Nifty 50 Outlook: ब्रोकरेज फर्म सिटी ने निफ्टी 50 का टारगेट घटा दिया है। 11 जून की अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट ने सिटी ने इसके 26 हजार तक पहुंचने के आसार जताए हैं जबकि पहले यह टारगेट 27 हजार का था। सिटी के मुताबिक जियोपॉलिटिक्स, AI और अल-नीनो के चलते मार्केट सेंटीमेंट कमजोर हुआ है, खासतौर से FIIs यानी विदेशी निवेशकों के बीच। ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया है कि GEMS फंड में भारत का एलोकेशन पांच साल के निचले स्तर पर है और भारतीय बाजारों के लिए "अंडरवेट" पोजिशनिंग 20 साल में सबसे हाई लेवल के करीब है।
भारतीय मार्केट को लेकर क्या है FIIs की चिंताएं
सिटी के नोट के मुताबिक जियोपॉलिटिकल टेंशन और उससे पैदा होने वाली मैक्रो चुनौतियों के चलते विदेशी निवेशकों का मूड बिगड़ा है। जियोपॉलिटिकल टेंशन के चलते आरबीआई को विदेशी मुद्रा से जुड़े कई कदम उठाने पड़े। विदेशी निवेशकों की एक अहम चिंता एआई को लेकर है, क्योंकि इसके इंफ्रास्ट्रक्चर रोलआउट में अभी तक भारत की कोई खास भूमिका नहीं है। ब्रोकरेज ने कहा कि मीडिम से लॉन्ग टर्म में नौकरियों, वेतन और खपत पर पड़ने वाले असर पर नजर रखनी होगी।
अब पॉजिटिव की बात करें तो सभी चिंताओं के मुताबिक सिटी का कहना है कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, और लागत बढ़ने से होने वाली सुस्ती के बावजूद बाज़ार में रुझान अच्छे बने रहने की उम्मीद है। इसके अलावा इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में भारत का वेटेज अब लगभग 11% है, जबकि 2024 के मध्य में यह लगभग 20% था। चूंकि एक्टिव पोजिशनिंग अभी 'अंडरवेट' है यानी कि जब हालात बदलेंगे तो इसमें बढ़ोतरी की गुंजाइश है। एक और बात मार्केट के फेवर में है कि कमजोर मार्केट में घरेलू निवेश मजबूत बना हुआ है।
सिटी के मुताबिक IT GCC में बड़ी सुस्ती का असर नौकरियों और वेतन के ट्रेंड पर पड़ सकता है और आगे इसमें और गिरावट आती है या नहीं, इस पर नजर रखनी होगी। साथ ही घरेलू निवेश पर नजर रखनी होगी क्योंकि ढहते मार्केट में इसने ही संभाला हुआ था और अगर यह भी गिरता है तो मार्केट के लिए खतरा हो सकता है। इसके अलावा AI से जुड़े बदलावों पर भी नजर रखनी होगी।
सिटी ने निफ्टी के लिए अपने टारगेट मल्टीपल को पहले के 19x से घटाकर 18x कर दिया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि पश्चिमी एशिया में स्थिति सुधरने और विदेशी निवेशकों की वापसी बाजार के लिए अहम रहेगी। सेक्टरवाइज सिटी ने फाइनेंशियल, टेलीकॉम, हेल्थकेयर, डिफेंस और यूटिलिटीज को ओवरवेट कैटेगरी में रखा है तो IT सर्विसेज़, स्टेपल्स और मेटल्स को अंडरवेट कैटेगरी में टॉप पर रखा है।
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