NCDEX RAINMUMBAI: अब बारिश पर भी ट्रेडिंग! 1 जून से शुरू होगा देश का पहला वेदर डेरिवेटिव, जानिए 10 बड़ी बातें

NCDEX RAINMUMBAI: क्या बारिश भी शेयर और कमोडिटी की तरह ट्रेड हो सकती है? 1 जून से भारत में इसकी शुरुआत होने जा रही है। NCDEX का नया RAINMUMBAI कॉन्ट्रैक्ट मानसून के जोखिम को वित्तीय साधन में बदल देगा। जानिए यह कैसे काम करेगा और किसे फायदा होगा।

अपडेटेड May 21, 2026 पर 5:02 PM
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RAINMUMBAI भारत का पहला ऐसा वेदर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट होगा, जिसकी ट्रेडिंग किसी एक्सचेंज पर होगी।

NCDEX RAINMUMBAI: भारत मौसम से जुड़े फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के एक नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है। नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (NCDEX) 1 जून 2026 को देश का पहला एक्सचेंज-ट्रेडेड वेदर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट RAINMUMBAI लॉन्च करेगा।

यह प्रोडक्ट कारोबारियों और अन्य हितधारकों को मानसून की अनिश्चितता से बचाव का अवसर देगा। इसके लिए एक रेगुलेटेड वित्तीय साधन उपलब्ध कराया जाएगा, जो बारिश के आंकड़ों से जुड़ा होगा। आइए जानते हैं RAINMUMBAI से जुड़ी 10 अहम बातें। लेकिन, पहले समझ लेते हैं कि RAINMUMBAI है क्या और इसका मकसद क्या है।

आखिर RAINMUMBAI है क्या?


RAINMUMBAI एक ऐसा वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट है, जिसमें लोग या कंपनियां बारिश के अनुमान पर दांव नहीं, बल्कि अपने कारोबार के जोखिम से बचाव (हेजिंग) कर सकते हैं। अब मान लीजिए किसी बिजली कंपनी, निर्माण कंपनी या किसान को डर है कि मानसून सामान्य से कम या ज्यादा रहेगा और इससे उसे आर्थिक नुकसान हो सकता है। ऐसे में वह इस कॉन्ट्रैक्ट में पोजिशन लेकर उस जोखिम की भरपाई कर सकता है।

इसका भुगतान फसल या संपत्ति के नुकसान के आधार पर नहीं, बल्कि IMD के दर्ज वास्तविक बारिश के आंकड़ों के आधार पर होगा। आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसा बाजार आधारित साधन है, जो बारिश की अनिश्चितता को एक वित्तीय जोखिम में बदल देता है, ताकि कंपनियां और निवेशक उससे होने वाले संभावित नुकसान से खुद को बचा सकें।

1. भारत का पहला एक्सचेंज-ट्रेडेड वेदर डेरिवेटिव

RAINMUMBAI भारत का पहला ऐसा वेदर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट होगा, जिसकी ट्रेडिंग किसी एक्सचेंज पर होगी। अब तक भारत में मौसम से जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए मुख्य रूप से फसल बीमा और सरकारी सहायता योजनाओं पर निर्भरता रही है।

2. बारिश के आंकड़ों से जुड़ा है यह उत्पाद

यह कॉन्ट्रैक्ट मानसून के दौरान मुंबई में दर्ज होने वाली वर्षा पर आधारित होगा। इसमें क्यूम्युलेटिव डेविएशन रेनफॉल (CDR) को ट्रैक किया जाएगा, जो यह मापता है कि वास्तविक बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) से कितनी अधिक या कम रही।

3. सांताक्रूज और कोलाबा स्टेशन का डेटा होगा आधार

इस डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के लिए मुंबई स्थित भारतीय मौसम विभाग (IMD) के सांताक्रूज और कोलाबा वेधशालाओं के बारिश आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। मानकीकृत IMD डेटा का उपयोग पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है।

