मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने म्यूचुअल फंड निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए मंगलवार 28 दिसंबर को एक बड़ा कदम उठाया। इसके तहत म्यूचुअल फंडों के लिए किसी स्कीम को बंद करने से पहले यूनिटधारकों की सहमति लेना अनिवार्य कर दिया गया। SEBI के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की मंगलवार को हुई बैठक में यह फैसला किया गया।
SEBI ने एक बयान में कहा कि म्यूचुअल फंड के ट्रस्टी जब भी किसी योजना को बंद करने या निश्चित अवधि की योजना (क्लोज इंडेड स्कीम) की यूनिट को समय समय से पहले भुनाने का फैसला करेंगे, तो उनके लिए अनिवार्य रूप से यूनिटधारकों की सहमति लेने को फैसला किया गया है।
बयान के अनुसार, "ट्रस्टीज को साधारण बहुमत के आधार पर मौजूदा यूनिटधारकों की सहमति लेनी होगी। इसके लिए प्रति यूनिट एक वोट के आधार पर मतदान होगा। मतदान का रिजल्ट स्कीम समाप्त खत्म करने की सूचना जारी होने के 45 दिन के भीतर प्रकाशित करने की जरूरत होगी।"
SEBI ने कहा कि अगर ट्रस्टी ऐसा करने में विफल होते हैं, तो मतदान के रिजल्ट जारी होने की तारीख के दूसरे कारोबारी दिन से स्कीम कमर्शियल गतिविधियों के लिए खुली होनी चाहिए।
इसके अलावा SEBI ने म्यूचुअल फंड रेगुलेशन के अकाउंटिंग स्टैंडर्ड में भी संशोधन किया है। सेबी ने बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 से म्यूचुअल फंडों के लिए अब इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड (IND AS) का फॉलो करना अनिवार्य हो जाएगा।
इस बीच, KYC (नो योर कस्टमर) रजिस्ट्रेशन एजेंसियों (KRA) की भूमिका को बढ़ाने के लिए, SEBI ने उनके ‘सिस्टम’ पर अपलोड किए गए KYC रिकॉर्ड के रजिस्टर्ड इंटरमीडियरीज (RI) द्वारा स्वतंत्र सत्यापन को लेकर उनकी जिम्मेदारी तय करने का फैसला किया है।