इनवेस्टमेंट में डायवर्सिफिकेशन (Diversification) जरूरी है। इसके बारे में बात तो हर निवेशक करता है, लेकिन कुछ ही इस पर अमल करते हैं। इसकी वजह यह है कि लोग इसके महत्व को ठीक तरह से नहीं समझते। डायवर्सिफिकेशन का मतलब एक जगह पूरा पैसा लगाने की जगह उसे कई जगह थोड़ा-थोड़ा लगाना है। डायवर्सिफिकेशन निवेशक को रिस्क (Risk) घटाने में हेल्प करता है।
इसे एक उदाहरण की मदद से आसानी से समझा जा सकता है। अगर आपको 1000 रुपये का निवेश करना है तो आप उसे एक ही कंपनी के शेयर में लगाने के बजाय पांच अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में निवेश कर सकते हैं। ऐसे में अगर एक कंपनी या दो कंपनियों का परफॉर्मेंस खराब होता है तो भी आपका पूरा पैसा नहीं डूबेगा, क्योंकि बाकी तीन कंपनियों का बेहतर परफॉर्मेंस आपके पैसे को पूरी तरह डूबने से बचा लेगा।
दूसरी बात यह कि आपको एक ही सेक्टर की पांच कंपनियों के बजाय अलग-अलग सेक्टर की पांच कंपनियों में निवेश करना होगा। अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों में निवेश का फायदा यह है कि अगर किसी एक सेक्टर का प्रदर्शन खराब होता है तो बाकी सेक्टर के अच्छे प्रदर्शन के चलते आपके पोर्टफोलियो पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
कई लोग डायवर्सिफिकेशन के लिए म्यूचुअल फंड हाउसेज की अलग-अलग स्कीमों में निवेश करते हैं। उन्हें लगता है कि अलग-अलग स्कीमों में निवेश करने से उनका पैसा अलग-अलग सेक्टर और अलग-अलग कंपनियों में लगाया जाएगा। इससे उनका पोर्टफोलियो अच्छी तरह से डायवर्सिफायड रहेगा। लेकिन, यह जरूरी नहीं है।
इसे हम एक उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं। यहां हम एक्सिस ब्लूचिप फंड और एक्सिस फ्लेक्सीकैप फंड की बात करते हैं। दोनों फंडों का संबंध अलग-अलग कैटेगरी से है। लेकिन, दोनों के पोर्टफोलियो में 92 फीसदी समानता है। अगर दोनों स्कीमों के स्टॉक पोर्टफोलियो को आप देखेंगे तो पाएंगे कि 28 ऐसी कंपनियों के शेयर हैं, जिसमें दोनों ने निवेश किया है। इसका मतलब साफ है कि इन फंडों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करने से डायवर्सिफिकेशन का आपका मकसद पूरा नहीं होगा।
इनवेस्टर को एक ही कैटेगरी की म्यूचुअल फंड की कई स्कीमों में निवेश नहीं करना चाहिए। खासकर लार्जकैप फंड कैटेगरी में ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। सेबी के नियमों के अनुसार, लार्जकैप फंड के लिए अपने एसेट का कम से कम 80 फीसदी लार्जकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करना जरूरी है।
स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर 1 से लेकर 100 पायदान वाली कंपनियों को लार्जकैप कंपनियां माना जाता है। अगर आप निफ्टी 50 या सेंसेक्स को देखें तो ऐसी कई कंपनियां है दोनों ही सूचकांकों में आपको मिल जाएंगी। यही वजह है कि लार्जकैप स्कीमों के लिए इंडेक्स से ज्यादा रिटर्न देने में दिक्कत आती है।
अगर आप अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो को डायवर्सिफायड बनाना चाहते हैं तो आपको ऐसी स्कीमों को तलाशना होगा, जिन्होंने अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों में निवेश किया है। अगर आपके पोर्टफोलियो में पहले से ऐसी स्कीमें हैं तो जिन्होंने एक ही सेक्टर या एक ही जैसी कंपनियों के शेयरों में निवेश किया है तो फिर आपको अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाय करने की कोशिश करनी होगी।