सितंबर में 150 से ज्यादा स्मॉलकैप शेयरों में 10-68% की तेजी, जानिए आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल
बाजार जानकारों को अब शॉर्ट टर्म में तेजी आने की संभावना दिख रही है। कोटक सिक्योरिटीज के अमोल अठावले का कहना है कि निफ्टी ने एक लॉन्ग लेग्ड डोजी फार्मेशन बनाया है, जो दोनों तरफ ट्रेंडिंग गतिविधि दिखने की ओर संकेत कर रहा है। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के विनोद नायर का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई के दबाव से उत्पन्न चिंताओं के बीच घरेलू बाजार पूरे हफ्ते ऊपर-नीचे झूलता रहा
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घरेलू महंगाई बढ़ने का जोखिम है। ऐसे में शॉर्ट टर्म में बाजार में भारी वोलैटिलिटी रहने की उम्मीद है। निवेशक दूसरे इंडीकेटरों के साथ-साथ घरेलू, अमेरिकी और चीनी पीएमआई आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखेंगे
ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी, डॉलर में मजबूती, बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और एफआई की लगातार बिकवाली के चलते सितंबर के आखिरी हफ्ते में बाजार काफी वोलेटाइल रहा। 29 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में बीएसई सेंसेक्स 0.27 फीसदी या 180.74 अंक गिरकर 65,828.41 पर और निफ्टी 0.18 फीसदी या 35.95 अंक गिरकर 19,638.30 पर बंद हुआ। इस हफ्ते बीएसई लार्ज-कैप इंडेक्स सपाट बंद हुआ, जबकि बीएसई मिड-कैप इंडेक्स में 1.2 फीसदी और बीएसई स्मॉल-कैप इंडेक्स में 1.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। लेकिन बाजार जानकारों को अब शॉर्ट टर्म में तेजी आने की संभावना दिख रही है। कोटक सिक्योरिटीज के अमोल अठावले का कहना है कि निफ्टी ने एक लॉन्ग लेग्ड डोजी फार्मेशन बनाया है, जो दोनों तरफ ट्रेंडिंग गतिविधि दिखने की ओर संकेत कर रहा है।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के विनोद नायर का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई के दबाव से उत्पन्न चिंताओं के बीच घरेलू बाजार पूरे हफ्ते ऊपर-नीचे झूलता रहा। अमेरिकी बांड यील्ड में बढ़त और भारतीय रुपये में अस्थिरता की वजह से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार कम आकर्षक हो गए। इसके अलावा नकदी की कमी और बाजार में तेजी के लिए किसी नए ट्रिगर के अभाव के कारण बाजार को ऊपरी स्तरों पर मजबूत रजिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरे हफ्ते आईटी शेयरों ने खराब ग्लोबल संकेतों के कारण कमजोर प्रदर्शन किया, जबकि फार्मा क्षेत्र में मजबूत खरीददारी देखने को मिली। निवेशकों ने ग्लोबल अनिश्चितता के बीच रक्षात्मक रणनीति अपनाई। इसके चलते फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टर में तेजी आई। फिर भी बाजार ने हफ्ते के आखिरी दिन का समापन पॉजिटिव रुझान के साथ किया। इंडस्ट्रियल ग्रोथ में सालाना आधार पर 12 फीसदी की बढ़त से बाजार को सपोर्ट मिला।
विनोद नायर ने आगे कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घरेलू महंगाई बढ़ने का जोखिम है। ऐसे में शॉर्ट टर्म में बाजार में भारी वोलैटिलिटी रहने की उम्मीद है। निवेशक दूसरे इंडीकेटरों के साथ-साथ घरेलू, अमेरिकी और चीनी पीएमआई आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखेंगे। अगले हफ्ते बाजार की दिशा तय करने में इनकी अहम भूमिका होगी।
सितंबर में कैसी रही बाजार की चाल
सितंबर में बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी में 1.5 फीसदी और 2 फीसदी का इजाफा हुआ। बीएसई मिडकैप, स्मॉलकैप और लार्ज कैप इंडेक्स 3.6 फीसदी, 1 फीसदी और 2 फीसदी चढ़े हैं। इस महीने में, FII ने 26,692.16 रुपये की इक्विटी बेची है। जबकि DII ने 20,312.65 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी है।
बीएसई स्मॉल-कैप इंडेक्स मे 1 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है। आईटीआई, ओमेक्स, जय बालाजी इंडस्ट्रीज, आईएफसीआई, जीटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर, एनआईआईटी, ट्रांसफॉर्मर्स एंड रेक्टिफायर्स इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, जीएमआर पावर एंड अर्बन इंफ्रा, रिस्पॉन्सिव इंडस्ट्रीज और महानगर टेलीफोन निगम में 40-67 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है।
वहीं, दूसरी तरफ जीएनए एक्सल्स, वोल्टैम्प ट्रांसफॉर्मर्स, डेल्टा कॉर्प, नवीन फ्लोरीन इंटरनेशनल, टेक्समैको इंफ्रास्ट्रक्चर एंड होल्डिंग्स, शंकरा बिल्डिंग प्रोडक्ट्स, कामधेनु वेंचर्स, ऑप्टिमस इंफ्राकॉम और 63 मून्स टेक्नोलॉजीज 15-54 फीसदी के बीच गिरे हैं।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि अगले हफ्ते बाजार बड़े दायरे में कारोबार करता दिखेगा। कच्चे तेल की ऊंची कीमत ने महंगाई की चिंता को फिर से हवा दे दी है। इसके चलते लंबे समय तक उच्च ब्याज दर का माहौल बना रह सकता है। आगे ऑटो स्टॉक फोकस में रहेंगे क्योंकि ऑटो कंपनियां अपने मासिक बिक्री आंकड़े जारी करेंगी। ब्याज दर के प्रति संवेदनशील सेक्टर भी फोकस में रहेंगे क्योंकि आरबीआई की नीति बैठक अगले सप्ताह होने वाली है। निवेशक ग्लोबल स्तर पर जारी होने वाले मैक्रो डेटा पर भी नजर रखेंगे।
कोटक सिक्योरिटीज के अमोल अठावले का कहना है कि बाजार के तकनीकी गठन को देखते हुए लगता है कि इसमें में निकट अवधि में तेजी देखने को मिल सकती। निफ्टी ने एक लॉन्ग लेग्ड डोजी फार्मेशन बनाया है, जो दोनों तरफ ट्रेंडिंग गतिविधि दिखने की ओर संकेत कर रहा है। 19490 के नीचे जाने पर निफ्टी 19400 या 19200 के स्तर तक गिर सकता है। वहीं, 19750 के ऊपर जाने पर निफ्टी में 19900-20000 का स्तर मुमकिन। बाजार के रियल ट्रेंड का अंदाजा तो 20250 का स्तर पार होने पर ही लगेगा।
अमोल ने आगे कहा कि बैंक निफ्टी के लिए 44750 पर बड़ा रजिस्टेंस दिख रहा है। जब तक यह इसके नीचे कारोबार कर रहा है, कमजोर की धारणा जारी रहने की संभावना है। ऐसे में बैंक निफ्टी 44100-43800 के स्तर तक फिसल सकता है। इसके विपरीत, अगर बैंक निफ्टी 44750 के स्तर को पार कर लेता है तो एक नया अपट्रेंड संभव है और यह ऊपर की तरफ 45000-45200 तक जाता दिख सकता है।
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