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SEBI ने म्यूुचुअल फंड निवेशकों के लिए KYC प्रोसेस को आसान बनाया, NRIs के लिए भी बड़ी राहत

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने म्यूचुअल फंड इनवेस्टर्स को राहत दी है। इसके तहत, सेबी ने केवाईसी (KYC) प्रोसेस को आसान बनाने के लिए उपाय किए हैं। इन उपायों से खास तौर पर उन निवेशकों को मदद मिलेगी जिनका KYC स्टेटस 'होल्ड' पर है। साथ ही, NRI इनवेस्टर्स को भी इसका फायदा मिलेगा। सेबी के इन उपायों के क्या मायने हैं,हम इस बारे में यहां विस्तार से बता रहे हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड May 17, 2024 पर 4:06 PM
SEBI ने म्यूुचुअल फंड निवेशकों के लिए KYC प्रोसेस को आसान बनाया, NRIs के लिए भी बड़ी राहत
KYC वह प्रोसेस है, जिसके जरिए बैंक, म्यूचुअल फंड, ब्रोकरेज फर्म आदि निवेशक के ट्रांजेक्शन शुरू करने से पहले उसकी आइडेंटिटी को वेरिफाय करते हैं।

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने म्यूचुअल फंड इनवेस्टर्स को राहत दी है। इसके तहत, सेबी ने केवाईसी (KYC) प्रोसेस को आसान बनाने के लिए उपाय किए हैं। इन उपायों से खास तौर पर उन निवेशकों को मदद मिलेगी जिनका KYC स्टेटस 'होल्ड' पर है। साथ ही, NRI इनवेस्टर्स को भी इसका फायदा मिलेगा। सेबी के इन उपायों के क्या मायने हैं,हम इस बारे में यहां विस्तार से बता रहे हैं।

पैन-आधार लिंकेज

सेबी ने कहा है कि अगर आपका पैन नंबर आपके आधार से लिंक्ड नहीं भी है, तो आपका KYC खारिज नहीं होगा और न ही इसे 'होल्ड' पर रखा जाएगा, बशर्ते आपका नाम, पैन, ईमेल एड्रेस या मोबाइल नंबर वैलिड हो। इसका मतलब है कि पैन-आधार लिकेंज पेंडिंग रहने की वजह से जिन लोगों का KYC 'होल्ड' पर है, उनका स्टेटस बदलकर 'रजिस्टर्ड' हो जाएगा।

म्यूचुअल फंड KYC

अगर KYC स्टेटस 'रजिस्टर्ड' है, तो आप उन फ्रेश म्यूचुअल फंड्स में इनवेस्ट नहीं कर सकते हैं, जिनमें आपने पहले निवेश नहीं किया है। तमाम फंड हाउसों में निवेश करने के लिए आपके KYC का स्टेटस 'वैलिडेटेड' होना जरूरी है। KYC की चार कैटेगरी होती है:

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