डॉ. विकास वी. गुप्ता

डॉ. विकास वी. गुप्ता
Market view : ईरान पर US-इज़राइल की मिली-जुली कार्रवाई के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई भी तेज हो गई है। इसका असर मिडिल ईस्ट के ज़्यादातर देशों पर पड़ रहा है। आगे और तनाव बढ़ने की संभावना दिख रही है। तनाव का यह दौर कई हफ़्तों और शायद महीनों तक जारी रह सकता है। रूस-यूक्रेन लड़ाई के दौरान भी हमें कुछ ऐसा ही देखने को मिला था। उस लड़ाई के कुछ हफ़्तों में खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन 4 साल से ज़्यादा हो गए हैं और अभी भी इस लड़ाई का अंत नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में इस समय यह कहना मुश्किल है कि US-ईरान युद्ध लंबे समय तक चलेगा या नहीं।
इंडियन मार्केट पर इस लड़ाई के कुछ निगेटिव असर तत्काल देखने को मिल सकते है। सबसे पहले तो इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेंगी। हालांकि, क्रूड की कीमते पहले ही बढ़ चुकी हैं। लेकिन आगे भी इनमें बढ़त आ सकती। दूसरा बड़ा मुद्दा मर्चेंट लेन या समुद्री रास्तों से होने वाले ट्रेड में बाधा आ सकती है।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से USD-रुपए पर भी असर पड़ता है और रुपया कमजोर होता है।। समुद्री रास्ते में रुकावट से कच्चे तेल के अलावा दूसरे सामानों के इंपोर्ट और एक्सपोर्ट पर भी असर पड़ सकता है। इससे भारत में महंगाई बढ़ सकती है। ऐसे में RBI ब्याज दरों में कटौती करने में देरी कर सकता है। अच्छी बात यह है कि महंगाई लगभग ज़ीरो के लेवल पर है। इसलिए भारतीय अर्थव्यवस्था की महंगाई में बढ़त को झेलने की क्षमता काफी मज़बूत है।
एक्सपोर्टर्स को लंबे ट्रेड रूट से सामान बाहर भेजने में ज़्यादा लागत का भी सामना करना पड़ेगा,जिससे कुछ बाजारों में भारतीय कारोबारियों की प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता पर भी असर पड़ेगा।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और गैस कंपनियों पर इस लड़ाई का तुरंत असर पड़ेगा। केमिकल्स,फर्टिलाइजर,पेंट्स और FMCG जैसे दूसरे सेक्टरों के इनपुट कॉस्ट में भी बढ़त होगी। FIIs “फ्लाइट टू सेफ्टी” रणनीति के तहत इक्विटी मार्केट में बिकवाली बढ़ा सकते हैं। हालांकि,रूस-यूक्रेन युद्ध के अनुभव से पता चलता है कि इसका निफ्टी पर शायद ज्यादा असर न पड़े।
मीडियम टर्म के नजरिए से देखें तो दुनिया भर में डिफेंस प्रोडक्ट्स की डिमांड में तेजी आने से इंडियन डिफेंस एक्सपोर्ट में काफी बढ़ोतरी होने की संभावना है। ऐसी लड़ाईयां लगातार इस बात का संकेत हैं कि किसी भी हालात के लिए पूरी तरह तैयार रहने की ज़रूरत है। ऐसे हालात में इंडियन डिफेंस इक्विपमेंट में दिलचस्पी बढ़ने और डिफेंस कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना है।
एक बार जब युद्ध खत्म हो जाएगा और मिडिल ईस्ट में शांति लौट आएगी,तो IMEEC फिर से फोकस में आ जाएगा और ईस्ट और वेस्ट के बीच एक स्टेबल ट्रेड रूट के तौर पर इसकी अहमियत बहुत बढ़ जाएगी। इससे इंडियन इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने का बहुत बड़ा मौका मिलेगा। IMEEC का सबसे अहम पहलू ग्लोबल इकोनॉमिक इकोसिस्टम में इंडियन इंटीग्रेशन और मज़बूती होगी।
आसान शब्दों में कहें तो भारत पर शॉर्ट टर्म में इस लड़ाई का कुछ असर देखने को मिल सकता है। लेकिन जब तक कि कच्चे तेल की कीमतें काफी लंबे समय तक काफ़ी ऊंचे स्तर पर नहीं रहतीं, तब तक भारतीय बाज़ारों पर इसका बहुत ज़्यादा असर होने की उम्मीद नहीं है। अभी का अंदाज़ा यह है कि US लंबा युद्ध नहीं चाहता है और शायद 4-6 हफ़्ते में इसे खत्म कर देना चाहता है। अगर यह लड़ाई जल्दी खत्म हो जाती है तो भारतीय बाज़ार में मजबूती आने की उम्मीद है।
डॉ. विकास वी. गुप्ता ओमनीसाइंस कैपिटल में CEO और चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उनके पास B.Tech (IIT बॉम्बे), MS और डॉक्टरेट (कोलंबिया यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क) की डिग्री है। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया और IIT खड़गपुर में साइंटिस्ट और प्रोफेसर के तौर पर भी काम किया है।
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