Market outlook : बाजार में अभी 3-4 महीने और रहेगा दबाव, आगे क्वालिटी शेयरों में ही बनेगा पैसा

Stock market trend: बाजार में संकेतों की बात करें तो नतीजों की पिक्चर मजबूत नहीं है। FIIs की कैश में भारी बिकवाली जारी है। बाजार में प्री-बजट रैली नहीं बल्कि बिकवाली हावी है। बजट से उम्मीदें बेहद कम हैं। ट्रंप के एक्शन से बाजार घबराया हुआ है। इकोनॉमी की रफ्तार धीमी है। डिमांड को लेकर चिंता बरकरार है

अपडेटेड Jan 25, 2025 पर 1:53 PM
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मार्केट एक्सपर्ट सुनील सुब्रमणियम ने कहा कि इकोनॉमी में सुस्ती के डर का असर बाजार पर दिख रहा है। एफआईआई के नजरिए से हमारे बाजार महंगे हैं। इस कारण एफआई की निकासी हो रही है

Market News: बाजार में कमजोरी बनी हुई है। कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन 24 जनवरी को भी बाजार में उतार-चढ़ाव रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए। कल सेंसेक्स 330 प्वाइंट गिरकर 76,190 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 113 प्वाइंट गिरकर 23,092 पर बंद हुआ। वीकली आधार पर देखें तो बाजार लगातार तीसरे हफ्ते गिरा है। बीते 3 महीने पहली बार वीकली आधार पर बाजार लगातार तीसरे हफ्ते गिरा है। इस हफ्ते Sensex 0.56 फीसदी,Nifty 0.48 फीसदी, Nifty Bank 0.36 फीसदी, Midcap 2.46 फीसदी और Nifty Small Cap इंडेक्स 4.05 फीसदी गिरा है।

बाजार में संकेत

बाजार में संकेतों की बात करें तो नतीजों की पिक्चर मजबूत नहीं है। FIIs की कैश में भारी बिकवाली जारी है। बाजार में प्री-बजट रैली नहीं बल्कि बिकवाली हावी है। बजट से उम्मीदें बेहद कम हैं। ट्रंप के एक्शन से बाजार घबराया हुआ है। इकोनॉमी की रफ्तार धीमी है। डिमांड को लेकर चिंता बरकरार है।


बजट में क्या देखना चाहता है बाजार?

बाजार बजट में कोई निगेटिव खबर नहीं देखना चाहता। टैक्स में बढ़ोतरी नहीं होनी चाहिए। कोई नया टैक्स नहीं लगना चाहिए। कैपेक्स पर ज्यादा खर्च होना चाहिए। वित्तीय घाटा काबू में रहना चाहिए। बजट में डिमांड बढ़ाने पर जोर होना चाहिए। मैन्युफैक्चरिंग को पुश मिलना चाहिए और नौकरियां पैदा करने पर फोकस होना चाहिए।

WEF में बोले ट्रंप

WEF में डोनॉल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में कॉरपोरेट टैक्स घटाकर 15 फीसदी हो सकता है। टैक्स घटाने के लिए जरूरी है कि कंपनियां US में प्रोडक्ट बनाएं। अमेरिका में निर्माण नहीं होता तो टैरिफ लगेगा। फेड से दरों में कटौती करने के लिए कहा है। दरों में कटौती इकोनॉमी के लिए बेहद जरूरी है। सऊदी अरब और OPEC देशों से क्रूड के दाम घटाने के लिए कहेंगे। अमेरिका अपने ऑयल एंड गैस भंडार का इस्तेमाल करेगा। चीन के साथ लेवल प्लेइंग फील्ड चाहिए।

फाइनेंशियल सेक्टर की बजट डिमांड

फाइनेंशियल सेक्टर की बजट डिमांड है कि पर्सनल इनकम टैक्स में कटौती की जानी चाहिए। सेविंग्स, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के लिए टैक्स में रियायत होनी चाहिए। लॉन्ग टर्म सेविंग्स (इक्विटी, डेट) के लिए इंसेंटिव्स होने चाहिए। कैपिटल मार्केट की क्षमता बढ़ाने के लिए कदम उठाने चाहिए। कंजम्पशन को बूस्ट करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है।

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CNBC-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने बाजार पर बात करते हुए कहा कि बाजार चार साल से चल रहा था तो किसी ने नहीं पूंछा की बाजार क्यों चल रहा है। लेकिन अब बाजार हल्का सा गिरा है तो हायतौबा मची हुई है। बाजार का काम ही है बीच-बीच में कमजोर खिलाड़ियों का निकाना और ये टेस्ट करना कि आप इक्विटी मार्केट के लिए बने हैं कि नहीं।

अनुज ने आगे कहा कि अर्निंग्स से सपोर्ट न मिलने और अब तक आई एकतरफा तेजी के कारण शेयरों के भाव महंगे होने की वजह से बाजार में गिरावट आई है। कुछ हद तक बाजार को बजट में क्या होगा इसका भी डर है। इसके अलावा एफआईआई की बिकवाली भी बाजार पर दबाव बना रही है।

मार्केट एक्सपर्ट सुनील सुब्रमणियम ने कहा कि इकोनॉमी में सुस्ती के डर का असर बाजार पर दिख रहा है। एफआईआई के नजरिए से हमारे बाजार महंगे हैं। इस कारण एफआई की निकासी हो रही है।

अनुज सिंघल का कहना है कि अगर बजट में कोई बड़ी बात नहीं होती है तो बाजार की ये गिरावट अभी 3-4 महीने और चल सकती है। इसके बाद मार्केट का वैल्यूएशन सस्ता हो जाएगा।

CapGrow Capital के फाउंडर & CIO अरुण मल्होत्रा ने कहा कि अब बाजार में एकतरफा तेजी का दौर खत्म हो गया है। आगे हमें क्वालिटी शेयर की चलते दिखेंगे। निवेशक और ट्रेडर अब बाजार में बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। ये बाजार के लिए अच्छी बात हैं। इस करेक्शन के बाद सट्टेबाजी के दम पर चल रही कंपनियों में निवेशक दोबारा नहीं जाएगा और अच्छी क्वालिटी की कंपनियां आगे आपको अच्छा रिटर्न देंगी। उन्होंने आगे कहा कि अच्छी क्वालिटी की कंपनियां यहां से जून तिमाही के बाद यानी अगले 5-6 महीनों में 15-20 फीसदी का रिटर्न दे सकती हैं।

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