MF Investment : फरवरी में बाजार की गिरावट का निवेशकों ने जमकर फायदा उठाया है। हाल में आए AMFI के डाटा के मुताबिक फरवरी में निवेशकों ने इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 8% बढ़ाया है। इसमें भी मिडकैप और स्मॉलकैप में जमकर पैसा डाला गया है। हालांकि इस दौरान Gold ETFs और SIP इनफ्लो दोनों में गिरावट आई है। क्या कहता है ये ट्रेंड, इस पर बात करते हुए रूंगटा सिक्योरिटीज के CFP हर्षवर्धन रूंगटा ने कहा कि इन आंकड़ों से पता चलता है कि सालाना आधार पर बाजार की वोलैटिलिटी ने निवेशकों को थोड़ा नर्वस किया है। हालांकि महीने दर महीने आधार पर एफएफ निवेश के आंकड़े मजबूत रहे हैं। सोने-चांदी में मुनाफा वसूली हुई है। मार्च महीने की बात करें तो जियोपॉलिटिकल टेंशन ने रिटेल निवेशकों को बहुत परेशान किया है। ऐसे में मार्च के आंकड़ों में इसका असर जरूर देखने को मिलेगा।
इस माहौल में निवेशकों को सलाह देते हुए हर्षवर्धन रूंगटा ने कहा कि अगर आपका व्यू 8-10 साल का है तो पोर्टफोलियो में कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है। बाजार की उथल-पुथल से डरें नहीं। लंबी अवधि के निवेशक पुराने एसेट एलोकेशन प्लान पर टिके रहें। ज्यादा रिस्क वाले निवेशक एकमुश्त निवेश भी कर सकते हैं। चाहे तो एकमुश्त निवेश को 2-3 हिस्सों में तोड़ लें। गिरते बाजार में निवेश से ही वेल्थ बनती है। ध्यान रहे, अपनी SIP या STP को जारी रखें। अलग-अलग एसेट क्लास में पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करें। मिडकैप, स्मॉलकैप के मुकाबले लार्जकैप में ज्यादा एलोकेशन करें।
लाइफ साइकिल फंड्स क्या हैं?
हाल ही में सेबी ने एक फैसला लिया और सॉल्यूशन ओरिएंटेंड फंड को डिस्कॉन्टिन्यू करते हुए उसकी जगह एक नई कटेगरी लाइफ साइकिल फंड्स की बात की। इस पर बात करते हुए हर्षवर्धन रूंगटा ने बताया कि ये फंड लाइफ गोल के साथ निवेश को जोड़ने में मदद करते हैं। ये ऐसे लाइफ गोल होते हैं जिनकी निश्चित समय अवधि होती है। इसमें फंड, निवेश समय सीमा और लक्ष्य के आधार पर री-बैलेंसिंग करता हैं।
लाइफ साइकिल फंड्स का उदाहरण
मान लीजिए किसी 25 साल की महिला ने रिटायरमेंट के लिए निवेश किया है। अभी रिटायरमेंट 30 साल दूर है। अभी फंड में एलोकेशन 65-95% इक्विटी में होगा। बाकी निवेश डेट, InvITs, गोल्ड जैसे एसेट में होगा। रिटायरमेंट करीब आने पर इक्विटी में निवेश घटकर 5-20% रह जाएग। बड़ा हिस्सा डेट, गोल्ड, सिल्वर में चला जाएगा।
लाइफ साइकिल फंड्स के फायदे
इसमें एसेट री-बैलेंसिंग पूरी तरह ऑटोमैटिक होती है। पहले से तय ग्लाइड पाथ के अनुसार निवेश होता है। निवेशक को सक्रिय रूप से कुछ करने की जरूरत नहीं होती।
बाजार की चाल के हिसाब से कोई भावनात्मक झुकाव भी नहीं आता। स्कीम बाकी बचे सालों के हिसाब से एसेट एडजस्ट करती है। स्कीम के अंदर होने वाली ऑटो री-बैलेंसिंग से निवेशक पर टैक्स का असर भी नहीं पड़ता।
ये स्कीम्स सभी उम्र के निवेशकों के लिए सही है। इसकी न्यूनतम समय सीमा 5 साल और अधिकतम 30 साल तक जाती है। ये स्कीम घर खरीदने,छुट्टियों,बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए अच्छी है।
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