Nifty और Sensex में 8 जुलाई के बाद सबसे बड़ी गिरावट, क्रूड में उछाल से सहमा बाजार

ब्रेंट क्रूड का प्राइस गुरुवार को उछलकर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया । इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। इसका असर शेयर बाजारों पर पड़ा। सेंसेक्स और निफ्टी में बीते 10 हफ्तों की सबसे बड़ी गिरावट आई

अपडेटेड Sep 24, 2026 पर 6:42 PM
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सबसे ज्यादा गिरावट फाइनेंशियल खासकर इंश्योरेंस और इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के शेयरों में आई

भारतीय शेयर बाजारों में 24 सितंबर को बीते 10 हफ्तों की सबसे बड़ी गिरावट आई। इसमें क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का बड़ा हाथ है। ब्रेंट क्रूड का प्राइस गुरुवार को उछलकर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया है। इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। इसका असर शेयर बाजारों पर पड़ रहा है।

इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के शेयर क्रैश

सबसे ज्यादा गिरावट फाइनेंशियल खासकर इंश्योरेंस और इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के शेयरों में आई। इसकी वजह इंश्योरेंस सेक्टर के रेगुलेटर आईआरडीएआई का एक प्रस्ताव है, जिसके लागू होने पर इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की बिक्री पर मिलने वाला कमीशन कम हो जाएगा। इसका सीधा असर बीपी फिनटेक जैसी कंपनियों की कमाई पर पड़ेगा। पीबी फिनटेक का शेयर 36 फीसदी क्रैश कर गया।


सेंसेक्स, निफ्टी में 8 जुलाई के बाद सबसे बड़ी गिरावट

निफ्टी 1.64 फीसदी यानी 383 अंक गिरकर 23,063 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.67 फीसदी यानी 1,247 अंक लुढ़कर 73,580 अंक पर क्लोज हुआ। दोनों ही सूचकांकों में 8 जुलाई के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड 2.4 फीसदी चढ़कर 105 डॉलर के पार जाने की वजह ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान का संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में दिया गया भाषण है। 23 सितंबर को उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे कभी नहीं झुकेगा।

क्रूड की ऊंची कीमतें बढ़ा सकती हैं महंगाई

ईरान के राष्ट्रपति के भाषण से यह साफ हो गया है कि मध्यपूर्व का संकट जल्द खत्म होने नहीं जा रहा है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की कोशिशें जारी हैं। अगर मध्यपूर्व की यह क्राइसिस जल्द खत्म नहीं होती है तो क्रूड ऑयल की कीमत लंबे समय तक हाई बनी रह सकती है। इसका सीधा असर दुनियाभर में इनफ्लेशन पर पड़ेगा। इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए फेडरल रिजर्व सहित दूसरे केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। इसका असर कंपनियों के पूंजीगत निवेश पर पड़ेगा।

निफ्टी के 23500 से नीचे रहने तक बेयरिश ट्रेंड बना रहेगा

एक्सिस डायरेक्ट में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट हेमंग गोर ने कहा, "भारत के लिए क्रूड की कीमतें काफी अहम हैं। कुछ समय तक 100 डॉलर से नीचे जाने के बाद फिर से क्रूड में उछाल दिख रहा है। इससे क्रूड की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसका असर बाजार की रिकवरी पर पड़ा है।" उन्होंने कहा कि निफ्टी जब तक 23,500 से नीचे बना रहता है, मार्केट का ट्रेंड बेयरिश बना रहेगा।

इन कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट 

24 सितंबर को सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस (6.16 फीसदी), बजाज फिनसर्व (5.87 फीसदी), चोलामंडलम इनवेस्ट (5.20 फीसदी), एक्सिस बैंक (4.56 फीसदी), बजाज फिनसर्व (4.56 फीसदी), टाटा कैपिटल (3.94 फीसदी) और अदाणी एंटरप्राइजेज शामिल रहे।

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