क्या आप जानते हैं Rent Agreement क्यों 11 महीनों के लिए बनाए जाते हैं

Rent Agreement घर के मालिक और किराएदार के बीच एक लिखित समझौता होता है। इसमें घर लेने से जुड़ी शर्तें और दूसरी चीजें होती हैं। इसमें प्रॉपर्टी का पता, मंथली रेंट, सिक्योरिटी डिपॉजिट, प्रॉपर्टी के इस्तेमाल का मकसद और एग्रीमेंट की अवधि शामिल होती है

अपडेटेड Aug 24, 2022 पर 2:51 PM
Rent Agreement पर मकान मालिक और किराएदार के हस्ताक्षर हो जाने के बाद इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है।

अगर आप किराया के घर में रहते हैं या रह चुके हैं तो आप रेंट एंग्रीमेंट के बारे में जरूर जानते होंगे। आपने इस पर हस्ताक्षर भी किया होगा। इसे लीज एग्रीमेंट भी कहा जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि रेंट एग्रीमेंट क्यों 11 महीनों के लिए बनाया जाता है। आइए इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

पहले यह जान लेते हैं कि रेंट एग्रीमेंट में होता क्या है। दरअसल यह घर के मालिक और किराएदार के बीच एक लिखित समझौता होता है। इसमें घर लेने से जुड़ी शर्तें और दूसरी चीजें शामिल होती हैं। इसमें प्रॉपर्टी का पता, मंथली रेंट, सिक्योरिटी डिपॉजिट, प्रॉपर्टी के इस्तेमाल का मकसद और एग्रीमेंट की अवधि शामिल होती है।

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घर को किराया पर लेने से पहले आप मकान मालिक के साथ शर्तों के बारे में बातचीत कर सकते हैं। इसे दोनों की सहमति से तय किया जा सकता है। लेकिन, एक बार इस पर मकान मालिक और किराएदार के हस्ताक्षर हो जाने के बाद इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि रेंट एग्रीमेंट में उन शर्तों का भी जिक्र होता है, जिनकी वजह से एग्रीमेंट टर्मिनेट हो सकता है।

ज्यादातर रेंट एग्रीमेंट इसलिए 11 महीने के लिए बनाए जाते ताकि स्टैंप ड्यूटी और दूसरे तरह के चार्ज पर होने वाले खर्च को बचाया जा सके। रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के मुताबिक अगर किसी घर या प्रॉपर्टी को 11 महीने से ज्यादा अवधि के लिए किराए पर लिया जाता है तो लीज एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन जरूरी है।

रेंट एग्रीमेंट को रजिस्टर कराने पर स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस चुकानी पड़ती है। इस पर काफी खर्च आता है। इस खर्च से बचने के लिए मकान मालिक और किराएदार आपसी सहमति से रेंट एंग्रीमेंट को रजिस्टर नहीं कराने का फैसला करते हैं। इससे दोनों का पैसा बचता है।

अगर मकान मालिक या किराएदार रेंट एग्रीमेंट को रजिस्टर कराने का फैसला करता है तो स्टैंड ड्यूटी का अमाउंट रेंट और इस बात पर निर्भर करेगा कि यह एग्रीमेंट कितने समय के लिए बनाया जाता है। इसका मतलब है कि रेंट एग्रीमेंट की अवधि जितनी लंबी होगी, स्टैंप ड्यूटी का अमाउंट उतना ही ज्यादा होगा।

ज्यादातर मकाम मालिक और किराएदर रेंट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन कराने की जगह उसे नोटराइज्ड कराना पंसद करते हैं। इस पर काफी कम खर्च आता है। दूसरी बात यह है कि कम अवधि का होने के चलते मकान मालिक और किराएदार दोनों के लिए एग्रीमेंट की शर्तों में बदलाव करना आसान होता है।

आपको यह समझ लेना होगा कि कानून के लिहाज से रेंट एंग्रीमेंट की ज्यादा वैल्यू नहीं होती है। इसे कोर्ट में बतौर साक्ष्य पेश नहीं किया जा सकता। इसलिए कोई किराएदार रेंट एग्रीमेंट की शर्तों को लेकर मकान मालिक के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटा सकता। इसके लिए रेंट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन जरूरी है।

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