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हॉस्पिटल में इलाज के बढ़ते खर्च पर नकेल कसने की तैयारी, संसदीय समिति ने की ये सिफारिश

सर्जरी के लिए पैकेज कीमतें तय करने की भी सिफारिश की गई है। हॉस्पिटल को इलाज से पहले पूरा अनुमानित खर्च बताना होगा। अनावश्यक बिलिंग पर रोकथाम के लिए यह कदम उठाया गया है। इस समिति ने अपनी सिफारिश में कहा है कि मेडिकल डिवाइस की लैंडिंग कॉस्ट और MRP का गैप 20 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Aug 11, 2026 पर 1:55 PM
हॉस्पिटल में इलाज के बढ़ते खर्च पर नकेल कसने की तैयारी, संसदीय समिति ने की ये सिफारिश
जैसे-जैसे आप अपर कैटेगरी के रूम में जाते हैं, हॉस्पिटल में इलाज का खर्च और बाकी खर्च भी उसी अनुपात में बढ़ते जाते हैं। अब इस पर पाबंदी लगाने की सिफारिश की गई है

हॉस्पिटल में इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है और इसी को लेकर अब संसदीय समिति ने हॉस्पिटल के कमरे के किराए पर कैपिंग की सिफारिश की है। इस पर पूरी डीटेल्स बताते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर लक्ष्मण ने कहा कि हेल्थ पर बनी संसदीय समिति ने हॉस्पिटल कमरे के किराए पर कैपिंग की सिफारिश की है। अगर ये सिफारिश मान ली जाती है तो फीस 3-स्टार होटल के कमरे से मंहगी नहीं होगी। संसदीय समिति की 3-स्टार कैपिंग की सिफारिश की है।

सर्जरी के लिए पैकेज कीमतें तय करने की भी सिफारिश की गई है। हॉस्पिटल को इलाज से पहले पूरा अनुमानित खर्च बताना होगा। अनावश्यक बिलिंग पर रोकथाम के लिए यह कदम उठाया गया है। इस समिति ने अपनी सिफारिश में कहा है कि मेडिकल डिवाइस की लैंडिंग कॉस्ट और MRP का गैप 20 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। दवाओं पर भी लैंडिंग कॉस्ट और MRP का गैप 20% तक लिमिटेड करने की सिफारिश की गई है। कार्डियक स्टेंट की तरह पेरिफेरल स्टेंट और ड्रग-एल्यूटिंग बैलून की कीमतें भी तर्कसंगत बनाने की सिफारिश की गई है। इस खबर का असर अपोलो,फोर्टिस,मैक्स हेल्थ, मेदांता, KIMS और हेल्थ ग्लोबल जैसे शेयरों पर दिख सकता है।

संसद की स्थाई समिति की इस रिपोर्ट में इस बात पर फोकस किया गया है कि कैसे इलाज के खर्चे को कम किया जाए। उस रिपोर्ट को जब पूरा पढ़ेंगे तो उसमें सबसे ज्यादा जिन मुद्दों पर फोकस किया गया है उनमें से एक मुद्दा है प्राइवेट हॉस्पिटल की ओर से लिया जाने वाला रूम रेंट। रिपोर्ट के पेज नंबर 160 से लेके 172 तक यानी करीब 12 पन्ने में सिर्फ और सिर्फ रूम रेंट का जिक्र है। अलग-अलग प्राइवेट हॉस्पिटल की तरफ से अभी जो रूम रेंट चार्ज किए जाते हैं उनका अध्ययन किया गया और फिर ये सिफारिश की गई है कि प्राइवेट हॉस्पिटल खासतौर से महानगरों में जो रूम रेंट चार्ज करते हैं वह उनके आसपास स्थित 3 स्टार होटल के रूम रेंट से ज्यादा नहीं होना चाहिए। प्राइवेट हॉस्पिटल इससे ज्यादा रूम रेंट किसी भी कीमत पर ना वसूले। इस नियम को तुरंत लागू करना चाहिए। हालांकि उसमें एक राहत यह दी गई है कि अधिकतम रूम में डॉक्टर विजिट चार्ज लॉन्ड्री खर्चे शामिल नहीं होंगे।

एक और बात यह है कि जैसे-जैसे आप अपर कैटेगरी के रूम में जाते हैं, हॉस्पिटल में इलाज का खर्च और बाकी खर्च भी उसी अनुपात में बढ़ते जाते हैं। अब इस पर पाबंदी लगाने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा हॉस्पिटल जो मेडिकल डिवाइसेस या इक्विपमेंट मरीज के इलाज में लगाते हैं उन पर हॉस्पिटल में एमआरपी बहुत ज्यादा होता है। जबकि,इनकी लैंडिंग कॉस्ट काफी कम होती है। इसको ध्यान में रखते हुए इस बात की सिफारिश की गई है कि हॉस्पिटल इन मेडिकल डिवाइसेस या इक्विपमेंट को जिस भाव पर खरीदते हैं और पेशेंट को जिस भाव पर बिल भेजते हैं उसमें 20 फीसदी से ज्यादा का अंतर नहीं होना चाहिए। बताते चलें कि यह अभी महज एक सिफारिश है। इसको लागू होने में लंबा वक्त लग सकता है। यह लागू होगा भी कि नहीं यह भी कहना अभी मुश्किल है।

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