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सितंबर में 150 से ज्यादा स्मॉलकैप शेयरों में 10-68% की तेजी, जानिए आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल

बाजार जानकारों को अब शॉर्ट टर्म में तेजी आने की संभावना दिख रही है। कोटक सिक्योरिटीज के अमोल अठावले का कहना है कि निफ्टी ने एक लॉन्ग लेग्ड डोजी फार्मेशन बनाया है, जो दोनों तरफ ट्रेंडिंग गतिविधि दिखने की ओर संकेत कर रहा है। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के विनोद नायर का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई के दबाव से उत्पन्न चिंताओं के बीच घरेलू बाजार पूरे हफ्ते ऊपर-नीचे झूलता रहा

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 30, 2023 पर 3:41 PM
सितंबर में 150 से ज्यादा स्मॉलकैप शेयरों में 10-68% की तेजी, जानिए आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घरेलू महंगाई बढ़ने का जोखिम है। ऐसे में शॉर्ट टर्म में बाजार में भारी वोलैटिलिटी रहने की उम्मीद है। निवेशक दूसरे इंडीकेटरों के साथ-साथ घरेलू, अमेरिकी और चीनी पीएमआई आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखेंगे

ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी, डॉलर में मजबूती, बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और एफआई की लगातार बिकवाली के चलते सितंबर के आखिरी हफ्ते में बाजार काफी वोलेटाइल रहा। 29 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में बीएसई सेंसेक्स 0.27 फीसदी या 180.74 अंक गिरकर 65,828.41 पर और निफ्टी 0.18 फीसदी या 35.95 अंक गिरकर 19,638.30 पर बंद हुआ। इस हफ्ते बीएसई लार्ज-कैप इंडेक्स सपाट बंद हुआ, जबकि बीएसई मिड-कैप इंडेक्स में 1.2 फीसदी और बीएसई स्मॉल-कैप इंडेक्स में 1.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। लेकिन बाजार जानकारों को अब शॉर्ट टर्म में तेजी आने की संभावना दिख रही है। कोटक सिक्योरिटीज के अमोल अठावले का कहना है कि निफ्टी ने एक लॉन्ग लेग्ड डोजी फार्मेशन बनाया है, जो दोनों तरफ ट्रेंडिंग गतिविधि दिखने की ओर संकेत कर रहा है।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के विनोद नायर का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई के दबाव से उत्पन्न चिंताओं के बीच घरेलू बाजार पूरे हफ्ते ऊपर-नीचे झूलता रहा। अमेरिकी बांड यील्ड में बढ़त और भारतीय रुपये में अस्थिरता की वजह से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार कम आकर्षक हो गए। इसके अलावा नकदी की कमी और बाजार में तेजी के लिए किसी नए ट्रिगर के अभाव के कारण बाजार को ऊपरी स्तरों पर मजबूत रजिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है।

इस पूरे हफ्ते आईटी शेयरों ने खराब ग्लोबल संकेतों के कारण कमजोर प्रदर्शन किया, जबकि फार्मा क्षेत्र में मजबूत खरीददारी देखने को मिली। निवेशकों ने ग्लोबल अनिश्चितता के बीच रक्षात्मक रणनीति अपनाई। इसके चलते फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टर में तेजी आई। फिर भी बाजार ने हफ्ते के आखिरी दिन का समापन पॉजिटिव रुझान के साथ किया। इंडस्ट्रियल ग्रोथ में सालाना आधार पर 12 फीसदी की बढ़त से बाजार को सपोर्ट मिला।

विनोद नायर ने आगे कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घरेलू महंगाई बढ़ने का जोखिम है। ऐसे में शॉर्ट टर्म में बाजार में भारी वोलैटिलिटी रहने की उम्मीद है। निवेशक दूसरे इंडीकेटरों के साथ-साथ घरेलू, अमेरिकी और चीनी पीएमआई आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखेंगे। अगले हफ्ते बाजार की दिशा तय करने में इनकी अहम भूमिका होगी।

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