आजकल रीसेल प्रॉपर्टी खरीदते समय अक्सर ऐसा होता है कि घर पर पहले से होम लोन चल रहा होता है। कई लोग बिना पूरी जानकारी लिए जल्दबाजी में डील फाइनल कर देते हैं, लेकिन बाद में उन्हें कानूनी या पैसों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर थोड़ी सावधानी बरती जाए, तो लोन वाली प्रॉपर्टी खरीदना पूरी तरह सुरक्षित हो सकता है।
सबसे पहले जानें कितना लोन बाकी है?
घर पसंद आने के बाद सिर्फ प्रॉपर्टी देखकर फैसला न लें। सबसे पहले यह पता करें कि उस घर पर कितना लोन बाकी है और किस बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी से लोन लिया गया है। यह जानकारी आगे की प्रक्रिया को आसान बनाती है।
साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि प्रॉपर्टी पर किस तरह का मॉर्गेज है। क्योंकि लोन बंद होने और डॉक्यूमेंट वापस मिलने की प्रोसेस उसी पर निर्भर करती है।
छिपे हुए लोन या बकाया जरूर चेक करें
कई बार प्रॉपर्टी पर एक से ज्यादा लोन या कानूनी दावा भी हो सकता है। इससे बचने के लिए सब-रजिस्ट्रार ऑफिस से Encumbrance Certificate जरूर निकलवाएं। इससे पता चल जाएगा कि प्रॉपर्टी पर कोई और लोन या विवाद तो नहीं है। इसके अलावा CERSAI रिकॉर्ड भी चेक करना फायदेमंद माना जाता है। इससे ऐसे लोन की जानकारी मिल सकती है जो सामान्य दस्तावेजों में दिखाई नहीं देते।
सीधे मालिक को पैसे देने से बचें
एक्सपर्ट के मुताबिक सबसे बड़ी गलती यह होती है कि खरीदार सीधे सेलर को पैसा दे देता है और मान लेता है कि वह खुद लोन बंद कर देगा। ऐसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
सही तरीका यह है कि पेमेंट का एक हिस्सा सीधे उस बैंक को जाए जहां प्रॉपर्टी का लोन चल रहा है। लोन क्लोज होने के बाद बैंक NOC जारी करता है और असली डॉक्यूमेंट वापस देता है। उसके बाद ही मालिकाना हक ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
सभी डॉक्यूमेंट ध्यान से जांचें
क्योंकि असली प्रॉपर्टी पेपर्स बैंक के पास होते हैं, इसलिए पहले उनकी कॉपी देखकर जांच कर लेना जरूरी है। लोन खत्म होने के बाद यह सुनिश्चित करें कि सभी ओरिजिनल डॉक्यूमेंट सही तरीके से आपको मिल जाएं। इसके साथ प्रॉपर्टी की ओनरशीप चेन भी जांचें। यानी पहले मालिक से लेकर मौजूदा मालिक तक सभी रिकॉर्ड साफ और सही होने चाहिए।
डिफॉल्ट या कानूनी कार्रवाई की जांच भी जरूरी
अगर विक्रेता ने लंबे समय से लोन की EMI नहीं भरी है, तो बैंक उस प्रॉपर्टी पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकता है। कई मामलों में SARFAESI Act के तहत बैंक कब्जा लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर देता है। इसलिए बैंक से हाल का लोन स्टेटमेंट या लिखित वैरिफिकेशन जरूर लें कि अकाउंट नियमित चल रहा है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन वाली प्रॉपर्टी खरीदना गलत नहीं है, लेकिन बिना जांच के डील करना नुकसानदायक हो सकता है। थोड़ी सावधानी और सही डॉक्यूमेंट जांचने से खरीदार भविष्य की बड़ी परेशानी से बच सकता है।