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Nifty नहीं छू पाएगा 27000 का लेवल! City ने घटाया टारगेट, इन सेक्टर्स पर लगाया दांव

Nifty 50 Outlook: घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज निफ्टी की उठा-पटक अब टेंपररी नहीं है बल्कि इसकी सेहत पर असर पड़ गया। ऐसा इसलिए क्योंकि ब्रोकरेज फर्म सिटी ने इसका टारगेट घटा दिया है। जानिए अब निफ्टी के किस लेवल तक पहुंचने के आसार हैं और किन सेक्टर्स में निवेश कर अच्छा पैसा बनाया जा सकता है तो मार्केट में किन बातों पर नजर रखनी होगी

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Jun 11, 2026 पर 11:09 AM
Nifty नहीं छू पाएगा 27000 का लेवल! City ने घटाया टारगेट, इन सेक्टर्स पर लगाया दांव
Nifty 50 Outlook: 11 जून की अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट ने ब्रोकरेज फर्म सिटी ने निफ्टी के 26 हजार तक पहुंचने के आसार जताए हैं जबकि पहले यह टारगेट 27 हजार का था।

Nifty 50 Outlook: ब्रोकरेज फर्म सिटी ने निफ्टी 50 का टारगेट घटा दिया है। 11 जून की अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट ने सिटी ने इसके 26 हजार तक पहुंचने के आसार जताए हैं जबकि पहले यह टारगेट 27 हजार का था। सिटी के मुताबिक जियोपॉलिटिक्स, AI और अल-नीनो के चलते मार्केट सेंटीमेंट कमजोर हुआ है, खासतौर से FIIs यानी विदेशी निवेशकों के बीच। ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया है कि GEMS फंड में भारत का एलोकेशन पांच साल के निचले स्तर पर है और भारतीय बाजारों के लिए "अंडरवेट" पोजिशनिंग 20 साल में सबसे हाई लेवल के करीब है।

भारतीय मार्केट को लेकर क्या है FIIs की चिंताएं

सिटी के नोट के मुताबिक जियोपॉलिटिकल टेंशन और उससे पैदा होने वाली मैक्रो चुनौतियों के चलते विदेशी निवेशकों का मूड बिगड़ा है। जियोपॉलिटिकल टेंशन के चलते आरबीआई को विदेशी मुद्रा से जुड़े कई कदम उठाने पड़े। विदेशी निवेशकों की एक अहम चिंता एआई को लेकर है, क्योंकि इसके इंफ्रास्ट्रक्चर रोलआउट में अभी तक भारत की कोई खास भूमिका नहीं है। ब्रोकरेज ने कहा कि मीडिम से लॉन्ग टर्म में नौकरियों, वेतन और खपत पर पड़ने वाले असर पर नजर रखनी होगी।

अब पॉजिटिव की बात करें तो सभी चिंताओं के मुताबिक सिटी का कहना है कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, और लागत बढ़ने से होने वाली सुस्ती के बावजूद बाज़ार में रुझान अच्छे बने रहने की उम्मीद है। इसके अलावा इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में भारत का वेटेज अब लगभग 11% है, जबकि 2024 के मध्य में यह लगभग 20% था। चूंकि एक्टिव पोजिशनिंग अभी 'अंडरवेट' है यानी कि जब हालात बदलेंगे तो इसमें बढ़ोतरी की गुंजाइश है। एक और बात मार्केट के फेवर में है कि कमजोर मार्केट में घरेलू निवेश मजबूत बना हुआ है।

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