Gold Silver price: ज्यादा यील्ड के दबाव में सोना फिसला, चांदी $67.30 के करीब पहुंची

Gold Silver price: सोमवार (21 सितंबर) को एशियाई बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई। कीमतों में यह गिरावट अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी के कारण देखने को मिली

अपडेटेड Sep 21, 2026 पर 7:53 AM
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सोने में यह हलचल अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण है।

Gold Silver price: सोमवार (21 सितंबर) को एशियाई बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई। कीमतों में यह गिरावट अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी के कारण देखने को मिली। वहीं दूसरी तरफ चांदी ने अपनी बढ़त बनाए रखी और $67.30 प्रति औंस के करीब कारोबार किया।

शुरुआती कारोबार में COMEX पर खबर लिखे जाने तक सोना $4,416 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जो $8.90 या 0.20% कम था। कीमतें $4,422.10 (अधिकतम) और $4,396.40 (न्यूनतम) प्रति औंस के बीच रहीं।

इस बीच, COMEX चांदी $67.270 प्रति औंस पर थी, जिसमें $0.121 या 0.18% की बढ़त हुई। यह $66.550 और $67.555 प्रति औंस के बीच रही।


सोने में यह हलचल अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण है। हाल के सत्रों में बेंचमार्क दो-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि बाजार फेडरल रिजर्व के हालिया निर्देशों के बाद अमेरिकी मौद्रिक नीति की दिशा का फिर से आकलन कर रहे हैं। ऊंची यील्ड सोने पर दबाव डाल सकती है क्योंकि इस धातु से कोई ब्याज आय नहीं होती है।

वहीं प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर भी मजबूत बना रहा, जिससे बुलियन (सोना-चांदी) पर दबाव बढ़ा। निवेशक अब ब्याज दरों और कीमती धातुओं की मांग के बारे में संकेत पाने के लिए नए आर्थिक आंकड़ों पर नजर रख रहे हैं, जिनमें मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस PMI रीडिंग, अमेरिकी हाउसिंग डेटा, ड्यूरेबल गुड्स ऑर्डर और कंज्यूमर सेंटीमेंट शामिल हैं।

किस कारण पड़ रहा दबाव

अमेरिकी यील्ड और फेड का नजरिया: बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी सोने के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई है। बाजार यह आकलन कर रहे हैं कि अमेरिकी ब्याज दरें कितने समय तक ऊंचे स्तर पर रह सकती हैं, जिससे बिना-ब्याज वाली संपत्तियों की मांग प्रभावित हो सकती है।

डॉलर की चाल: मजबूत अमेरिकी डॉलर, डॉलर में कीमत तय होने वाली कमोडिटीज (जैसे सोना और चांदी) को दूसरी मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए महंगा बना सकता है, जिससे मांग सीमित हो सकती है।

भू-राजनीतिक जोखिम: पश्चिम एशिया में हो रही घटनाएं बुलियन के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई हैं। किसी भी तनाव के बढ़ने से 'सेफ-हेवन' (सुरक्षित निवेश) के तौर पर मांग बढ़ सकती है, हालांकि यील्ड और डॉलर में उतार-चढ़ाव इसके असर को कम कर सकते हैं।

सोने और चांदी का आउटलुक

हालांकि पिछले हफ़्ते सोने की कीमतों में बढ़त देखी गई। COMEX में दिसंबर का सोना $4,424.90 प्रति औंस पर बंद हुआ, जबकि चांदी की कीमतों में लगभग 3% की बढ़ोतरी हुई और यह $67.15 प्रति औंस पर बंद हुई।

MCX पर, अक्टूबर के सोने के फ़्यूचर्स पिछले हफ्ते ₹1,597 यानी 1.04% बढ़कर ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम हो गए, जबकि चांदी के फ़्यूचर्स में लगभग 3% की बढ़त हुई और चांदी ₹2.41 लाख प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।

जानकारों का मानना ​​है कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा और कीमतें एक दायरे में ही रहेंगी, क्योंकि बाजार डॉलर, बॉन्ड यील्ड, जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं। अभी मुख्य ध्यान इस बात पर रहेगा कि क्या ज़्यादा यील्ड और मजबूत डॉलर सोने-चांदी की कीमतों को बढ़ने से रोकते रहेंगे, या फिर जियोपॉलिटिकल जोखिम और निवेश की मांग उन्हें सहारा देगी।

 

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