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HDFC और HDFC Bank के विलय को रेगुलेटरी पैमानों पर खरा उतरने की चुनौती

बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एक्जिक्टिव ऑफिसर शशिधर जगदीशन का कहना है कि इस मर्जर के बाद बैंक को इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए शुरुआत में प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग सर्टिफिकेट (PSLC)की खरीद का विकल्प अपनाना होगा.

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 04, 2022 पर 4:02 PM
HDFC और HDFC Bank के विलय को रेगुलेटरी पैमानों पर खरा उतरने की चुनौती
एचडीएफसी के चेयरमैन केके मिस्त्री ने कहा है कि पिछले कुछ समय के दौरान CRR और SLR दोनों में कटौती की गई है। ऐसे में मर्जर के बाद बनी कंपनी के लिए CRR और SLR से संबंधित नियमों का अनुपालन करना पहले की तुलना में आसान होगा.

स्टॉक एक्सचेजों को दी गई जानकारी के मुताबिक भारत की सबसे बड़ी हाउसिंग कंपनी HDFC अपनी सब्सिडियरी HDFC Bank के साथ मर्ज हो जाएगी। HDFC Bank वैल्यू के हिसाब से देश का सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर बैंक है। यह मर्जर एक विलय योजना (amalgamation scheme) के जरिए होगा।

पहली नजर में देखें तो यह मर्जर दो एक समान वेट वाली कंपनियों के बीच होगा और बाजार हिस्सेदारी, बैलेंसशीट की मजबूती और कॉस्ट सिनर्जी ( cost synergies) के नजरिए से दोनों कंपनियों के लिए फायदेमंद होगा। इससे एचडीएफसी बैंक के शेयरों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी का रास्ता भी खुलेगा लेकिन इस मर्जर को लेकर यह ध्यान रखने की जरुरत है कि दोनों कंपनियों को कई रेगुलेटरी प्रावधानों का पालन करना होगा। जिसपर इन दोनों कंपनियों को बड़ी कीमत भी चुकानी होगी।

इन रेगुलेटरी प्रावधानों में cash reserve ratio (नकद आरक्षित अनुपात), statutory liquidity ratio (वैधानिक सरलता अनुपात) और प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग(Priority Sector Lending) से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। इन दोनों कंपनियों को इन नियमों के पालन की भी कीमत चुकानी होगी। आइए डालते हैं इनपर एक नजर।

SLR से संबंधिक नियम

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