MF stress test results: म्यूचुअल फंड्स के स्ट्रेस टेस्ट के पहले दौर का आया नतीजा, ये रहे विजेता और इन्होंने हारी बाजी, क्या करें निवेशक!

MF stress test : जहां एचडीएफसी स्मॉल कैप फंड और एसबीआई स्मॉल कैप फंड के पोर्टफोलियो में कुछ दबाव देखने को मिला है। वहीं निप्पॉन स्मॉल कैप फंड में मजबूती देखने को मिली है। लेकिन उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ी है। एडलवाइस म्यूचुअल फंड ने अपने साइज की स्कीमों के बीच अच्छा प्रदर्शन किया है।

अपडेटेड Mar 16, 2024 पर 8:46 AM
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MF test results : इस टेस्ट से पता चलता है ति स्मॉल-कैप फंड पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा बेचने में औसतन 14 दिन लग सकते हैं। वहीं, मिड-कैप फंड पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा बेचने में औसतन 6 दिन लग सकते हैं

MF stress test : अगर इक्विटी बाजार बुरी तरह से ढह जाता है, निवेशक घबरा कर म्यूचुअल फंडों से अपने पैसे निकालने लगते हैं और बाजार में तरलता खत्म हो जाती है तो मिड और स्मॉल-कैप फंडों को अपने 50 फीसदी पोर्टफोलियो को लिक्विडेट करने में औसतन लगभग 6 दिन लगेंगे और स्मॉल-कैप फंडों को अपने 50 फीसदी पोर्टफोलियो को खत्म करने में औसतन लगभग 14 दिन लगेंगे। ये नतीजे सेबी की तरफ से करवाए गए अनिवार्य स्ट्रेस टेस्ट से निकलकर आये हैं। इस स्ट्रेस टेस्ट में 56 स्मॉल-कैप और मिड-कैप स्कीमों को शामिल किया गया है

यह टेस्ट 2008 में लेहमैन ब्रदर्स के पतन के बाद पैदा हुई स्थिति और मार्च 2020 में पहली बार कोविड-19 के सामने आने के बाद की स्थिति को ध्यान में रखकर किया गया है। इस टेस्ट का लक्ष्य यह पता लगाना है कि बाजार में एकाएक आने वाली किसी बड़ी गिरावट के दौरान निवेशकों की तरफ से रिडेम्प्शन की भारी मांग की स्थिति में मिड और स्मॉल कैप स्कीमों के फंड मैनेजर कितनी जल्दी अपने पोर्टफोलियो को लिक्विडेट कर सकते हैं।

हालांकि इस समय कोविड-19 या लेहमैन ब्रदर्स के पतन जैसा कोई डर नहीं है। लेकिन सेबी को लगा कि इक्विटी बाजारों में, विशेष रूप से स्मॉल और मिड-कैप सेगमेंट में काफी झाग बन रहा है। ऐसी स्थिति में अगर बाजार में गिरावट आती है और तमाम निवेशक म्यूचुअल फंडों से पैसे निकालने के लिए दौड़ पड़ते हैं, तो स्मॉल और मिड-कैप फंड इससे निपटने में कितना सक्षम हैं या जानना जरूरी हो जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सेबी ने सभी फंड हाउसों को स्ट्रेस टेस्ट करने के लिए कहा। इस टेस्ट में यह जानने की कोशिश की गई है कि म्यूचुअल फंडों के स्मॉल और मिड-कैप पोर्टफोलियो के 50 फीसदी और 25 फीसदी लिक्विडेशन में कितना समय लगेगा।


इसके अलावा सेबी ने फंड हाउसों से यह जानने के लिए भी आंकड़ों की जांच करने के लिए कहा है कि उनकी योजनाएं कितनी ज्यादा ओवर वैल्यूड और वोलेटाइल हैं। यह स्ट्रेस टेस्ट किसी खराब परिस्थिति में किसी फंड की उससे निपटने की तैयारी का आकलन करने के लिया गया है। यहां हम इस टेस्ट के अहम नजीतों की जानकारी दे रहें हैं।

मिड-कैप की तुलना में स्मॉल-कैप ज्यादा परेशानी में

स्मॉल-कैप फंडों की नकदी उपलब्धता (तरलता) की स्थिति मिड-कैप फंडों की तुलना में कमजोर है। सीधे शब्दों में कहें तो मिड-कैप फंडों की तुलना में स्मॉल-कैप फंडों को अपने पोर्टफोलियो को लिक्विडेट करने में ज्यादा समय लगेगा। किसी योजना के लिए तरलता काफी अहम होती। इससे यह पता चलता है कि अगर कई निवेशक अपना पैसा वापस लेने के लिए फंड का दरवाजा खटखटाता है तो अचानक हुई मांग के लिए नकदी जुटाने के लिए कोई फंड कितनी जल्दी बाजार में अपने स्टॉक बेच सकता है।

