8th Pay Commission: सैलरी-पेंशन-मेडिकल खर्च को लेकर हुई अहम बैठक, जानिये किन पर बनी सहमति?

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों की उम्मीदें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हर कर्मचारी जानना चाहता है कि इस बार उसकी सैलरी कितनी बढ़ेगी, पेंशन में क्या बदलाव होगा और क्या पुरानी पेंशन योजना (OPS) पर कोई राहत मिलेगी

अपडेटेड May 15, 2026 पर 4:19 PM
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8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों की उम्मीदें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों की उम्मीदें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हर कर्मचारी जानना चाहता है कि इस बार उसकी सैलरी कितनी बढ़ेगी, पेंशन में क्या बदलाव होगा और क्या पुरानी पेंशन योजना (OPS) पर कोई राहत मिलेगी। इसी बीच सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुई बड़ी बैठक में कर्मचारियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। 11 मई को नई दिल्ली में हुई नेशनल काउंसिल ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NCJCM) की बैठक में कर्मचारियों की यूनियनों ने सरकार के सामने सैलरी, पेंशन, प्रमोशन, मेडिकल सुविधा और नौकरी से जुड़े कई बड़े मुद्दे उठाए। बैठक की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने की।

इस बैठक में कर्मचारी संगठनों ने साफ कहा कि 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। यूनियनों ने न्यूनतम वेतन, फिटमेंट फैक्टर, भत्ते, प्रमोशन और पुरानी पेंशन योजना (OPS) जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

OPS को लेकर फिर उठी मांग


बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को लेकर हुई। कर्मचारी संगठनों ने कहा कि जिन पदों की भर्ती 22 दिसंबर 2003 से पहले निकली थी, उन कर्मचारियों को OPS का फायदा मिलना चाहिए। कर्मचारियों का कहना है कि नई पेंशन योजना (NPS) में रिटायरमेंट के बाद उतनी सुरक्षा नहीं मिलती जितनी OPS में मिलती थी।

मेडिकल खर्च को लेकर कर्मचारियों की चिंता

कर्मचारियों ने मेडिकल खर्च और CGHS सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि इलाज के दौरान कई खर्च ऐसे होते हैं जिनका पूरा पैसा वापस नहीं मिलता। यूनियनों ने मांग की कि कर्मचारियों के इलाज का पूरा खर्च सरकार को देना चाहिए।

इसके अलावा डेंटल इम्प्लांट, सुनने की मशीन, बच्चों की पढ़ाई और नए CGHS सेंटर खोलने की मांग भी रखी गई। पेंशनर्स के लिए मेडिकल अलाउंस बढ़ाकर 3,000 रुपये करने की मांग भी हुई।

प्रमोशन में देरी से नाराज कर्मचारी

बैठक में कई विभागों में प्रमोशन में हो रही देरी पर भी नाराजगी जताई गई। कर्मचारी संगठनों ने कहा कि कुछ कर्मचारियों को 3 से 5 साल तक प्रमोशन का इंतजार करना पड़ता है। इससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होता है।

आउटसोर्सिंग पर उठे सवाल

यूनियनों ने सरकार से कहा कि विभागों में कर्मचारियों की कमी बढ़ती जा रही है, लेकिन स्थायी भर्ती नहीं हो रही। उसकी जगह आउटसोर्स और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों पर ज्यादा निर्भरता बढ़ रही है। कर्मचारी संगठनों ने मांग की कि खाली पदों पर नियमित भर्ती हो और अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी किया जाए।

परिवार पेंशन पर हुई चर्चा

बैठक में परिवार पेंशन के नियमों में बदलाव की मांग भी उठी। यूनियनों ने कहा कि विधवा बहू को भी परिवार पेंशन का फायदा मिलना चाहिए। इसके अलावा अनुकंपा नियुक्ति यानी कर्मचारी की मौत के बाद परिवार को नौकरी देने के नियम आसान करने की मांग भी रखी गई। अब कर्मचारियों की नजर 8वें वेतन आयोग पर टिकी है। लाखों सरकारी कर्मचारी उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले समय में सैलरी, पेंशन और सुविधाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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