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MC Markets Poll : 2026 में भारतीय बाजार कर सकते हैं ग्लोबल शेयरों से बेहतर प्रदर्शन, FIIs की हो सकती है वापसी

MC Markets Poll :मनीकंट्रोल के इस पोल से पता चलता है कि मार्केट एक्सपर्ट्स 2026 में भारतीय इक्विटीज़ को लेकर पॉजिटिव बने हुए हैं। उनका मानना है कि घरेलू ग्रोथ और बेहतर नतीजों की उम्मीदों के चलते भारतीय बाजार बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। विदेशी निवेश एक अहम फैक्टर बना हुआ है जिस पर नज़र रखनी होगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 08, 2026 पर 12:59 PM
MC Markets Poll : 2026 में भारतीय बाजार कर सकते हैं ग्लोबल शेयरों से बेहतर प्रदर्शन, FIIs की हो सकती है वापसी
MC Markets Poll : विकास गुप्ता की राय है कि जैसे-जैसे ग्लोबल रेट साइकिल बदल रही है, भारत में FII निवेश के वापस आने की संभावना बढ़ रही है। भारत का बड़ा इक्विटी मार्केट, हाई रियल GDP ग्रोथ, घरेलू लिक्विडिटी और सपोर्टिव पॉलिसी माहौल इसे बड़े उभरते बाजारों में खास बनाता है

MC Markets Poll : मनीकंट्रोल के एक पोल के मुताबिक 2026 में भारतीय इक्विटी मार्केट ग्लोबल मार्केट से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। हालांकि, निवेशक विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को लेकर सतर्क रह सकते हैं। इस पोल में म्यूचुअल फंड, PMS, AIF और ब्रोकिंग फर्मों के 50 इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स शामिल हुए। पोल में शामिल 57 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि अगले साल भारतीय इक्विटीज़ ग्लोबल मार्केट से बेहतर प्रदर्शन करेंगी। इससे घरेलू ग्रोथ और बेहतर अर्निंग आउटलुक में उनके भरोसे को दिखाता है। लगभग 25 प्रतिशत लोगों का मानना ​​है कि ग्लोबल मार्केट बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, जबकि 18 प्रतिशत अभी तक कुछ तय नहीं कर पाए हैं।

बता दें कि 2025 में, MSCI इंडिया इंडेक्स ने US डॉलर के हिसाब से सिर्फ़ 2.2 प्रतिशत का कुल रिटर्न दिया। यह ब्रॉडर MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में हुई लगभग 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी और एशियाई देशों में हुई मज़बूत ग्रोथ से काफी पीछे रहा।

FII निवेश

भारतीय बाजारों में तेजी आने की ये उम्मीद, विदेशी निवेशकों के व्यवहार को लेकर बनी सावधानी के बावजूद कायम है। लगभग 68 प्रतिशत जवाब देने वालों को उम्मीद है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) 2026 में नेट सेलर बने रहेंगे। गौरतलब है कि 2025 में FIIs ने भारतीय इक्विटी बाजारों में लगभग 1.66 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके चलते IT, FMCG और पावर स्टॉक्स में हुए निवेश में तेज़ी से कमी आई है। जबकि टेलीकॉम, तेल और गैस और सर्विसेज़ में विदेशी निवेश बढ़ा है।

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