लगातार दूसरे महीने म्यूचुअल फंड्स ने घटाया प्राइवेट बैंकों पर दांव, आखिर क्यों?

पिछले महीने जून में म्यूचुअल फंड्स के पोर्टफोलियो में प्राइवेट बैंकों का वेटेज कम हुआ। यह लगातार दूसरे महीने ऐसा हुआ है। इससे पहले अप्रैल महीने मे म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में प्राइवेट बैंकों का वेटेज रिकॉर्ड हाई पर था। जानिए ऐसा क्यों हुआ? क्या प्राइवेट बैंकों की स्थिति बिगड़ रही है? आगे क्या स्ट्रैटेजी अपनाने वाले हैं फंड मैनेजर्स?

अपडेटेड Jul 23, 2025 पर 2:19 PM
करीब तीन महीने पहले अप्रैल में घरेलू म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में प्राइवेट बैंकों की हिस्सेदारी रिकॉर्ड हाई पर थी। हालांकि इसके बाद से लगातार दो महीने प्राइवेट बैंकों का वेटेज कम हुआ है।

करीब तीन महीने पहले अप्रैल में घरेलू म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में प्राइवेट बैंकों की हिस्सेदारी रिकॉर्ड हाई पर थी। हालांकि इसके बाद से लगातार दो महीने प्राइवेट बैंकों का वेटेज कम हुआ है। जून महीने में म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में प्राइवेट बैंकों का वेटेज गिरकर 17.9% पर आ गया। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) के फंड फोलियो रिपोर्ट के मुताबिक मई महीने में म्यूचुअल फंड्स के पोर्टफोलियो में प्राइवेट बैंकों का वेटेज 18.4% और अप्रैल महीने में 18.9% पर थी। हालांकि अभी भी पिछले साल के जून के मुकाबले 70 बेसिस प्वाइंट्स अधिक ही है। वहीं पीएसयू बैंक की बात करें तो अधिकतर एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में इनका वेटेज या तो स्थिर रहा या घटा है।

एलारा सिक्योरिटीज की घरेलू लिक्विडिटी ट्रैकर के मुताबिक कई बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) ने जून में प्राइवेट बैंकों में अपना एक्सपोजर कम किया है। इस सेक्टर पर एचडीएफसी एएमसी 8.4% ओवरवेट था जबकि क्वांट 7.7% ने अंडरवेट किया। ICICI प्रूडेंशियल, कोटक, एक्सिस और निप्पॉन सहित अन्य फंड हाउस भी अंडरवेट रहे जबकि फ्रैंकलिन टेम्पलटन और मिरेए ने दांव थोड़ा बढ़ाया।

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आखिर क्यों घटा प्राइवेट बैंकों का वेटेज और आगे क्या है रुझान?

फंड मैनेजर्स के मुताबिक म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में प्राइवेट बैंकों के वेटेज में गिरावट की वजह फंडामेंटल की बजाय शॉर्ट टर्म में अपने फंड को कहीं और लगाने की स्ट्रैटेजी है। स्थिर एसेट क्वालिटी, लिक्विडिटी में सुधार और बेहतर वैल्यूएशन के चलते लॉन्ग टर्म के लिए यह उनकी पसंद बनी हुई है। फंड मैनेजर का मानना है कि रेपो रेट में कटौती के चलते शॉर्ट टर्म में नेट इंटेरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि फंड मैनेजर्स को अभी भी बैंकों का वैल्यूएशन आकर्षक दिख रहा है।

कोटक महिंद्रा एएमसी की सीनियर फंड मैनेजर और प्रमुख (इक्विटी रिसर्च) शिबानी सिरकार कुरियन (Shibani Sircar Kurian) का कहना है कि इस तिमाही और अगली तिमाही मार्जिन दबाव में रह सकते हैं। क्वांटम म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर क्रिस्टी मथाई (Christy Mathai) का भी मानना है कि फ्लोटिंग दरें घटने से अगले दो-तीन तिमाहियों में मार्जिन पर असर दिखेगा।

अब आगे की बात करें तो शिबानी का कहना है कि कम लागत वाली फंडिंग के फायदे जल्द सामने आएंगे। उनका कहना है कि प्राइवेट बैंक का लोन और डिपॉजिट, दोनों में दबदबा बढ़ रहा है। शिबानी के मुताबिक ब्याज की कम दर और क्रेडिट की सुधरती ग्रोथ से वित्त वर्ष 2027 बैंकों के लिए काफी मजबूत साल होगा। शिबानी का कहना है कि एसेट क्वालिटी स्थिर रही है जिससे क्रेडिट कॉस्ट को नियंत्रण में रखने में मदद मिलेगी। वहीं क्रिस्टी मथाई का कहना है कि फ्लोटिंग रेट के चलते मार्जिन पर जो असर दिखेगा, वह अस्थायी है। क्रिस्टी दो से तीन साल या उससे अधिक समय के लिए इस सेक्टर को लेकर पॉजिटिव हैं।

कैसी है बैंकों की कारोबारी सेहत?

पिछले महीने जून में म्यूचुअल फंड्स के पोर्टफोलियो में बैंकिंग स्टॉक्स का वेटेज कम हुआ लेकिन इनकी चमक स्थिर रही। निफ्टी बैंक इंडेक्स ग्रीन जोन में बंद हुआ। हालांकि तिमाही कारोबारी नतीजे की बात करें तो बैंकों की शुरुआती अर्निंग्स रिपोर्ट मिली-जुली रही। मनीकंट्रोल की एनालिसिस के मुताबिक बैंकों की नेट इंटेरेस्ट इनकम (NII) सालाना आधार पर जून तिमाही में सिर्फ 4.3% बढ़ी जो कई तिमाही में सबसे सुस्त चाल रही। तिमाही आधार पर इसमें 1.3% की गिरावट आई। हालांकि ऑपरेटिंग प्रॉफिट सालाना आधार पर 24% और तिमाही आधार पर 13% बढ़ गया जोकि सात तिमाही में सबसे तेज ग्रोथ रही। ऑपरेटिंग प्रॉफिट को लागत पर बेहतर नियंत्रण और लीवरेज से सपोर्ट मिला।

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