Muthoot Finance share: भारत की सबसे बड़ी गोल्ड फाइनेंसर मुथूट फाइनेंस के शेयरों में आज 18 नवंबर को करीब 8 फीसदी से अधिक की मजबूत तेजी देखी गई। इस समय यह स्टॉक BSE पर 7.24 फीसदी की बढ़त के साथ 1906.35 रुपये के भाव पर ट्रेड कर रहा है। दरअसल, कंपनी ने FY25 की दूसरी तिमाही में मजबूत नतीजे जारी किए हैं। इसके साथ ही मुथूट फाइनेंस का AUM बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया है, जो कि कंपनी के लिए बड़ी उपलब्धि है। अन-सिक्योर्ड लेडिंग पर RBI के प्रतिबंधों के बीच गोल्ड लोन की मांग में भारी बढ़ोतरी हुई है।
Muthoot Finance को गोल्ड लोन डिमांड में तेजी से फायदा
मुथूट फाइनेंस का AUM सालाना आधार पर 31 फीसदी बढ़कर 1.04 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसका गोल्ड लोन AUM भी 86,164 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड हाई पर है। कंपनी के मजबूत कलेक्शन के चलते यह सुनिश्चित हुआ है कि अधिकांश गोल्ड लोन पहले छह महीनों के भीतर चुकाए जा सकें। जॉर्ज एलेग्जेंडर मुथूट ने सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में बताया कि केंद्रीय बैंक द्वारा अन-सिक्योर्ड लेडिंग को लेकर नियमों को सख्त करने के बाद MFI को गोल्ड लोन में तेजी देखने को मिल रही है।
Muthoot Finance पर ब्रोकरेज की राय
ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने 2000 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ मुथूट फाइनेंस के शेयरों पर आउटपरफॉर्म कॉल को बनाए रखा है। इसके अलावा, मॉर्गन स्टेनली ने लेंडर पर अपने लेटेस्ट नोट में कहा कि MFI के लिए माहौल बेहतर हो रहा है।
Muthoot Finance के तिमाही नतीजे
जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 26.3 फीसदी बढ़ गया है। तिमाही के दौरान कंपनी का मुनाफा पिछले वर्ष की समान अवधि के 991 करोड़ रुपये से बढ़कर 1251.1 करोड़ रुपये हो गया।
सितंबर तिमाही में नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) पिछले साल की समान तिमाही के ₹1858.4 करोड़ से 35.5 फीसदी बढ़कर ₹2518.1 करोड़ हो गई। जुलाई-सितंबर की अवधि के दौरान कंपनी का कुल रेवेन्यू बढ़कर ₹4117.4 करोड़ हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में ₹3,059.67 करोड़ था। मुथूट फाइनेंस के बोर्ड ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी कंपनी मुथूट मनी में ₹500 करोड़ की अतिरिक्त इक्विटी निवेश को हरी झंडी दे दी है।
वित्त वर्ष 25 की पहली छमाही में नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) का शुद्ध लाभ 17.6 फीसदी बढ़कर ₹2,517 करोड़ हो गया, जो वित्त वर्ष 24 की पहली छमाही में ₹2140 करोड़ था। इस अवधि में रेवेन्यू में 33 फीसदी की वृद्धि हुई, जो पिछले वर्ष के ₹7,077.8 करोड़ के मुकाबले बढ़कर कुल ₹9,402.6 करोड़ रहा।
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