मार्केट करेक्शन में भी मल्टीबैगर्स की पहचान की जा सकती है, एक्सपर्ट्स की राय

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बुल रन के बाद मार्केट में करेक्शन आता है। 2008 में मार्केट क्रैश के दौरान निफ्टी 55 फीसदी टूट गया था। स्मॉलकैप स्टॉक्स 75 फीसदी तक क्रैश कर गए थे। उसके बाद मार्केट में रिकवरी आई थी

अपडेटेड Feb 15, 2025 पर 5:25 PM
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मार्केट में अभी जो करेक्शन आया है उसकी वजह कोई क्राइसिस नहीं बल्कि ज्यादा वैल्यूएशन है।

मार्केट में जारी गिरावट को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। करेक्शन के बीच भी मल्टीबैगर्स की पहचान के मौके होते हैं। इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स ने एक प्रोग्राम में यह राय व्यक्त की। पीएमएस एआईएफ वर्ल्ड का यह प्रोग्राम 15 फरवरी को आयोजित हुआ। इसमें सेजवन इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के फाउंडिंग पार्टनर और सीआईओ समित वर्तक ने कहा कि हर ढाई से 4 साल पर पीक पर पहुंच जाता है। यह बुल मार्केट का संकेत होता है। उसके बाद मार्केट में रिस्क बढ़ जाता है। उसके बाद मार्केट में गिरावट आती है।

2008 में भी मार्केट में आई थी बड़ी गिरावट

उन्होंने 2008 के मार्केट क्रैश का उदाहरण दिया, जब Nifty में 55 फीसदी गिरावट आई थी, जबकि स्मॉलकैप स्टॉक्स पीक से 75 फीसदी तक टूट गए थे। उन्होंने कहा कि मार्केट में अभी जो करेक्शन आया है उसकी वजह कोई क्राइसिस नहीं बल्कि ज्यादा वैल्यूएशन है। अभी सिस्टम में कोई क्राइसिस नहीं है। कोई बैंकिंग इश्यू नहीं है। कॉर्पोरेट बैलेंसशीट काफी अच्छा है। कोविड की महामारी से मार्केट करीब 4 गुना चढ़ चुका है। खासकर स्मॉलकैप और मिडकैप में ज्यादा तेजी आई थी। ऐसे में करेक्शन जरूरी हो जाता है।


सही स्टॉक के सेलेक्शन पर फोकस

उन्होंने कहा कि ऐसे करेक्शन के वक्त इनवेस्टर्स का फोकस सही कंपनियों को सेलेक्ट करने पर होना चाहिए। लेकिन, मुश्किल यह है कि इनवेस्टर्स एक स्टॉक को खरीदते और दूसरे स्टॉक को बेचते रहते हैं। उन्होंने निवेशकों को ज्यादा स्ट्रटेजिक एप्रोच अपनाने की सलाह दी। नाइन रिवर्स कैपिटल के एमडी और सीआईओ संदीप डागा ने कहा कि हम ऐसे वक्त में हैं, जिसमें ओवरवैल्यूएशन की स्थिति है। खासकर कई स्मॉलकैप स्टॉक्स की कीमतें काफी ज्यादा वैल्यूएशन पर चल रही थी। इसलिए यह गिरावट लंबे समय से जारी बुल मार्केट के बीच एक मौका है। निवेशक अट्रैक्टिव वैल्यूएशन पर ज्यादा संभावना वाले सेक्टर और स्टॉक्स में निवेश कर सकते हैं।

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इन सेक्टर में निवेश के मौके

डागा का मानना है कि इनवेस्टर्स प्रिसिजन इंजीनियरिंग और हेल्थकेयर स्टॉक्स में निवेश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपनियां ऑटोमोटिव और नॉन-ऑटोमोटिव सेक्टर को सेवाएं देती हैं। इंडिया और विदेश दोनों में मौके दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई कंपनियों के आईपीओ आ रहे हैं। आपको स्टॉक को सेलेक्ट करना है। वैल्यूएशन पर गौर करना है। कई स्टॉक्स की वैल्यूएशन काफी अट्रैक्टिव लेवल पर आ गई हैं।

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