पूंजीगत निवेश से इंडियन इकोनॉमी को मिलेगा सपोर्ट, इंडस्ट्रियल और फाइनेंशियल सेक्टर को फायदा: Morgan Stanley

मॉर्गन स्टेनली ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कॉर्पोरेट और फाइनेंशियल सेक्टर की बैलेंसशीट में सुधार देखने को मिला है। उधर, सरकार रिफॉर्म पर जोर दे रही है। इसका पॉजिटिव असर इकोनॉमी पर पड़ेगा

अपडेटेड Sep 08, 2022 पर 4:43 PM
इंडिया में कॉर्पोरेट डेट और जीडीपी का रेशियो 15 साल के निचले स्तर पर आ गया है। बैंकिंग सेक्टर में डूबा कर्ज 10 साल के निचले स्तर पर है। इससे इनवेस्टमेंट में तेज वृद्धि की संभावना बनी है।

इंडिया में बड़ा पूंजीगत निवेश (Capital Expenditure) होने वाला है, जिसका पॉजिटिव असर कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर पड़ेगा। इसका फायदा इंडस्ट्रियल फाइनेंशियल कंपनियों के शेयरों को होगा। ग्लोबल इनवेस्टमेंट बैंक Morgan Stanley ने यह बात कही है।

मॉर्गन स्टेनली ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कॉर्पोरेट और फाइनेंशियल सेक्टर की बैलेंसशीट में सुधार देखने को मिला है। उधर, सरकार रिफॉर्म पर जोर दे रही है। इसका पॉजिटिव असर इकोनॉमी पर पड़ेगा।

इंडिया में कॉर्पोरेट डेट और जीडीपी का रेशियो 15 साल के निचले स्तर पर आ गया है। बैंकिंग सेक्टर में डूबा कर्ज 10 साल के निचले स्तर पर है। इससे इनवेस्टमेंट में तेज वृद्धि की संभावना बनी है। इसका पॉजिटिव असर सप्लाई पर पड़ेगा। इसमें मजबूती आएगी।


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इस रिपोर्ट में कहा गया है, "हमारा मानना है कि इंडिया में पूंजीगत निवश की नई साइकिल शुरू होगी। इसका पॉजिटिव असर ग्रोथ को बढ़ाना देने वाले फैक्टर्स पर पड़ेगा। हमारा मानना है कि ग्रोथ की नई साइकिल को सप्लाई साइड और डिमांड साइड फैक्टर्स से सपोर्ट मिलेगा।"

प्राइवेट सेक्टर में पूंजीगत निवेश फिर से बढ़ने की कई वजह नजरें आती हैं। इनमें डिमांड और कैपेसिटी यूटिलाइजेशन में साइक्लिकल इम्प्रूवमेंट, कॉर्पोरेट औरर फाइनेंशियल सेक्टर की बेहतर बैलेंसशीट, कॉर्पोरेट टैक्स रेट में कमी जैसे स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स, पीएलआई स्कीम और इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन डायवर्सिफिकेशन पर फोकस शामिल है।

कॉर्पोरेट सेक्टर अपनी बैलेंसशीट में कर्ज घटाने पर जोर दे रहा है। इससे इस फाइनेंशियल ईयर में कॉर्पोरेट रेट-जीडीपी रेशिया के 47 फीसदी पर आ जाने की संभावना है। फाइनेंशियल ईयर 2015 में यह 62 फीसदी था।

फाइनेंशियल ईयर 2009-10 से 2017-18 के दौरान बैंकिंग सेक्टर की बैलैंसशीट की पॉजिशन पर दबाव रहा, क्योंकि डूबे कर्ज में काफी इजाफा हुआ। यह फाइनेंशियल ईयर 2017-18 में 12.4 फीसदी के उच्च स्तर पर पहुंच गया था।

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में कहा गया है कि डूबा कर्ज अब घटकर 10 साल के निचले स्तर पर आ गया है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में यह 7.5 फीसदी था। इससे बैलेंशीट में सुधार का संकेत मिलता है। इससे पूंजीगत निवेश की साइकिल को सपोर्ट मिलेगा।

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