भारतीय कैपिटल मार्केट की रेग्युलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 28 मार्च से वैकल्पिक आधार पर टी+0 निपटान के बीटा संस्करण को लॉन्च करने की मंजूरी दे दी है। 15 मार्च को हुई बोर्ड के बाद, सेबी ने नए और वैकल्पिक निपटान चक्र का एलान किया। सेबी ने शुक्रवार, 15 मार्च को अपने बयान में कहा कि सभी हितधारकों से मिली प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए, बोर्ड ने 25 शेयरों के सीमित सेट के लिए और दलालों के एक सीमित सेट के साथ वैकल्पिक टी + 0 निपटान के बीटा संस्करण को लॉन्च करने की मंजूरी दे दी है।
इस बयान में आगे कहा गया है कि सेबी बीटा संस्करण के उपयोगकर्ताओं सहित सभी हितधारकों के साथ आगे परामर्श जारी रखेगा। बोर्ड इस कार्यान्वयन की तारीख से तीन महीने और छह महीने के अंत में प्रगति की समीक्षा करेगा और आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।
बता दें कि प्रतिभूति बाज़ार अब तक T+1 निपटान चक्र पर काम कर रहे थे। सेबी ने 2021 में T+1 सिस्टम शुरू किया। इसको कई चरणों में लागू किया गया। अंतिम चरण जनवरी 2023 में पूरा हुआ। T+0 निपटान चक्र अब T+1 चक्र के साथ एक विकल्प के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। छोटे निपटान चक्रों से बाज़ार में तरलता बढ़ सकती है और जोखिम कम हो सकता है।
एफपीआई को भी मिली बड़ी राहत
सेबी ने ट्रेड करने में आसानी में लाने के नजरिए से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए कई छूटों को भी मंजूरी दी है। सेबी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI)के लिए, पहले से उपलब्ध कराई जा चुकी किसी जानकारी में महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में खुलासा करने की समयसीमा में ढील दी है। 15 मार्च की बोर्ड मीटिंग के बाद जारी किए गए सेबी के बयान में कहा गया कि FPI (Foreign Portfolio Investors) के लिए कामकाज में आसानी के लिए, बोर्ड ने एफपीआई की ओर से अहम बदलावों का खुलासा किए जाने के लिए समयसीमा में छूट देने के प्रस्ताव को मान लिया है।
वर्तमान में एफपीआई को अपने डीडीपी को, पहले प्रदान की गई जानकारी में महत्वपूर्ण बदलावों का खुलासा 7 कार्य दिवसों के अंदर करना होता है। सेबी ने कहा है कि एफपीआई की ओर से ऐसे अहम बदलाव, जिन्हें नोटिफाई किया जाना जरूरी है, को दो कैटेगरीज में बांटा जाएगा- टाइप I और टाइप II। टाइप I के मैटेरियल चेंजेज के बारे में FPI को अपने डीडीपी को 7 कार्य दिवसों के अंदर सूचित करना होगा। लेकिन अब इसके लिए सपोर्टिंग डॉक्युमेंट्स उपलब्ध कराने के लिए, बदलाव होने से लेकर 30 दिन तक का वक्त होगा। टाइप II के मैटेरियल चेंजेस के बारे में FPI को अपने डीडीपी को सपोर्टिंग डॉक्युमेंट्स के साथ, बदलाव के 30 दिनों के अंदर बताना और जमा करना होगा।
इस पर डोवेटेल ग्रुप के को-फाउंडर विवेक सिंघानिया ने कहा “हम एफपीआई द्वारा मैटेरियल चेंजेज के खुलासे के लिए समयसीमा में ढील देने पर विचार करने के सेबी के फैसले का स्वागत करते हैं। वर्तमान 7 दिन की समय सीमा में तमाम व्यावहारिक चुनौतियां हैं। रिपोर्टिंग समय सीमा को 30/45 दिनों तक बढ़ाने से ज्यादा उचित विंडो मिलेगी, जिससे एफपीआई को काफी फायदा होगा।''