AKASH PODISHETTI
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निफ्टी मेटल इंडेक्स में पिछले 1 महीने में 14 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। जबकि निफ्टी में इसी अवधि में सिर्फ 5.7 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है। खास बात ये है कि मेटल शेयरों में ये तेजी सितंबर तिमाही में इस सेक्टर के नतीजे कमजोर रहने के बावजूद आई है। ऐसे में ये जानना जरूरी हो गया है कि वो कौन सी वजहें हैं जो मेटल शेयरों में जोश भर रही हैं और क्या ये तेजी टिकाऊ है?
स्टील और एल्युमीनियम शेयरों पर बाजार बुलिश
ट्रिगर चीन द्वारा अपने कुछ COVID प्रतिबंधों को शिथिल करने की योजना के रूप में प्रतीत होता है। रिपोर्टों में कहा गया है कि चीन ने एक निश्चित सीमा से अधिक COVID सकारात्मक यात्रियों को ले जाने के लिए एयरलाइनों को दंडित करने वाली प्रणाली को समाप्त कर दिया है।
चीन के COVID प्रतिबंधों में ढ़िलाई से मिलेगा सपोर्ट
मीडिया में इस तरह की खबरें आई हैं कि चीन COVID प्रतिबंधों को कुछ शिथिल करने की योजना पर काम कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चीन ने एक निश्चित सीमा से ज्यादा मात्रा में COVID पॉजिटिव यात्रियों को ले जाने पर एयरलाइनों को दंडित करने वाले नियम को समाप्त कर दिया है। चीन ने कुछ क्वारंटीन नियमों में भी ढील दी है। इस खबर के बाद अधिकांश बेस मेटल्स की कीमतें बढ़ी हैं। इसके अलावा, ऐसी भी खबर आई है कि चीन की सरकार प्रॉपर्टी सेक्टर को दिए जाने वाले लोन की मात्रा को सीमित करने के लिए बैंकों के लिए तय की गई समय सीमा बढ़ाने की योजना पर भी काम रही है। इससे प्रॉपर्टी डेवलपर्स को राहत मिलने और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को मदद मिलने की उम्मीद है।
चीन की औद्योगिक गतिविधियों में फिर से जान आने की संभावना
बड़े आकार और बड़ी आबादी के कारण चीन ग्लोबल मार्केट में मेयल्स का एक बड़ा खरीदार है। जानकारों का मानना है कि कोविड प्रतिबंधों में ढील से चीन की औद्योगिक गतिविधियों में फिर से जान आएगी। जिससे मेटल्स की मांग बढ़ेगी। 2021 के अधिकांश भाग में चीन की मेटल्स की मांग काफी ज्यादा रही थी। इसके चलते मेटल्स की कीमतों में काफी तेजी देखने को मिली। हालांकि चीन की COVID-जीरो पॉलिसी के कारण उसकी मेटल डिमांड में भारी गिरावट आई है।
स्टील की सप्लाई बढ़ने से इसकी कीमत गिरी
मांग में गिरावट के अलावा मेटल कंपनियों को कच्चे माल, ईंधन और बिजली के महंगे होने से भी भारी नुकसान हुआ है। इन कारणों से टाटा स्टील का मुनाफा 90 फीसदी गिर गया। वहीं, जेएसडब्ल्यू स्टील और सेल ने भी घाटे की जानकारी दी है। जबकि हिंडाल्को का मुनाफा 66 फीसदी गिर गया है। इसके अलावा, घरेलू महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कुछ स्टील और ऑयरन प्रोडक्ट्स के निर्यात पर कर प्रतिबंध (tax restrictions) लगा दिए। इसकी वजह से देश से होने वाला स्टील एक्सपोर्ट दुनिया को दूसरे देशों की तुलना में महंगा हो गया। इससे साथ ही देश के घरेलू बाजार में स्टील की सप्लाई बढ़ गई। स्टील की सप्लाई बढ़ने से इसकी कीमतें गिर गईं।
कहां से मिल रहा मेटल्स को ईंधन
अमेरिका और यूरोप की विकसित अर्थव्यवस्थाओं के मंदी के मुहाने पर होने से स्टील की अंतरराष्ट्रीय मांग में कमी आने की संभावना है। इसके अलावा जब चीन फिर से खुलेगा तब वह स्टील और एल्यूमीनियम का निर्यात करना शुरू कर देगा, जिससे कीमतों में गिरावट आ सकती है। लेकिन कुछ दूसरे ऐसे फैक्टर भी हैं जिनसे मेटल की कीमतों को सपोर्ट मिलने की संभावना है। इस तरह की खबरें हैं कि अमेरिका भी रूसी एल्यूमीनियम के आयात पर प्रतिबंध लगाने की सोच रहा है। अमेरिका वर्तमान में अपनी एल्युमीनियम जरूरत का 10 फीसदी हिस्सा रूस से आयात करता है। अमेरिका की तरफ से रूसी एल्यूमीनियम के आयात पर प्रतिबंध का मतलब है कि उसे वैश्विक बाजार में एल्यूमीनियम के अन्य स्रोतों की तलाश करनी होगी। इस खबर से लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) पर एल्युमीनियम की कीमतों में तेजी आई है।
क्या मेटल शेयरों की मौजूदा तेजी बरकरार रह सकती है?
भारत में निवेशक यह मान कर चल रहे हैं कि मेटल कंपनियों के मार्जिन के लिए सबसे खराब दौर जल्द ही खत्म हो सकता है। इनके सबसे अहम कच्चे माल कोकिंग कोल की कीमतों में नरमी आनी शुरू हो गई है। मार्जिन में सुधार से इन कंपनियों को सपोर्ट मिलेगा। लेकिन सेक्टर के ग्रोथ के लिए मांग में भी तेजी आने की जरूरत है। दूसरी तिमाही के नतीजों के बाद मेटल कंपनियों की कमेंट्री से साफ होता कि इनके प्रोडक्ट की मांग और इनकी कमाई (realisations)स्टेबल है। विश्लेषकों का मानना है कि इस बात की उम्मीद नजर नहीं आती की मेटल कंपनियों की रेवेल्यू जल्द ही 2021 के स्तर को छू लेगी। लेकिन इनकी रेवेन्यू पहली तिमाही के निचले स्तर से बेहतर जरूर रहेगी।
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