इस टेस्ट से पता चलता है ति स्मॉल-कैप फंड पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा बेचने में औसतन 14 दिन लग सकते हैं। वहीं, मिड-कैप फंड पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा बेचने में औसतन 6 दिन लग सकते हैं। कुछ फंड हाउसों ने अपने स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंडों के बीच बहुत बड़ा अंतर दिखाया है। जैसे, एक्सिस मिडकैप फंड को अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा बेचने में 12 दिन लगेंगे। वहीं, एक्सिस स्मॉल कैप फंड को ऐसा करने में 28 दिन लगेंगे। कुछ दूसरे फंड हाउसों की योजनाओं के बीच आंकड़े अधिक सामंजस्यपूर्ण हैं। जैसे, सुंदरम मिडकैप फंड को अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी बेचने में 4 दिन लगेंगे। वहीं, सुंदरम स्मॉल कैप फंड को अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी बेचने में 5 दिन लगेंगे।

जितना बड़ा कोष (कॉर्पस), उतनी कम तरलता

बड़ी धनराशि (कॉर्पस) वाली स्कीमों में उनके पोर्टफोलियो का ज्यादा बड़ा हिस्सा अतरल (illiquid) या कम-तरलता (lower liquidity) वाले शेयरों में है। 10,000 करोड़ रुपये से कम पूंजी वाली स्मॉल-कैप योजनाओं को अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा बेचने में औसतन 6 दिन लगेंगे। 10,000-20,000 करोड़ रुपये के बीच कॉर्पस आकार वाली योजनाएं को ऐसा करने में औसतन 24 दिनों लेगेंगे। वहीं, 20,000 करोड़ रुपये से बड़ी योजनाओं को अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा बेचने में औसतन 43 दिन लगेंगे।

मिड-कैप फंडों के साथ भी ऐसा ही है। 15000 करोड़ रुपये तक की योजनाओं के लिए, उनके पोर्टफोलियो का 50 प्रतिशत बेचने में औसतन 3 दिन लगेंगे। वहीं, 15000 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं के लिए लगभग 20 दिन लगेंगे।

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ये रहे इस टेस्ट के लूजर

अधिकांश फंड हाउसों के नतीजे उम्मीद के मुताबिक रहे हैं। लेकिन कुछ ने हैरान भी किया है। टाटा स्मॉल कैप फंड ने कहा है कि उसे अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा बेचने में 35 दिन लगेंगे और अपने पोर्टफोलियो का 25 फीसदी हिस्सा बेचने में 18 दिन लगेंगे। केवल 6,289 करोड़ रुपये के आकार वाली इस योजना के लिए यह समय सीमा इसके समान आकार के कुछ स्कीमों की तुलना में काफी ज्यादा लगती है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल स्मॉल कैप फंड (7,415 करोड़ रुपये) और आदित्य बिड़ला सन लाइफ स्मॉल कैप फंड (5,382 करोड़ रुपये) को अपने इस तरह के पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा लिक्विडेट करने में सिर्फ 10 दिन लगेंगे।

डीएसपी स्मॉल कैप फंड ने कहा है कि उसे अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा बेचने में 32 दिन लगेंगे और अपने पोर्टफोलियो का 25 फीसदी हिस्सा बेचने में 16 दिन लगेंगे। दोनों के स्कीम्स के बीच समानता यह है कि इन दोनों में से किसी ने भी अपने आकार की दूसरी योजनाओं के विपरीत लार्ज-कैप शेयरों में कोई निवेश नहीं किया है।

कोटक इमर्जिंग इक्विटी (KEE) ने सभी मिड-कैप फंड्स के बीच सबसे खराब तरलता अनुपात की जानकारी दी है। आलम ये है कि उसे अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा खत्म करने में 34 दिन लगेंगे। बता दें कि KEE 39738 करोड़ रुपये के एसेट के साथ दूसरा सबसे बड़ा मिड-कैप फंड है।

ये रहे इस टेस्ट के विजेता

इस टेस्ट से कुछ ऐसे विनर उभरकर सामने आए हैं जिन्होंने अपनी तरलता को बेहतर ढंग से मैनेज किया है। क्वांट एमएफ एक ऐसा ही उदाहरण है। क्वांट स्मॉल कैप 17,233 करोड़ रुपये के आकार के साथ भारतीय एमएफ इंडस्ट्री के 10 सबसे बड़े स्मॉल-कैप फंडों में से एक है। इसने बताया है कि उसे अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा बेचने में 22 दिन लगेंगे। स्मॉल-कैप फंडों में 12,000 करोड़ रुपये से अधिक की 7 स्मॉल-कैप स्कीमों में से क्वांट स्मॉल कैप ने सबसे अच्छी तरलता की जानकारी दी है।

एडलवाइस म्यूचुअल फंड ने अपनी कटेगरी में काफी अच्छा नतीजा दिया है। एडलवाइस स्मॉल कैप फंड (3,142 करोड़ रुपये) को अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा बेचने में सिर्फ 3 दिन लगेंगे और 25 फीसदी पोर्टफोलियो खत्म करने में 2 दिन लगेंगे। यह, लार्ज-कैप शेयरों में कोई निवेश नहीं होने और नकदी में केवल 3 फीसदी होने के बावजूद है।

