गिरावट आई और 138 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
सभी सेक्टरों में गिरावट देखने को मिली। ऑटो,FMCG,कंज्यूमर ड्यूरेबल्स,कैपिटल गुड्स,टेलीकॉम,रियल्टी,प्राइवेट बैंक और PSU बैंक के शेयरों में 2-4 फीसदी की गिरावट आई।
मिड और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी गिरावट देखने को मिली। इसके चलते Nifty Midcap और Smallcap इंडेक्स में लगभग 2.6 फीसदी की गिरावट आई।
Nifty में शामिल शेयरों में,सबसे ज़्यादा नुकसान Bajaj Finance, Axis Bank, Shriram Finance, State Bank of India और InterGlobe Aviation को हुआ। दूसरी ओर, Hindalco Industries, Coal India, ONGC और Power Grid Corporation of India के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि दुनिया भर में जारी तनाव,तेल की बढ़ती कीमतों और FII की लगातार जारी बिकवाली के बीच बाज़ार ने मौजूदा वित्त वर्ष के आखिरी ट्रेडिंग सेशन को सावधानी भरे अंदाज़ में खत्म किया। बैंकिंग स्टॉक्स उन शेयरों में शामिल थे जिनमें सबसे ज़्यादा गिरावट देखने को मिली। इसकी वजह थी RBI के बैंकों की विदेशी मुद्रा पोजीशनों पर लगाए गए नए प्रतिबंध,जिनका मकसद रुपये को स्थिर करना था। इन प्रतिबंधों के चलते बड़े प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के बैंकों के शेयरों में भारी गिरावट आई।
हालांकि हालिया करेक्शन के बाद अब शेयरों के भाव ज़्यादा बेहतर लग रहे हैं,फिर भी अर्निंग के अनुमानों में होने वाले बदलाव ही बाज़ार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और रुपये की कमज़ोरी से इनपुट लागत पर दबाव पड़ सकता है। इसकी वजह से नियर टर्म में अर्निंग के अनुमानों में कटौती का जोखिम बढ़ गया है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट VK विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को अब पांचवाँ हफ़्ता शुरू हो गया है। इस बीच,युद्ध के और ज़्यादा बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं,क्योंकि हूती गुट भी इस संघर्ष में शामिल हो गया है। इस बीच अमेरिका ने भी हमले को और तेज करने के लिए अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतें एक बार फिर बढ़कर 116 डॉलर तक पहुंच गई हैं। युद्ध से पहले भारत के सामने जो 'गोल्डीलॉक्स' जैसी बेहतरीन आर्थिक स्थिति थी,वह अब इस युद्ध की वजह से लगभग खत्म हो चुकी है। पहले जहां हमें ऊंची GDP ग्रोथ,कम महंगाई,संतुलित राजकोषीय और चालू खाता घाटे और वित्त वर्ष 2027 में कंपनियों की कमाई में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद थी, वहीं अब हमें कम GDP ग्रोथ,ज़्यादा महंगाई,ज़्यादा राजकोषीय और चालू खाते के घाटे और वित्त वर्ष 2027 में अर्निंग में कम बढ़ोतरी जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि बाज़ार ने इन निगेटिव बातों को काफी हद तक पचा लिया है। निफ्टी के ट्रेलिंग PE अनुपात में लगभग 19.9 गुना की गिरावट से इसकी पुष्टि होती है। करेक्शन के वाद वैल्यूशन ठीक हुए हैं,लेकिन अभी भीबाजार सस्ता नहीं है। लेकिन कुछ ऐसे सेग्मेंट भी हैं जिनके वैल्यूएशन आकर्षक है,जैसे कि फाइनेंशियल सेग्मेंट।
जेफ़रीज़ के इक्विटी एनालिस्ट महेश नंदुरकर ने कहा कि अगर अप्रैल में भी होर्मुज़ के रास्ते में रुकावटें जारी रहती हैं तो हमें उम्मीद है कि तेल मार्केटिंग कंपनियों, एयरलाइंस,सीमेंट,टाइल्स,पेंट्स और एडहेसिव्स की अर्निंग पर 10 फीसदी से ज़्यादा का असर पड़ेगा।
नंदुरकर ने आगे कहा कि इस टकराव की वजह से FY2027 में GDP 50 बेसिस प्वाइंट तक गिर सकती है,जबकि भारत की कॉर्पोरेट अर्निंग में 2-2.5 फीसदी की कटौती हो सकती है।
बोनान्ज़ा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि अगले कुछ सत्रों तक बाज़ार का रुख सतर्क बना रह सकता है। बाजार की नजर RBI के करेंसी पर उठाए गए कदम के असर पर रहेगी। Q4 के नतीजे भी शुरू होने वाले है। अगर नतीजे मज़बूत रहते हैं तो चुनिंदा शेयरों में खरीदारी फिर से शुरू हो सकती है। खास तौर पर उन सेक्टरों में जिनकी बुनियाद मज़बूत है, तेजी आ सकती है। लेकिन बैंकिंग और निर्यात से जुड़े शेयरों में नियर टर्म में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
Choice Broking में रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर ने कहा कि हाल की तेज़ गिरावट,Nifty और Bank Nifty दोनों में बनी लगातार कमज़ोरी,साथ ही बढ़ी हुई वोलैटिलिटी और सतर्क ग्लोबल संकेतों को देखते हुए,निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे एक अनुशासित और चुनिंदा शेयरों पर ही फोकस करने की रणनीति अपनाएं। किसी भी शॉर्ट टर्म उछाल का पीछा करने के बजाय, बाज़ार में गिरावट आने पर फंडामेंटली मज़बूत शेयरों को जमा करने पर फोकस करना समझदारी होगी। नई लॉन्ग पोज़िशन्स पर तभी विचार किया जाना चाहिए जब Nifty निर्णायक रूप से 24,000 के स्तर को पार कर ले और उस पर टिका रहे। ऐसा होने पर ही बाज़ार के बेहतर होते रुझान का संकेत मिलेगा और एक अधिक स्थिर और टिकाऊ रिकवरी का रास्ता खुलेगा।
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