Meesho share price : 5% के लोअर सर्किट पर शेयर, जानिए इस गिरावट की क्या है वजह

Meesho share price : एंकर निवेशकों की ओर से बिकवाली की आशंका है। 2 फीसदी शेयरों का एंकर लॉक-इन आज खुला है। आज करीब 11 करोड़ शेयरों का लॉक-इन खुला है। अनलॉक हुए शेयरों की वैल्यू करीब 2,000 करोड़ रुपए है। 8 मार्च को दूसरे चरण का लॉक-इन खुलेगा

अपडेटेड Jan 07, 2026 पर 11:05 AM
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Meesho share price : इस आईपीओ का इश्यू प्राइस 111 रुपए का था। यह IPO कुल 82 गुना भरा था। लिस्टिंग के बाद शार्ट स्क्वीज़ के चलते इसमें बड़ी तेजी आयी थी

Meesho share price : हाल में लिस्ट हुए मीशो के शेयर में आज 5 फीसदी का लोअर सर्किट लग गया है। यह शेयर अपने शिखर से 32 फीसदी टूट चुका है। 18 दिसंबर को इसने 254 रुपए का हाई लगाया था। शेयर में तेज गिरावट की क्या वजह है,इस पर नजर डालें तो एंकर निवेशकों की ओर से बिकवाली की आशंका है। 2 फीसदी शेयरों का एंकर लॉक-इन आज खुला है। आज करीब 11 करोड़ शेयरों का लॉक-इन खुला है। अनलॉक हुए शेयरों की वैल्यू करीब 2,000 करोड़ रुपए है। 8 मार्च को दूसरे चरण का लॉक-इन खुलेगा।

मीशो ने किया था बंपर मार्केट डेब्यू

इस स्टॉक ने 10 दिसंबर को NSE पर 162.50 रुपये प्रति शेयर पर लिस्ट होकर मार्केट में ज़ोरदार एंट्री की थी। यह IPO की कीमत 111 रुपये प्रति शेयर से 46 प्रतिशत से ज़्यादा का प्रीमियम था।


मीशो पर एक्सपर्ट्स की राय

इस आईपीओ का इश्यू प्राइस 111 रुपए का था। यह IPO कुल 82 गुना भरा था। लिस्टिंग के बाद शार्ट स्क्वीज़ के चलते इसमें बड़ी तेजी आयी थी।

बोनान्ज़ा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि मीशो एक मज़बूत लॉन्ग-टर्म बेट है। लेकिन तेज़ रैली के बाद इसकी मौजूदा कीमत शॉर्ट टर्म के नजरिए से इसके रिस्क-रिवॉर्ड को आकर्षक नहीं बनाती है। उन्होंने कहा कि कंपनी की ग्रोथ स्टोरी भरोसेमंद है,लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इतनी ज़्यादा कीमतों पर शेयर खरीदने से एग्जीक्यूशन रिस्क है। इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि अभी भी कंपनी नुकसान में चल रही है।

अभिनव तिवारी ने आगे कहा कि मीशो के फंडामेंटल्स में लगातार सुधार हो रहा है, लेकिन इसकी महंगा वैल्यूएशन सबसे बड़ा रिस्क है। मजबूत IPO सब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग के बाद तेज़ी से हुई बढ़ोतरी से पता चलता है कि उम्मीदें फंडामेंटल्स से आगे निकल गई हैं। इसे देखते हुए किसी गिरावट में इसके ज़्यादा आकर्षक कीमत पर आने का इंतज़ार करना बेहतर रिस्क रिवॉर्ड दे सकता है।

INVasset PMS के बिज़नेस हेड हर्षल दासानी ने कहा कि मीशो की तेज़ रैली ने इसकी कीमत को ब्रोकरेज द्वारा तय टारगेट प्राइस से काफी आगे बढ़ा दिया है, जिससे पता चलता है कि तुरंत होने वाले ज़्यादातर फायदे पहले ही इसकी कीमत में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि कंपनी अभी भी मुनाफे में आने की कोशिश कर रही है। इस स्टेज पर, इन्वेस्टर का भरोसा शॉर्ट-टर्म कमाई की संभावना के बजाय लॉन्ग-टर्म मौके पर ज़्यादा टिकी हुई है।

उन्होंने आगे कहा कि लिस्टिंग के बाद इंस्टीट्यूशनल भागीदारी से भरोसा बढ़ता है,लेकिन इन स्तरों को बनाए रखने के लिए यूनिट इकोनॉमिक्स,ऑपरेटिंग लेवरेज और कॉम्पिटिटिव इंटेंसिटी मैनेजमेंट में ठोस प्रगति की ज़रूरत होगी। पहले से स्थापित कंज्यूमर या टेक प्लेटफॉर्म्स के विपरीतमीशो अभी भी पब्लिक मार्केट में अपनी काबिलियत साबित करने की कोशिश में है।इसके लिए तिमाही परफॉर्मेंस में मजबूती और पारदर्शिता बहुत ज़रूरी हो जाती है।

उन्होंने आगे कहा कि इन्वेस्टर्स का फोकस हेडलाइन ग्रोथ से हटकर डिलीवरी पर होना चाहिए। मीशो कितनी असरदार तरीके से स्केल को सस्टेनेबल प्रॉफिटेबिलिटी में बदलता है, जैसे सवाल ही आखिर में यह तय करेंगे कि IPO के बाद की री-रेटिंग बनी रहेगी है या समय के साथ नॉर्मल हो जाएगी।

 

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