यूनियन म्यूचुअल फंड ने लॉन्च की Retirement Scheme, जानिए यह ट्रेडिशनल रिटायरमेंट फंड से किस तरह अलग है

यूनियन एमएफ की रिटायरमेंट स्कीम इक्विटी इनवेस्टमेंट पर फोकस करेगी। इसके इक्विटी पोर्शन को एक रेगुलर डायवर्सिफायड इक्विटी फंड की तरह मैनेज किया जाएगा। यह स्कीम अलग-अलग सेक्टर और अलग-अलग मार्केट कैप वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश करेगी

अपडेटेड Sep 02, 2022 पर 6:09 PM
इस न्यू फंड ऑफर (NFO) में 15 सितंबर तक निवेश किया जा सकता है।

यूनियन म्यूचुअल फंड (MF) ने रिटायरमेंट स्कीम लॉन्च की है। रिटायरमेंट स्कीम लॉन्च करने वाला यूनियन म्यूचुअल फंड देश का 10वां म्यूचुअल फंड हाउस है। पहले से ऐसी 24 स्कीमें मार्केट में उपलब्ध है। इस न्यू फंड ऑफर (NFO) में 15 सितंबर तक निवेश किया जा सकता है।

रिटायरमेंट फंड कैटेगरी में कुछ फंड हाउसेज की एक से ज्यादा स्कीमें हैं। इनमें इक्विटी और डेट के बीच एसेट एलोकेशन के कई ऑप्शंस हैं। यूनियन एमएफ की रिटायरमेंट स्कीम इक्विटी इनवेस्टमेंट पर फोकस करेगी। इसके इक्विटी पोर्शन को एक रेगुलर डायवर्सिफायड इक्विटी फंड की तरह मैनेज किया जाएगा। यह स्कीम अलग-अलग सेक्टर और अलग-अलग मार्केट कैप वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश करेगी।

Union Mutual Fund के सीईओ जी प्रदीप कुमार ने कहा कि इस फंड में पांच साल का लॉक-इन पीरियड है। इसका मकसद निवेश में अनुशासन बनाए रखना है, जो लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा, "इंडस्ट्री रिपोर्ट्स बताती हैं कि इक्विटी एसेट्स का होल्डिंग पीरियड सिर्फ दो साल है।"


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लॉक-इन पीरियड की वजह से इनवेस्टर्स इक्विटी में लंबी अवधि तक अपना निवेश बनाए रखेगा। मनी हनी फाइनेंशियल सर्विसेज के फाउंडर अनूप भैया ने कहा, "इस फंड के साथ जो 'रिटायरमेंट' का टैग जुड़ा है, उसका असर इनवेस्टर के विहेबियर पर पड़ सकता है। इससे वे मार्केट के खराब दौर में भी अपने पैसे निकालने से बचेंगे।"

निवेश की अवधि लंबी होने पर रिटर्न पर बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता है। पिछले कुछ समय से रिटायरमेंट स्कीमों में बदलाव देखने को मिल रहा है। इस कैटेगरी की दो सबसे पुरानी स्कीमों ने शेयरों में अपना निवेश 40 फीसदी पर बनाए रखा है। लेकिन, बाद में लॉन्च होने वाली रिटायरमेंट स्कीमों के पोर्टफोलियो में इक्विटी की हिस्सेदारी ज्यादा है।

प्रदीप कुमार ने कहा, "हम इक्विटी ओनली ऑप्शन ऑफर कर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि हमने देखा है कि प्योर इक्विटी एलोकेशन से इक्विटी-डेट एलोकेशन के मुकाबले ज्यादा रिटर्न मिलता है। हम चाहते हैं कि इनवेस्टर्स अपने रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त वेल्थ जेनरेट करने के बारे में सोचें। उन्हें सिर्फ अपने खर्च पूरे करने के बारे में नहीं सोचना चाहिए बल्कि अपने पैशन का भी ध्यान रखना चाहिए।"

रिटायरमेंट फंड की कैटेगरी काफी छोटी है। इसकी वजह यह है कि फंड डिस्ट्रिब्यूटर्स आम तौर पर इनवेस्टर्स को अपने इनवेस्टमेंट गोल (Investment Goal) के लिए रेगुलर डायवर्सिफायड फंडों में निवेश करने की सलाह देते हैं। रिटायरमेंट फंडों का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) सिर्फ 16,000 करोड़ रुपये है। इस कैटेगरी के कुछ फंड सेक्शन 80सी के तहत टैक्स बेनिफिट ऑफर करते हैं। हालांकि, यूनियन रिटयायरमेंट फंड में यह बेनिफिट उपलब्ध नहीं है।

साल 2011 तक म्यूचुअल फंड मार्केट में सिर्फ दो रिटायरमेंट स्कीमें थीं- यूटीआई रिटायरमेंट बेनिफिट पेंशन फंड और फ्रैंकलिन इंडिया पेंशन फंड। कुछ पुरानी स्कीमों में इनवेस्ट्स को सेक्शन 80सी के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है। ऐसे दूसरे फंडों में भी 5 साल का लॉक-इन पीरियड है।

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