शिड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों (एससीबी) का ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग असेट्स (एनपीए) मार्च, 2021 के अंत तक घटकर 7.3 फीसदी रह गया है, जो मार्च, 2020 के अंत में 8.2 फीसदी था। वहीं सितंबर, 2021 तक ग्रॉस एनपीए घटकर 6.9 फीसदी रह गया। आरबीआई ने ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया 2020-21 पर 28 दिसंबर को जारी अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस अवधि में एससीबी का रिटर्न ऑन असेट्स (आरओए) 0.2 फीसदी से बढ़कर 0.7 फीसदी हो गया, जिसे स्टेबल इनकम और खर्च में कमी से खासा सपोर्ट मिला।
रिपोर्ट में 2020-21 और 2021-22 के दौरान अभी तक को-ऑपरेटिव बैंकों और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस सहित पूरे बैंकिंग सेक्टर के प्रदर्शन के बारे में बताया गया है।
जरूरतमंद सेक्टरों को मिल रहा टारगेटेड सपोर्ट
रिपोर्ट कहती है कि कोविड-19 महामारी के चलते आरबीआई द्वारा किए गए नीतिगत कदमों 2021-22 में पूर्व निर्धारित अवधि खत्म होने के करीब हैं। नतीजतन कुछ लिक्विडिटी के उपाय समाप्त हो गए, वहीं नेट स्टेबल फंड रेश्यो (एनएसएफआर), बैंकों द्वारा डिविडेंड भुगतान पर रोक, कैपिटल कंजर्वेशन बफर की आखिरी किस्त को स्थगित करने सहित अन्य रेग्युलेटरी उपायों आगे बढ़ाने और फाइनेंसियल स्टैबिलिटी के जोखिम से बचने के लिए व्यवस्थित किया गया है। वहीं जरूरतमंद सेक्टरों को टारगेटेड सपोर्ट दिया जा रहा है।
आरबीआई की रिपोर्ट कहती है, “भले ही इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत नई इनसॉल्वेंसी की कार्रवाई को मार्च, 2021 तक एक साल के लिए सस्पेंड कर दिया गया था, लेकिन वसूली गई रकम के आधार पर यह वसूली का एक प्रमुख माध्यम बन गया है।”
बैंकों की बैलेंसशीट का साइज बढ़ा
2020-21 के दौरान, महामारी और आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती के बावजूद एससीबी की बैलेंसशीट का साइज बढ़ा है। 2021-22 में अभी तक, क्रेडिट ग्रोथ में रिकवरी के शुरुआती संकेत मिले हैं। आरबीआई ने कहा, सितंबर, 2021 के अंत तक डिपॉजिट में 10.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 11 फीसदी रहा था।