Middle East Crisis: यूएस-इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई लंबी चली तो इन शेयरों में आ सकती है बड़ी गिरावट

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता होर्मुज की खाड़ी को लेकर है। ईरान के एक बड़े अधिकारी ने कहा है कि तेहरान ने होर्मुज खाड़ी को बंद कर दिया है। इस रास्ते से भारत फर्टिलाइजर्स, मिथेनॉल, एलएनजी सहित ईंधन का आयात करता है। खराब हालात को देखते हुए कई शिपिंग कंपनियों ने अपनी सेवाएं स्थगित कर दी हैं

अपडेटेड Mar 03, 2026 पर 5:34 PM
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अगर क्रूड की कीमतें 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती हैं तो रिटेल इनफ्लेशन 0.50 फीसदी तक बढ़ सकता है।

यूएस-इजरायल और ईरान के बीच की लड़ाई पहले मध्यपूर्व में हुई लड़ाइयों के मुकाबले ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई शीर्ष अधिकारियों और कमांडर्स के मारे जाने और तेहरान की जवाबी कार्रवाई से पूरे मध्यपूर्व में हालात बिगड़ गए हैं।

भारत के लिए काफी अहम हैं मध्यपूर्व के देश

खाड़ी देशों में भारत के करीब एक लाख लोग रहते हैं। भारत में आने वाले रेमिटेंस में खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की करीब 38 फीसदी हिस्सेदारी है। इंडिया के कुल निर्यात में इस इलाके की हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी और इंपोर्ट में 21 फीसदी है। यूएई, इराक, सऊदी अरब भारत के बड़े व्यापार साझेदार हैं।


होर्मुज की खाड़ी बंद होने से बढ़ेगा संकट 

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता होर्मुज की खाड़ी को लेकर है। ईरान के एक बड़े अधिकारी ने कहा है कि तेहरान ने होर्मुज खाड़ी को बंद कर दिया है। इस रास्ते से भारत फर्टिलाइजर्स, मिथेनॉल, एलएनजी सहित ईंधन का आयात करता है। खराब हालात को देखते हुए कई शिपिंग कंपनियों ने अपनी सेवाएं स्थगित कर दी हैं। इससे एलएनजी की सप्लाई रुक गई है। रिस्क अंडरराइटर्स ने शिपिंग कंपनियों की पॉलिसीज कैंसिल करनी शुरू कर दी है।

क्रूड महंगा होने से सरकारी खजाने पर असर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सऊदी अरामको की ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन और यूएई की पाइपलाइन का इस्तेमाल भारत कर सकता है। लेकिन, दोनों पाइपलाइन की कपैसिटी काफी कम है। इससे भारत जैसे देश में ईंधन की कमी पैदा हो सकती है। भारत ईंधन की अपनी 80 फीसदी जरूरत आयात से पूरा करता है। सप्लाई की चिंता के साथ ही क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल भारत के लिए बड़ी समस्या पैदा कर सकती है।

इनफ्लेशन आधा फीसदी तक बढ़ सकता है

अगर क्रूड की कीमतें 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती हैं तो रिटेल इनफ्लेशन 0.50 फीसदी तक बढ़ सकता है। इससे जीडीपी ग्रोथ में 0.20 फीसदी कमी आ सकती है। इसका सीधा असर इकोनॉमी पर पड़ेगा। उधर, भारत में इस साल अल नीनो की स्थितियां बनने की आशंका है। इसका मतलब है कि पहले से दबाव में चल रहे भारतीय शेयर बाजार के लिए मुश्किल बढ़ सकती है।

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इन सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में आएगी गिरावट

केमिकल्स, पेंट्स, फार्मा, एपीआई, एयरलाइंस, टायर्स, एग्रोकेमिकल्स जैसे सेक्टर क्रूड ऑयल डेरिवेटिव्स पर निर्भर करते हैं। क्रूड की कीमतों में उछाल का असर इन सेक्टर की कंपनियों पर पड़ेगा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर भी महंगे क्रूड का खराब असर पड़ेगा। कई भारतीय कंपनियां मिडिलईस्ट में मौजूद हैं। इनमें L&T, Adani Ports और कुछ एफएमसीजी एवं केमिकल कंपनियां शामिल हैं। इन पर भी खराब असर पड़ेगा।

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