LPA का निर्धारण 1991 से 2020 तक के 30 साल के ऐतिहासिक डेटा के आधार पर किया गया है। दैनिक वर्षा आंकड़े भी IMD के इन्हीं स्टेशनों से लिए जाएंगे।

4. IIT बॉम्बे और IMD के सहयोग से डेवलप

NCDEX ने इस फाइनेंशियल प्रोडक्ट को IIT बॉम्बे के सहयोग से डेवलप किया है। इसमें भारतीय मौसम विभाग के आधिकारिक वर्षा आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। बेंचमार्क 1991-2020 के 30 साल के ऐतिहासिक वर्षा डेटा पर आधारित है।

5. सेबी से मिल चुकी है मंजूरी

इस उत्पाद को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की मंजूरी मिल चुकी है। इससे यह वेदर-लिंक्ड उत्पाद एक रेगुलेटेड ट्रेडिंग फ्रेमवर्क के तहत काम करेगा।

6. सिर्फ किसानों के लिए नहीं है यह उत्पाद

बेशक कृषि क्षेत्र वर्षा की अनिश्चितता से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है, लेकिन यह उत्पाद केवल किसानों के लिए नहीं है। इसे बिजली कंपनियों, निर्माण कंपनियों, इंफ्रास्ट्रक्चर फर्मों, लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों और कृषि ऋण देने वाले बैंकों के लिए भी डिजाइन किया गया है। मानसून पर निर्भर कोई भी व्यवसाय इसका उपयोग कर सकता है।

7. बीमा की तरह नुकसान का आकलन नहीं होगा

पारंपरिक बीमा उत्पादों में भुगतान से पहले सर्वे और नुकसान का आकलन किया जाता है। RAINMUMBAI इससे अलग है क्योंकि यह एक कैश-सेटल्ड डेरिवेटिव है, जो सीधे वर्षा आंकड़ों से जुड़ा है। इसका मतलब है कि सेटलमेंट केवल दर्ज की गई बारिश के आधार पर होगा। इससे भुगतान प्रक्रिया तेज होगी और विवाद कम होंगे।

8. कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें तय

NCDEX के अनुसार इस कॉन्ट्रैक्ट की प्रमुख विशेषताएं होंगी:

  • टिक साइज: 1 मिमी वर्षा
  • लॉट मल्टीप्लायर: प्रति मिमी 50 रुपये
  • अधिकतम ऑर्डर साइज: 50 लॉट
  • दैनिक मूल्य सीमा: 9%

इसकी ट्रेडिंग सोमवार से शुक्रवार तक सुबह 10 बजे से होगी।

9. मौसम के जोखिम को बनाया जाएगा ट्रेडेबल

वेदर डेरिवेटिव का उद्देश्य मौसम से जुड़ी अनिश्चितता को एक मापने योग्य वित्तीय जोखिम में बदलना है, जिसे बाजार में हेज किया जा सके। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यवसाय को कम या ज्यादा बारिश से नुकसान होने की आशंका है, तो वह इस कॉन्ट्रैक्ट में पोजिशन लेकर संभावित नुकसान की भरपाई कर सकता है।

10. 'साइंस और फाइनेंस का संगम'

NCDEX के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ अरुण रस्ते ने कहा, 'भारत सदियों से मानसून की अनिश्चितता के साथ जीता आया है। RAINMUMBAI हर हितधारक को इस अनिश्चितता से निपटने के लिए एक वैज्ञानिक और रेगुलेटेड साधन उपलब्ध कराता है।'

वहीं IMD के अधिकारी बिक्रम सिंह ने इस पहल को 'रेगुलेटेड मार्केटप्लेस में साइंस और फाइनेंस का मिलन' बताया। यह लॉन्च ऐसे समय हो रहा है, जब जलवायु से जुड़ी अनिश्चितता कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए बड़ा आर्थिक जोखिम बनती जा रही है।

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