म्यूचुअल फंड स्कीमों के एक्सपेंस रेशियों (Expense Ratio) में आने वाले समय में कमी देखने को मिल सकती है। मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) कुछ बड़े म्यूचुअल फंड (MF) हाउसों को अधिक एक्सपेंस रेशियो वसूलने से रोकने के बारे में विचार कर रहा है। SEBI ने दिसंबर 2022 में बताया कि म्यूचुअल फंड हाउस अपने यूनिटहोल्डरों से जिन खर्चों के लिए फीस वसूलते हैं, उसने उन पर फिर से विचार करने के लिए एक इंटरनल स्टडी शुरू की है। मनीकंट्रोल को अब पता चला है कि सेबी फंड हाउसों के कुल इक्विटी एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) के आधार पर सीमा तय कर सकता है और फंड हाउसों को उसी के आधार पर एक्सपेंस रेशियो वसूलना होगा।
उदाहरण के लिए, अगर किसी फंड हाउस का इवक्विटी AUM 50,000 करोड़ रुपये का है, तो फंड हाउस को मौजूदा स्कीमों के साथ-साथ नई स्कीमों के लिए मौजूदा नियमों की तुलना में कम एक्सपेंस रेशियो वाला बनाना होगा। मनीकंट्रोल को पता चला है कि ऐसे फंड हाउसों के लिए नया एक्सपेंस रेशियो 1.25 फीसदी या 1.50 फीसदी हो सकता है।
ऐसा लगता होता है कि SEBI ने म्यूचुअल फंड स्कीमों में पैसे आने के तरीकों से जुड़े आंकड़ों को अध्ययन किया है। सेबी ने पाया कि जब कोई फंड हाउस, खासतौर से बड़े और मझोले साइज वाले म्यूचुअल फंड कोई नई स्कीम लॉन्च करते हैं, तो कुछ डिस्ट्रीब्यूटर अपने निवेशकों का पैसा मौजूदा योजनाओं से निकालकर नई योजनाओं में डालते हैं।
इससे डिस्ट्रीब्यूटरों को अधिक कमीशन पाने में मदद मिलती है क्योंकि आमतौर पर नई लॉन्च होने वाली योजनाओं में डिस्ट्रीब्यूटर को अधिक फीस का भुगतान होता है। SEBI अब इसे बदलने की तैयारी कर रहा है। इससे अब बड़े फंड हाउसों को अपने नई और कम AUM वाली स्कीमों के लिए एक्सपेंस रेशियो घटाने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
SEBI के मौजूदा नियमों के मुताबिक, 500 करोड़ रुपये तक के AUM वाली स्कीमों पर टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) 2.25 फीसदी तक चार्ज किया जा सकता है। जैसे-जैसे योजना का साइज बढ़ता है, इसका TER घटता जाता है। नीचे दिए गए टेबल में आप देख सकते हैं कि एक म्यूचुअल फंड आपसे कितना रूपया चार्ज कर सकता है?