24,481 करोड़ रुपये के आकार वाले निप्पॉन इंडिया ग्रोथ फंड ने बताया कि उसे अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा बेचने में सिर्फ 7 दिन लगेंगे। यह तुलनात्मक रूप से काफी अच्छी स्थिति है क्योंकि इसके समान आकार वाले एक्सिस मिडकैप फंड (25,248 करोड़ रुपये) को ऐसा करने में 12 दिन लगेंगे और डीएसपी मिडकैप फंड (16,302 करोड़ रुपये) को 17 दिन लगेंगे।

क्या आकार स्मॉल-कैप फंडों के लिए बाधा है?

यदि आप तनावग्रस्त स्थिति से निपटने की क्षमता का आकलन सिर्फ तरलता के आधार पर करें तो भारत के कुछ सबसे बड़े स्मॉल-कैप फंडों के लिए तस्वीर अच्छी नहीं है। 25,534 करोड़ रुपये के कॉर्पस के साथ भारत के तीसरे सबसे बड़े स्मॉल-कैप फंड, एसबीआई स्मॉल कैप फंड ने कहा है कि उसे अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा बेचने में 60 दिन लगेंगे। यह स्मॉल-कैप फंडों की कटेगरी में सबसे खराब तरलता अनुपात है। इसे अपने पोर्टफोलियो का सिर्फ 25 फीसदी हिस्सा बेचने में एक महीना (30 दिन) लगेगा।

28,599 करोड़ रुपये के कॉर्पस साइज के साथ भारत के दूसरे सबसे बड़ा स्मॉल-कैप फंड एचडीएफसी स्मॉल कैप फंड (एचएससीएफ) ने कहा है कि उसे अपने पोर्टफोलियो का आधा हिस्सा बेचने में 42 दिन लगेंगे।

इस पैक का सबसे बड़ा आश्चर्य निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप फंड (एनएससीएफ) है। इसका साइज 46.044 करोड़ रुपये है। ये अपनी कटेगरी का सबसे बड़ा फंड है। एनएससीएफ को अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी बेचने में 27 दिन (एचएससीएफ की तुलना में लगभग आधा समय) लगेंगे।

पोर्टफोलियो ओवरवैल्यूड या अंडर वैल्यूड

इस स्ट्रेस टेस्ट से निकल कर आया दूसरा दिलचस्प आंकड़ा यह है कि आपका पोर्टफोलियो कितना ओवरवैल्यूड या अंडरवैल्यूड है। इससे पता चलता है कि क्या आपके फंड ने उन शेयरों में निवेश किया है जिनकी कीमतें ऊंची चल रही हैं या अभी भी सही भाव पर हैं। ये स्ट्रेस टेस्ट आपके पोर्टफोलियो के प्राइस-अर्निंग (पीई) अनुपात की उसके बेंचमार्क इंडेक्स से तुलना करता है।

इन नतीजों पर नजर डालें तो पता चलता है कि निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप की तरलता स्थिति काफी अच्छी है लेकिन इसका पीई अनुपात 41.91 गुना है, जबकि इसके बेंचमार्क इंडेक्स का पीई अनुपात 28.85 गुना है। बड़े आकार की योजनाओं की बात करें बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में यह अब तक का सबसे महंगा पोर्टफोलियो है। ज्यादा तरल शेयरों की तलाश में, निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप फंड महंगे शेयरों की अधिक कीमत चुका रहा है। केनरा रोबेको स्मॉल कैप फंड का पीई अनुपात 47.9 गुना है, जबकि इसके बेंचमार्क इंडेक्स का पीई 28.9 गुना है।

क्या निवेशकों को लगना चाहिए डर?

ध्यान रखने की बात है कि तरलता उन कई मापदंडों में से एक है जो किसी स्कीम की क्वालिटी तय करते हैं। यह एकमात्र ऐसी चीज़ नहीं है जो किसी स्कीम के लॉन्ग टर्म प्रदर्शन की दिशा तय करता हो। पिछले महीने में, सबसे खराब तरलता होने के बावजूद एसबीआई स्मॉल कैप फंड, 10 सबसे बड़े स्मॉल-कैप फंडों में सबसे कम गिरने वाला फंड रहा है।

सेबी ने फंड हाउसों से हर 15 दिन में अपने स्ट्रेस टेस्ट नंबर जारी करने को कहा है। इससे निवेशकों को घबराना नहीं चाहिए। सेबी केवल स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंडों पर फोकस करते हुए पब्लिक डोमेन में इनके विस्तृत आंकड़े लाना चाहता है ताकि निवेशक समझ सकें कि वे क्या कर रहे हैं। यह टेस्ट किसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए फंड हाउसों की क्षमता की जांच के लिए किया गया है। सिर्फ इस टेस्ट के नतीजों के आधार पर किसी स्कीम से निकलने का फैसला न लें।

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